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डिमांड थी 5908 करोड़ की, चंडीगढ़ को मिले 4511.91 करोड़ रुपए, 336 करोड़ की कटौती

केंद्र की चंडीगढ़ को हिदायत...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:13 AM IST
336 crores deduction

चंडीगढ़. जूदा फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में चंडीगढ़ प्रशासन करीब 3800 करोड़ रुपए कमाकर केंद्र सरकार के खाते में डाल चुका है। अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए चंडीगढ़ को 4511.91 करोड़ का बजट मिला है। यानी जितना हमने कमाकर दिया उससे करीब 700 करोड़ ज्यादा। इसमें से भी 4006 करोड़ सैलरी और अन्य खर्चों पर खत्म हो जाएंगे। डेवलपमेंट के नाम पर मिले हैं सिर्फ 505 करोड़ रुपए।

2017-18 के मुकाबले बजट में 4.60 परसेंट बढ़ोतरी हुई है। चंडीगढ़ ने रेवेन्यू हेड (सैलरी व अन्य खर्चों के लिए) में 5066.79 करोड़ मांगे थे, मिले 4006.88 करोड़ रुपए। कैपिटल हेड, जिससे शहर की डेवलपमेंट होनी है, में 841.43 करोड़ रुपए मांगे गए थे, इसमें 505.03 करोड़ ही मिले हैं। यानी चंडीगढ़ की डेवलपमेंट बजट में 336.40 करोड़ की कटौती।

बिजली के रेट अौर अन्य सोर्सेज से अपनी कमाई बढ़ाओ

बजट देने के साथ ही केंद्र सरकार ने यूटी चंडीगढ़ को अपना रेवेन्यू बढ़ाने को भी लिखा है। चंडीगढ़ प्रशासन को जो बजट हर साल मिलता है उसका मैक्सिमम शेयर सैलरी और बाकी खर्चों में ही चला जाता है। एसेट के रूप में नई बिल्डिंग्स या प्रॉपर्टी बनाने में बहुत कम खर्च होता है। केंद्र ने प्रशासन को कहा है कि जो कुल बजट दिया गया है उसका 8.5 परसेंट हिस्सा एसेट बनाने में लगाएं, जैसे बिल्डिंग या कोई कंस्ट्रक्शन, ताकि उससे यूटी को कुछ रेवेन्यू मिल सके। केंद्र ने चंडीगढ़ को बिजली के रेट बढ़ाने के लिए कहा है, ताकि अगले फाइनेंशियल ईयर का रेवेन्यू 4000 करोड़ रुपए से ज्यादा मिल सके।

सैलरी पर ही इतना खर्च...

1700 करोड़ खर्च होते हैं कर्मचारियों

50 करोड़ रुपए प्रशासन को सरेंडर करने पड़े हैं सैलरी हेड से 2017-18 में

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