चंडीगढ़ समाचार

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आजादी के 70 साल बाद इन गांवों में अब पहुंची बिजली, जैसे ही बिजली जली तो लगा अब सब बदल गया है

गांव में खुशी का माहौल, लोग खुद भी कर रहे बिजली कर्मचारियों की मदद

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2018, 05:14 AM IST
गांव में जली हुई बिजली। गांव में जली हुई बिजली।

  • 02 करोड़ रुपए का बजट बिजली डिपार्टमेंट ने इसके लिए अप्रूव किया।
  • 52 किलोमीटर तक के एरिया में तारों को डालने और पोल को लगाने का काम कंस्ट्रक्शन विंग करेगी।

पंचकूला(चंडीगढ़). मोरनी और हिमाचल बॉर्डर के साथ लगते 12 गांवों में आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी। चुनावों में घोषणाएं बहुत हुई, वोट लेने के लिए थोड़ा-बहुत काम भी शुरू हुआ, लेकिन कागजी अड़ंगे डाल काम रोक दिया गया। लोगों से जुड़े इस जरूरी मुद‌्दे को 3 और 4 अप्रैल को चंडीगढ़ भास्कर में प्रमुखता से उठाया गया था। इसका यह असर रहा कि बिजली पहुंचाने का जो काम रुका पड़ा था, वह शुरू हो गया।

6 गांवों में लोगों की जिंदगी में रोशनी भी हो गई है। लाइट पहुंचाने के लिए जब खंभों को लगाया जा रहा था तो खुशी-खुशी गांववाले इस काम में डिपार्टमेंट की टीम के साथ जुटे हुए थे। लोगों ने पहली बार अपने गांव में लाइट देखी, वहां का क्या माहौल था, यह जानने के लिए भास्कर की टीम उनके बीच में 24 घंटे रही। वहां पर सभी के चेहरों पर ऐसी खुशी थी कि मानो उनकी जिंदगी ही बदल गई हो।

यहां सप्लाई हुई शुरू


अभी तक दाबसू पंचायत के गांव नीमवाला, कमराडी, सिंघवाला, घाटा, बजीरीवाला तथा गुजरवाली में बिजली पहुंच गई है।


इनमें पहुंचनी बाकी


गांव दुदला, हराठा, सेरठा, जामला, सिल्ली, सिंहवाला बेला में 31 अगस्त तक यहां आएगी लाइट

इतनी देरी इसलिए हुई


मोरनी का एरिया कालका विधानसभा में आता है, जिन गांवों में बिजली नहीं है या अभी पहुंच रही है, वहां पर कुल 800 वोट हैं।

भास्कर ने बताया था कैसे रहते हैं यहां लोग


बिना बिजली के मोरनी के गांवों में लोगों का क्या हाल है, यह भास्कर टीम ने बताया था 3 अप्रैल के अंक में। इसके बाद ही हरियाणा सरकार ने बिजली प्रोजेक्ट के रुके काम शुरू करवाए।

जैसे ही घर में बिजली जली तो लगा अब सब बदल गया है: सीमा

सिंहवाला गांव में जब भास्कर टीम गई तो सामने एक मकान के बाहर और अंदर लाइट जल रही थी। मकान था सीमा देवी का। बात की तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि सोचा नहीं था कि कभी घर में बिजली आएगी। सीमा ने बताया कि जब मेरी शादी हुई तो यहां आने के बाद ही पता चला था कि गांव में तो लाइट ही नहीं हैं। मैं सोचती थी, इससे अच्छा तो मां-बाप मुझे मार ही देते। कैसे एरिया में गिरा दिया मुझे। शादी के 23 साल पूरे होने के बाद अब सिंहवाला में लाइट आई है। उम्मीद तो नहीं थी, लेकिन फिर भी मकान बनाने के दौरान घर वालों ने बिजली की फिटिंग के लिए पाइप डलवा दिए थे। तारें अब डलवाई हैं। पहली बार जैसे ही बिजली मेरे घर पहुंची तो ऐसा लगा कि जिंदगी की उम्मीद पूरी हो गई है। मैं तो खुशी के मारे नया फ्रिज भी लाई हूं। पहले रिश्तेदारी में जाते थे तो सबके साथ पास पूरे साधन होते थे। लेकिन हमारे पास कुछ भी नहीं था। अब नया फ्रिज लाई हूं, अब टीवी भी लेकर आऊंगी।

खंबे लगाते हुए बिजली कर्मी। खंबे लगाते हुए बिजली कर्मी।
बिजली आने से खुश होती महिला। बिजली आने से खुश होती महिला।
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गांव में जली हुई बिजली।गांव में जली हुई बिजली।
खंबे लगाते हुए बिजली कर्मी।खंबे लगाते हुए बिजली कर्मी।
बिजली आने से खुश होती महिला।बिजली आने से खुश होती महिला।

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