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आयुष मंत्रालय चाहता है आयुर्वेद कॉलेज NIA जयपुर जैसा बने, हेल्थ डिपार्टमेंट एम्स के पक्ष में

पंचकूला में बनना है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा, हाे रही देरी

Raviish Kumar Jha | Last Modified - Dec 04, 2017, 05:22 AM IST

  • आयुष मंत्रालय चाहता है आयुर्वेद कॉलेज NIA जयपुर जैसा बने, हेल्थ डिपार्टमेंट एम्स के पक्ष में

    पंचकूला.एमडीसी मनसा देवी परिसर में एम्स की तर्ज पर आयुर्वेद कॉलेज बनेगा या जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (एनआईए) का पार्ट टू बनेगा अभी संशय में है। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिनिस्ट्री ऑफ आयुष की ओर से आने वाले जवाब का इंतजार किया जा रहा है ताकि उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।


    दरअसल कुछ महीने पहले आयुष विभाग की ओर से प्रोजेक्ट के 500 करोड़ फंड की अप्रूवल के लिए मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के पास फाइल भेजी गई थी। फाइल के जवाब में नवंबर महीने में मिनिस्ट्री ऑफ आयुष ने एम्स की तर्ज पर आयुर्वेद कॉलेज बनाने के बजाए प्रोजेक्ट में बदलाव करते हुए एनआईए जयपुर की तर्ज पर पार्ट टू बनाने को कहा। इस पर विभाग ने लेटर लिखकर प्रोजेक्ट पर पहले की शर्त के मुताबिक काम करने की बात मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के समक्ष रखी। फिलहाल मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य विभाग ने लेटर लिखकर कहा-पहले की शर्त के मुताबिक होना चाहिए काम

    स्वास्थ्य विभाग के एसीएस ने मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के लेटर के जवाब में हाल ही में लेटर लिख उन्हें पहले की शर्त के तहत एम्स की तर्ज पर आयुर्वेद कॉलेज बनाने का अपना पक्ष रखा। सीएम व स्वास्थ्य मंत्री की ओर से देश में पहला एम्स के तर्ज पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा, योगा एंड नेचुरोपैथी कॉलेज बनाए जाने की घोषणा पूरे राज्यभर में की गई है। ऐसे में अगर इस प्रोजेक्ट में बदलाव होता है तो यह सरकार के लिए घाटे का सौदा साबित होगा।

    आयुर्वेद कॉलेज की वजह से मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो रहा

    एमडीसी में बनने वाले मेडिकल कॉलेज के प्रोजेक्ट को एम्स की तर्ज पर बनने वाले आयुर्वेद कॉलेज की वजह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 2017 से पहले मेडिकल कॉलेज के लिए वार्ड लेवल पर सरकार व सरकारी एजेंसी की ओर से काम किया जा रहा था। लेकिन आयुर्वेद कॉलेज का प्रोजेक्ट आते ही मेडिकल कॉलेज के प्रोजेक्ट पर से सरकार व सरकारी एजेंसियों का ध्यान हट गया।

    250 बेड्स का अस्पताल बनाने की है प्लानिंग

    मिनिस्ट्री ऑफ आयुष की ओर से पंचकूला के एमडीसी में एम्स की तर्ज पर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद, योगा एंड नेचुरोपैथी कॉलेज बनाए जाने की तैयारी की जा रही थी। अभी तक के प्लानिंग के मुताबिक माता मनसा देवी मंदिर परिसर में करीब 20 एकड़ में 500 करोड़ की लागत से यह कॉलेज बनाया जाना है। कॉलेज में 250 बेड का अस्पताल बनाया जाना है। यहां तक कि प्लानिंग के मुताबिक जुलाई-अगस्त 2017 तक इसके लिए टेंडर भी कॉल करना था जो कि अभी तक नहीं हुआ है। प्लानिंग के मुताबिक कॉलेज बीएएमएस कॉलेज भी खोला जाना है और इसके तहत कॉलेज में 60 स्टूडेंट्स के बैच से शुरुआत की जाएगी। प्लानिंग के मुताबिक कॉलेज में एमडी लेवल के कोर्स सहित एडवांस रिसर्च किए जा सकते हैं।

    श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड ने दी है जमीन

    कॉलेज के लिए श्रीमाता मनसा देवी श्राइन बोर्ड व मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के बीच करारनामा हुआ है। करारनामे में 33 रुपए में 33 साल के लिए आयुष विभाग को 20 एकड़ की जगह की लीज दी गई है। 99 साल में आयुष विभाग को तीन बार लीज डीड बढ़ाए जाने के लिए कारनामा करना होगा। पहले फेज में इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग के लिए 278 करोड़ रुपए खर्चे जाने की प्लानिंग है और वह पैसा मिनिस्ट्री ऑफ आयुष द्वारा ट्रांसफर भी किया जाना है। वहीं, दूसरे फेज में बचे सवा दो सौ करोड़ रुपए में से जरूरत के हिसाब से पैसा मिनिस्ट्री ऑफ आयुष द्वारा ट्रांसफर किया जाना है।

    मंत्रालय के जवाब का इंतजार

    आयुष विभाग के डायरेक्टर डॉ. बलदेव धीमान ने बताया कि आयुष मंंत्रालय से लेटर आया था, जिसमें एम्स की तर्ज पर आयुर्वेद कॉलेज बनाए जाने की बजाय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा जयपुर की तर्ज पर कॉलेज बनाए जाने को कहा गया था। उसके बाद एसीएस की ओर से जवाब में लिखकर पहले नियम-शर्त के मुताबिक एम्स की तर्ज पर ही कॉलेज बनाए जाने का पक्ष रखा। अब मंत्रालय के जवाब का इंतजार है।

    खर्च का ब्यौरा भी तैयार हो चुका है

    - कॉलेज के 250 बेड अस्पताल के लिए 83.56 करोड़ रुपए खर्चे जाएंगे
    - कॉलेज के लिए 62.04 करोड़ रुपए खर्चे जाएंगे
    - कॉलेज के ऑडिटोरियम के लिए 4 करोड़ रु. खर्चे जाएंगे
    - 91 कमरे के हॉस्टल के लिए 11.43 करोड़ रु. खर्चे जाएंगे
    - डाॅक्टर सेंटर के लिए 2.37 करोड़ रुपए खर्चे जाएंगे
    - वीआईपी एकोमोडेशन के लिए 1.26 करोड़ रुपए खर्चे जाएंगे
    - स्टाफ क्वार्टर के लिए 192 करोड़ रुपए खर्चे जाएंगे
    - साइट डेवलपमेंट वर्क्स एंड बल्क सर्विस पर 55 करोड़ रु.
    - इक्विपमेंट के लिए 92 करोड़ रुपए
    - फर्नीचर पर 14.5 करोड़ रुपए खर्चे जाएंगे।
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