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कोर्ट में पेश कीं नशे की खाली शीशियां, डिफेंस लाॅयर ने पूछा सिरप कहां है, ASI बोला-चूहे पी गए, आरोपी बरी

अदालत में साबित हुआ कि एएसआई ने युवक को रंजिश के कारण फंसाने के लिए रचा था ड्रामा

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 08:36 AM IST
Acquitted due to inpresence of proof

जालंधर. आपने इंसानों को सबूत मिटाते देखा और सुना होगा लेकिन एडिशनल सेशन जज शाम लाल की कोर्ट में शनिवार को एक ऐसा केस आया जिसमें चूहों ने आरोपी के खिलाफ सबूतों को मिटाया। दरअसल, पुलिस ने मेडिकल नशे की खेप रखने के आरोप में रेडियो कॉलोनी के राहुल गाेयल को आरोपी बनाया था।

ट्रायल के दौरान कोर्ट में जो नशे की खेप में पकड़ी शीशियां पेश की गईं लेकिन वह खाली थीं। बचाव पक्ष के वकील दर्शन सिंह दयाल ने एएसआई किरपाल सिंह से पूछा कि शीशियों का सिरप कहां गया तो उनका जबाव था, चूहे पी गए। मालखाने के रिकॉर्ड में भी इस बात का कोई जिक्र नहीं था। सबूतों के अभाव में राहुल को बरी कर दिया गया।

पति के लिए आवाज उठाने वाली नेहा ने कर ली थी खुदकुशी


आशु पर नशा तस्करी का कलंक हट गया पर उसकी पत्नी नेहा ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। 2 जनवरी 2013 को आशु पकड़ा गया और 30 अप्रैल 2013 को बाहर आया था। वह नेहा संग भरत नगर में रहने लगा। एक माह बाद में उसने नई लव स्टोरी शुरू कर दी। खफा होकर नेहा ने खुदकुशी कर ली थी। यह वाला मामला अभी अंडर ट्रायल है।

जांच में भी एडीसीपी ने दे दी थी क्लीनचिट

पुलिस रिकाॅर्ड के अनुसार 2 जनवरी 2013 की रात एंटी नारकोटिक्स सेल के एएसआई किरपाल ने भरत नगर के आशु अरोड़ा को नंगल शामा से मेडिकल नशे के साथ पकड़ने का दावा किया था। थाना रामामंडी में आशु पर केस दर्ज किया था। उसकी निशानदेही पर पतारा से भी मेडिकल नशा पकड़ा था। आशु की पत्नी नेहा की शिकायत पर जांच एडीसीपी नवजोत सिंह माहल (अब एसएसपी खन्ना) को सौंपी थी। जांच में क्लीनचिट के बाद आसु को डिस्चार्ज करवा दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि मेडिकल नशा राहुल का है। इसलिए उस पर नशा तस्करी का नया केस थाना आदमपुर में दर्ज हुआ पर उसे बेल मिल गई थी। पुलिस ने जांच पूरी कर चार्ज शीट फाइल कर दी थी।

वह एरिया भी एएसआई के पास नहीं जहां रेड की


डिफेंस के एडवोकेट दर्शन सिंह दयाल ने दलील दी कि एएसआई उनके क्लांइट की शॉप पर मेडिसिन लेने आया था। पैसे मांगने पर दवा फेंककर चला गया। घटना सीसीटीवी में भी कैद है। इसी दुश्मनी के कारण उनके क्लांइट को फंसाया गया। जहां पर रेड की वह एरिया भी देहात पुलिस के अंडर में आता था। एएसआई ने सारा मामला फर्जी बनाया है। एडवोकेट की दलील से सहमत होते हुए राहुल को बरी कर दिया गया।

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