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कोर्ट में रोते हुए पार्षद बोले- छवि खराब, बेटे का रिश्ता भी टूटा, सजा का फैसला टला

पार्षद बबला की सजा का फैसला टला

Bhaskar News | Last Modified - Apr 01, 2018, 07:41 AM IST

कोर्ट में रोते हुए पार्षद बोले- छवि खराब, बेटे का रिश्ता भी टूटा, सजा का फैसला टला

चंडीगढ़. 9 साल पुराने टीन शेड घोटाले में दोषी करार हो चुके कांग्रेस पार्षद देविंदर सिंह बबला की सजा का फैसला सोमवार तक के लिए टाल दिया गया है। बबला के वकील की ओर से जिला अदालत में एक एप्लीकेशन दायर की गई, जिसमें उन्होंने सीआरपीसी 386 का हवाला देते हुए बबला को सजा के बजाय फिर से प्रोबेशन पीरियड पर छोड़ने की मांग की। कोर्ट ने इस प्रोविजन के तहत सरकारी वकील को सोमवार तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।


- बबला के वकील एएस सुखीजा ने कोर्ट को बताया कि सीआरपीसी 386 के तहत अगर स्टेट ऐसे केस में अपील फाइल करती है तो ऊपरी अदालत भी उतनी ही सजा सुना सकती है, जितनी निचली अदालत के पास पावर होती है।
- निचली अदालत के पास तीन साल से ज्यादा की पावर नहीं होगी तो ऊपरी अदालत भी तीन साल से ज्यादा की सजा नहीं सुना सकती। निचली अदालत ने बबला को एक साल के लिए प्रोबेशन पीरियड पर छोड़ दिया था, ऐसे में ऊपरी अदालत को भी उन्हें प्रोबेशन पर छोड़ देना चाहिए।
- इसी घोटाले में 22 जुलाई 2014 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने बबला को दोषी करार दिया था, लेकिन तब उन पर धारा 420 और 468 नहीं लगाई गई थी और उन्हें एक साल के लिए प्रोबेशन पीरियड पर छोड़ दिया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ पुलिस ने ऊपरी अदालत में अपील फाइल की और ज्यादा सजा दिए जाने की मांग की है।
- वहीं, बबला ने भी कोर्ट के फैसले को चैलेंज कर दिया। अब कोर्ट ने बबला की अपील खारिज कर दी और पुलिस की अपील को मंजूर करते हुए बबला को फिर से इस घोटाले में आईपीसी की धारा 420(धोखाधड़ी), 465 (फॉर्जरी), 468(धोखाधड़ी के इरादे से फॉर्जरी) और 471(फर्जी डॉक्यूमेंट्स और रिकॉर्ड्स का इस्तेमाल)के तहत दोषी करार दिया।

कोर्ट में रो पड़े बबला, बोले-छवि खराब, बेटे का रिश्ता भी टूटा...
- शनिवार को जब बबला को कोर्ट में लाया गया तो उन्होंने जज से कहा कि वे कुछ बोलना चाहते हैं। इजाजत मिलने के बाद बबला ने कहा कि उन पर लगे आरोप झूठे हैं। मार्केट कमेटी चेयरमैन के पास तो अलॉटमेंट की पावर ही नहीं होती। ये फैसले तो डीसी लेवल के होते हैं। उन्हें केस में झूठा फंसाया गया है। इस केस के कारण उनकी समाज में छवि खराब हुई है। उनके बेटे का रिश्ता तक टूट गया। उनके पिता हार्ट के मरीज हैं। इतना कहते ही बबला कोर्ट में रो पड़े। कोर्ट में बबला के पिता, दोनों बेटों समेत पूर्व पार्षद भूपिंदर सिंह बढ़हेड़ी, एचएस लक्की और कई अन्य नेता पहुंचे थे।

ये है मामला...
सेक्टर-26 स्थित सब्जी मंडी के दुकानदार सूरज प्रकाश आहूजा ने विजिलेंस को शिकायत दी थी शेड अलॉटमेंट आक्शन में बबला ने अनियमितताएं बरती हैं। उस समय बबला मार्केट कमेटी के प्रधान थे। नियम के तहत कुल 59 लोगों को शेड अलॉट होने थे, लेकिन जाली कागजात के आधार पर बबला ने 59 की जगह 69 लोगों को शेड अलॉट कर दिए थे। सेक्टर-26 थाना पुलिस ने 19 अगस्त 2009 को बबला के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

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