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बच्चों की लड़ाई में 8 साल की बच्ची की आंख में लगी चोट, डॉक्टर्स को लगा डमी है

बच्ची की मां को जब रोते देखा तो पता चला कि बच्ची सच में घायल है

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 05:36 AM IST
बच्ची का इलाज करते हुए डॉक्टर। बच्ची का इलाज करते हुए डॉक्टर।

पंचकूला. जैसे ही जनरल हॉस्पिटल में भी मैसेज फ्लैश हुआ कि जोरदार भूकंप आया है, सभी मरीजों को बिल्डिंग से बाहर सेफ जगह पर शिफ्ट किया जाए। मैसेज फ्लैश होते ही हॉस्पिटल में अंधेरा हो गया, मरीजों में भगदड़ मच गई, जो मरीज अपने बच्चों के साथ लाइनों में लगे थे, सभी एक दूसरे का हाथ पकड़ हॉस्पिटल से बाहर भाग रहे थे।

डॉक्टर्स को लगा डमी है

डॉक्टर्स से लेकर स्टाफ तक इधर से उधर दौड रहा था, इमरजेंसी में जितने भी मरीज एडमिट थे, उन्हें बैड़ समेत दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा था। कुछ देर बाद पुलिस के भी काफी जवान हॉस्पिटल के अंदर और बाहर तैनात हो गए। मरीज और उनके परिवार के लोग भी एक बार तो डर गए थे कि आखिर एक दम से इतनी अफरा तफरी कैसे मच गई।

तभी अनाउंसमेंट होती है कि यह एक मॉकड्रिल है, कोई भगदड़ न मचाएं, सब कुछ ठीक है। तब लोग शांत हुए। जनरल हॉस्पिटल में मॉक ड्रिल सुबह 10 बजे अलार्म बजने पर शुरू हुई थी। जिसके बाद दोपहर 12.30 बजे तक पूरे हॉस्पिटल में अफरातफरी का माहौल बना रहा।

बच्ची को रैफर किया तो पूछा डमी है या ओरीजनल
सूरजपुर के सरकारी स्कूल में बच्चों की आपस में लडाई हुई, जिसमें 8 साल की दिव्या को आंख में चोट आई। दिव्या को इलाज के लिए सेक्टर-6 के जनरल हॉस्पिटल लाए, यहां चोट ज्यादा गंभीर होने के बाद उसे पीजीआई रैफर कर दिया गया। एंबुलेंस के लिए कंट्रोल रूम फोन अाया तो एंबुलेंस लगवाने के बजाय यह कन्फर्म किया गया कि मरीज डम्मी है या ओरिजनल। इसके बाद जिस इमरजेंसी को मॉक ड्रिल के लिए बंद किया गया था, वहीं से इस बच्ची को लाया गया और यहां से ही मरीज को पीजीआई के लिए ले जाया गया।

रोती हुई मां बच्ची को लेकर पहुंची डमी मरीजों के बीच
11.09 मिनट पर गोद में अपने बच्चे को लेकर रोती हुई महिला डम्मी मरीजों के बीच पहुंची। बच्ची की आंखे बंद थी, उसकी मां रो रही थी, स्टाफ बोला डम्मी है कहीं भी लिटा लो, जब इस बच्चे पर मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. नितिन गर्ग की नजर पड़ी तो उन्होंने एकदम उस बच्चे को बैड पर लिटाकर उसका चैकअप किया आैर एक दो डॉक्टर्स को भी बुलाकर उस बच्चे का इलाज किया।