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अहम सबूत थीं लाशों से निकली गोलियां, जो टैंपर्ड कर दी गईं ताकि पता न चले किस हथियार से चलीं

केंद्र की फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा, जांच के आदेश

Dainik Bhaskar

Jan 17, 2018, 04:07 AM IST
गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह

चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति में तूफान लाने वाली सबसे चर्चित घटना बहबलकलां गोलीकांड की जांच 2 साल बाद भी नतीजे तक तो पहुंची नहीं, सबूत जरूर मिटाने की काेशिश की गई है। दो न्यायिक आयोग बने, एसआईटी को जांच सौंपी गई लेकिन गोली चलाने वाले अभी तक आईडेंटिफाई नहीं हो सके। केस की सबसे अहम कड़ी मृतकों के शरीर से मिलीं गाेलियां, जो चलाने वाले पुलिसवालों को आईडेंटिफाई करने का सबसे अहम सबूत थीं, उन्हें ही टैंपर्ड कर दिया गया।

चंडीगढ़ स्थित केंद्र की फॉरेंसिक लैब ने जांच कमीशन को दी रिपोर्ट में कहा कि जो बुलेट जांच को आई थी, वह एसएलआर से ही चली थी, मगर किसके, ये कहना मुश्किल है, क्योंकि बुलेट से बुरी तरह टैंपरिंग (छेड़छाड़) हुई है। उन्होंने ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की सिफारिश भी की है। इसके बाद जस्टिस रणजीत सिंह ने इस मामले में डीजीपी सुरेश अरोड़ा को जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, इन्हीं बुलेट की जांच के बाद पंजाब की फॉरेंसिक लैब ने चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है। उसने बताया कि जो बुलेट और एसएलआर जांच के लिए दिए गए हैं, वह संबंधित एसएलआर से चले ही नहीं। जबकि उन्होंने बुलेट से टैंपरिंग होने की कोई बात नहीं की। ऐसे में पंजाब एसएफएल की ये रिपोर्ट भी सवालों के घेरे में है।

सवाल ये खड़ा है...

एक ही सूबत की जांच में 2 फॉरेंसिक लैब की अलग-अलग रिपोर्ट से इस मामले में गठित जांच कमीशन भी असमंजस में है। कमीशन के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वह किस रिपोर्ट को सही माने।

केंद्र की रिपोर्ट...गोली एसएलआर से चली पर किससे चली पता नहीं

जांच में ये तो सामने आया कि गोली एसएलआर से ही चली थी, लेकिन किस एसएलआर से चली, यह नहीं कहा जा सकता, क्योंकि जो बुलेट्स दिए गए, उनके साथ इतनी टैंपरिंग (छेड़छाड़) की जा चुकी है कि पता लगाना मुश्किल है।

पंजाब की रिपोर्ट...टैंपरिंग का जिक्र ही नहीं, क्लीनचिट दी

रिपोर्ट में कहा गया कि ये बुलेट इन एसएलआर से नहीं चलाए गए। रिपोर्ट में टैंपरिंग का भी कोई जिक्र नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जो बुलेट मृतकों और जख्मियों को लगे हैं, उसका पता नहीं किसने चलाया, एक तरह से क्लीनचिट दे दी गई।

साफ है कि...

पंजाब एफएसएल की ओर से आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

ऐसे समझें मामला| कई पुलिसवाले हैं आरोपी हर बार बचाने की कोशिश, अब सुनवाई 29 को

पुलिस फायरिंग में मारे गए सरावां गांव के गुरजीत सिंह के भाई और नियामी वाला के कृष्ण भगवान सिंह के बेटे प्रभदीप को सरकार ने मुआवजे के तौर पर नौकरी दे दी। मगर इंसाफ नहीं दिया। मृतक कृष्ण के भाई रेशम सिंह ने 8 फरवरी 2017 को फरीदकोट कोर्ट में पुलिस के खिलाफ इस्तगासा दायर किया था। इसमें उन्होंने अपने भाई को गोली मारकर हत्या करने के मामले में उस समय के आईजी परमराज उमरानंगल, एसएसपी मोगा चरणजीत शर्मा, एसपी फरीदकोट विक्रमजीत सिंह, एसएचओ थाना बाजाखाना अमरजीत सिंह कुलार को आरोपी बनाया था। इस केस में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 29 नवंबर 2017 को सरकार व पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने को कहा। 29 नवंबर को पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट तो फाइल की, मगर उसमें आरोपियों को फिर से अज्ञात पुलिसकर्मी बताया। इस पर अदालत ने पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट से असंतुष्टि जताते हुए 29 जनवरी 2018 को स्टेटस रिपोर्ट आरोपियों के नामों सहित पेश करने के निर्देश दिए। अब इस केस में पुलिस दोबारा रिपोर्ट पेश करेगी।

कमीशन ने डीजीपी को दिए बुलेट्स से हुई टैंपरिंग के जांच के निर्देश

कमीशन के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा कि बुलेट्स से छेड़छाड़ गंभीर मामला है। उन्होंने डीजीपी सुरेश अरोड़ा को आदेश दिया है कि जिसने भी बुलेट से छेड़छाड़ की है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

ये है मामला: अब तक ये हुआ

- 12 अक्टूबर 2015 को कोटकपूरा के बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी हुई।

- 14 अक्टूबर 2015 को बेअदबी के रोष में गांव बहबलकलां में रोड पर शांतमय धरना दे रहे लोगों पर पुलिस ने फायरिंग कर दी। फायरिंग में गुरजीत सिंह निवासी सरावां, कृष्ण भगवान सिंह निवासी नियामीवाला की मौत हो गई थी। जबकि 3 अन्य गोलियां लगने से जख्मी हुए थे।

- 15 अक्टूबर 2015 को पुलिस ने मामले में प्रदर्शनकारियों पर ही इरादा ए कत्ल का केस दर्ज किया।

- 16 अक्टूबर 2015 को जब लोगों में रोष बढ़ा तो पुलिस व सरकार ने एडीजीपी आईपीएस सहोता के नेतृत्व में एसआईटी बना दी।

- 18 अक्टूबर 2015 को एसआईटी की रिपोर्ट पर अज्ञात पुलिस मुलाजिमों पर हत्या और इरादा कत्ल का केस दर्ज किया गया। इसमें एफआईआर में ये तो लिखा गया कि पुलिस टीम की अगवाई उस समय के मोगा के एसएसपी चरणजीत शर्मा कर रहे थे। मगर रिपोर्ट में अज्ञात पुलिसकर्मी ही दिखाए गए।

- 18 अक्टूबर 2015 को एसआईटी की रिपोर्ट पर अज्ञात पुलिस मुलाजिमों पर हत्या और इरादा कत्ल का केस दर्ज किया गया। इसमें एफआईआर में ये तो लिखा गया कि पुलिस टीम की अगवाई उस समय के मोगा के एसएसपी चरणजीत शर्मा कर रहे थे। मगर रिपोर्ट में अज्ञात पुलिसकर्मी ही दिखाए गए।

- अप्रैल 2017 में कैप्टन सरकार बनने के बाद उन्होंने इस केस की जांच के लिए एक नया आयोग जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व में गठित कर दिया। इस आयोग ने अब तक 241 लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं। जांच अभी जारी है।

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