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11th की 3 स्टूडेंट्स ने लेक्चरर के खिलाफ दी सेक्सुअल हैरासमेंट की शिकायत, दोषी

जुकेशन डिपार्टमेंट ने कमेटी बनाकर की जांच, दोनों को दोषी पाकर किया सस्पेंड, लैब अटेंडेंट का भी नाम...

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 05:13 AM IST
डेमोफोटो डेमोफोटो

चंडीगढ़. शहर के एक गवर्नमेंट स्कूल में 11वीं की तीन स्टूडेंट्स के सेक्सुअल हैरासमेंट का मामला सामने आया है। घटना फरवरी 2017 की है, जब तीनों स्टूडेंट्स ने क्लास टीचर बिमल कुमार के खिलाफ सेक्सुअल हैरासमेंट और मेंटल टॉर्चर की शिकायत दी। शिकायत में लैब अटेंडेंट गुरमेज सिंह का भी नाम है, जो सारे वाकये से वाकिफ था और स्टूडेंट्स पर दबाव बनाता था कि वो लेक्चरर की डिमांड पूरी करें।


यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट ने कमेटी बनाकर इस गंभीर मामले की जांच की और अप्रैल 2017 में बिमल और गुरमेज को दोषी पाते हुए सस्पेंड कर दिया। दोनों तब से सस्पेंड चल रहे हैं। डिपार्टमेंट ने 2 मई को चंडीगढ़ पुलिस को भी शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की, लेकिन बच्चियों के साथ इतने गंभीर अपराध में पुलिस ने अब तक कोई एक्शन नहीं लिया है। पुलिस की दलील है कि स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने लिखित में दिया है कि वो कोई कार्रवाई नहीं कराना चाहते। जबकि कमेटी ने जांच में पाया कि बिमल कुमार इन तीन स्टूडेंट्स को फेल करने की धमकी देता था। कमेटी ने इसके बाद पूरे क्लास के पेपर्स की री-इवैल्यूएशन करवाई तो पूरी क्लास के रिजल्ट में बहुत फर्क मिला है। बिमल ने आरोपों से इंकार किया है, जबकि गुरमेज का मोबाइल ऑफ मिला।

पेरेंट्स ने भी दिए बयान... शिकायत वापस लेने का दबाव बनाता रहा लेक्चरर

पहली लड़की की मां ने कमेटी को बताया कि उनकी बेटी ने दिसंबर 2016 में पहली बार टीचर बिमल कुमार की हरकतों के बारे में बताया था। लड़की के माता-पिता ने बिमल से गुजारिश की कि बेटी को हैरास न किया जाए। इसके बावजूद बिमल की हरकतें जारी रहीं। स्टूडेंट ने टीचर और प्रिंसिपल को शिकायत दी तो बिमल ने किसी रिश्तेदार के जरिए पेरेंट्स से कॉन्टैक्ट करवाकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया।

दूसरी लड़की के पिता ने कमेटी को दिए बयान में कहा कि उनकी बेटी ने अपनी मां को बिमल की हरकतों के बारे में मार्च 2017 में बताया था। पिता ने बेटी से पूछा तो वह रोने लगी और सबकुछ बताया। शिकायत स्कूल से की तो एक डॉक्टर ने उनसे संपर्क कर कहा कि वह अपनी बेटी से कहें की शिकायत वापस ले ले। डॉक्टर ने अपना कार्ड और उसके पीछे टीचर बिमल का मोबाइल नंबर लिखकर दिया था।

तीसरी लड़की के पिता ने कमेटी को बताया- डॉक्टर का फोन उन्हें भी आया था कि उनकी बेटी लेक्चरर बिमल कुमार के खिलाफ शिकायत वापस ले ले। इसके बाद टीचर बिमल कुमार खुद उनसे मिलने के लिए आया। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी से पूछा तो इस मामले का पता लगा। एग्जाम्स के बाद उन्होंने टीचर बिमल कुमार को 21 मार्च को मिलने के लिए बुलाया पर वह मिलने नहीं आया।

कमेटी के सामने लड़की के कैरेक्टर पर सवाल

कमेटी के सामने बिमल ने खुद को निर्दोष बताते हुए सारे आरोपों से इंकार किया है और कहा कि तीनों लड़कियां पढ़ाई में कमजोर हैं। बिमल ने एक लड़की के कैरेक्टर पर भी सवाल उठाए। कमेटी ने पूछा कि लड़कियों ने उसी पर आरोप क्यों लगाए तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। गुरमेज ने भी कमेटी को बताया कि उसके ऊपर लगे आरोप झूठे हैं।

कमेटी ने जांच रिपोर्ट में यह लिखा

कमेटी ने पाया कि तीनों स्टूडेंट्स के आरोप सही हैं। तीनों को क्लास टीचर बिमल कुमार ने मॉलेस्ट, सेक्सुअली हैरास और मेंटली टॉर्चर किया। बिमल ने स्टूडेंट और टीचर के बीच भरोसे के रिश्ते को तहस नहस कर दिया। सोसाइटी में टीचर की इमेज को भी तार-तार किया है। बिमल ने लैब अटेंडेंट के साथ मिलकर साजिश रची। दोनों दोषी हैं और माफी के लायक नहीं।

पूरी क्लास की आंसरशीट्स की री-इवैल्यूएशन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए

कमेटी ने सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की टीम बनाई और इन तीन स्टूडेंट्स सहित पूरी क्लास की आंसरशीट्स की री-इवैल्यूएशन करवाई गई। इसमें सब्जेक्ट्स ई-1 में 40 परसेंट स्टूडेंट्स, ई-2 में 29 परसेंट और ई-3 में 39 परसेंट स्टूडेंट्स के मार्क्स में फर्क आया। आंसरशीट पर मार्क्स के टोटल के बाद पूरी क्लास की मार्क्स की एक लिस्ट बनती है। इस लिस्ट के मार्क्स भी आंसरशीट में दिए गए मार्क्स से मैच नहीं हुए। ई-1 सब्जेक्ट में 53 परसेंट, ई-2 में 65 परसेंट और ई-3 में 50 परसेंट का फर्क पाया गया।

पुलिस की जांच पर संदेह
एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 21 अप्रैल 2017 को दोनों काे सस्पेंड किया। 12 सितंबर को चार्जशीट किया। 2 मई को दोनों के खिलाफ एसएसपी को एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखा। पुलिस ने कोई एक्शन लेने में 6 महीने लगा दिए। नवंबर 2017 में डीएसपी हेडक्वार्टर ने एक लेटर लिखा कि जांच में तीनों स्टूडेंट्स, पेरेंट्स व प्रिंसिपल ने लिखकर दिया है कि बिना किसी दबाव के वह इस मामले को आगे नहीं लेकर जाना चाहते, न किसी के खिलाफ कोई एक्शन चाहते हैं। पुलिस ने लॉ ऑफिसर से राय मांगी है कि पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है या नहीं। साथ ही पुलिस ने लिखा है कि आरोपी बहाली की मांग कर रहे हैं या सस्पेंशन के दौरान अलाउंस बढ़ाने की बात कर रहे हैं। पुलिस ने लिखा है कि अलाउंस बढ़ाने चाहिए।

कमेटी की जांच में सेक्सुअल हैरासमेंट, मॉलेस्टेशन साबित

कमेटी में कौन?
कमेटी में डिप्टी डायरेक्टर वोकेशनल एजुकेशन, डिप्टी डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन और लॉ ऑफिसर शामिल थे।

कमेटी की जांच

बिमल कुमार तीनों स्टूडेंट्स को अलग-अलग समय स्टोर रूम में रखी अलमारी के अंदर रजिस्टर रखने या लाने के लिए कहता था। स्टूडेंट्स जैसे ही अलमारी के पास पहुंचती थीं, वह उन्हें पकड़कर अलग-अलग तरह से मॉलेस्ट करता था।

स्टूडेंट-1 :

बिमल कुमार कहता था कि उसे सेक्सुअली सैटिस्फाई नहीं किया तो फेल कर देगा। बिमल ने प्राइवेट पार्ट्स को टच किया और स्टूडेंट से भी करवाया।

स्टूडेंट-2 :

20 फरवरी 2017 को बिमल ने प्रैक्टिकल के बाद अलमारी में नोट्स ढूंढ़ने के लिए बुलाया। फिर पीछे से जकड़कर मॉलेस्ट किया।

तीसरी स्टूडेंट ने भी कमेटी को ऐसे ही बयान दिए हैं।

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