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अनवाॅन्टेड प्रेग्नेंसी की डीएनसी में यूटरस व इंटेस्टाइन पर लगाया कट, तबीयत बिगड़ी

48 घंटे के लिए अंडर ऑब्जर्वेशन रखा गया और तबीयत िबगड़ती देख उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया।

Danik Bhaskar | Jan 07, 2018, 05:22 AM IST
डेमोफोटो डेमोफोटो

पंचकूला. पति-पत्नी में आपसी समझौते के बाद प्रेग्नेंट महिला का अबॉर्शन कराने के लिए उसे सेक्टर-10 के निजी पॉलीक्लीनिक में एडमिट कराया गया। इस दौरान लापरवाही करते हुए महिला के यूटरस और इंटेस्टाइन में कट लगा दिया गया। मरीज को करीब 48 घंटे के लिए अंडर ऑब्जर्वेशन रखा गया और तबीयत िबगड़ती देख उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया।

वहां करीब 3 घंटे के ऑपरेशन के बाद महिला की जान बचाई जा सकी। मामला बलटाना के सैनी बिहार फेज 3 का है। महिला एमडीसी सेक्टर 5 के निजी स्कूल में साइंस टीचर है। महिला के पति ने बताया कि उनकी पत्नी ने अक्टूबर में कन्सीव किया था। चूंकि उन्हें एक बच्चा है और दोनों के आपसी समझौते से वह अनवाॅन्टेड प्रेग्नेंसी अबॉर्ट करवाना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने अपनी पत्नी को 1 नवंबर 2017 को सेक्टर 10 के एक निजी पॉलीक्लिनिक में एडमिट करवाया। पॉलीक्लिनिक की हेड व गायनोकोलॉजिस्ट ने डीएनसी करवाने की सलाह दी। डॉक्टर ने महिला को अपने जूनियर के साथ ओटी में भेज दिया। करीब घंटेभर बाद महिला को डीएनसी की गई और उसके बाद डॉक्टरों ने रात तक उसे अंडर ऑब्जर्वेशन में रखने की बात कही। इस मामले में शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।

तबीयत बिगड़ी तो पीजीआई भेजा

डीएनसी के बाद महिला की तबीयत िबगड़ने लगी, जिसके बाद डॉक्टरों ने महिला का अल्ट्रासाउंड व एक्सरे करवाया। उसके बाद मेडिसिन भी दी, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ। 3 नवंबर को उसे पीजीआई रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने देर रात 12 बजे से सुबह 3 बजे तक ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई। पीजीआई के डॉक्टरों ने महिला के पति को बताया कि डीएनसी करने के दौरान महिला के यूटरस व इंटेस्टाइन में कट मारे गए।

डीसीपी से शिकायत, समझौते का दबाव

महिला के पति ने 6 दिसंबर को डीसीपी को शिकायत देकर मेडिकल नेग्लिजेंसी के तहत कार्रवाई करने की मांग की। डीसी ने शिकायत सेक्टर-5 थाने में भेजकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। महिला के पति ने पुिलस पर समझौते का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों को बिठाकर समझौता करने की सलाह दी गई। यहां तक कि थाने के एक अिधकारी ने उन्हें फोन कर समझौते का दबाव बनाया।

रिश्तेदारों को बताई थी कट की बात

निजी पॉलीक्लीनिक की महिला डाॅक्टर के पति ने बताया कि डीएनसी के दौरान यूटरस में कट लगने की बात मरीज व उसके परिजनों को बताई थी। मेडीकल साइंस में सैकड़ों में से इस तरह का एकाध केस हो जाता है, इसे एक्सेप्ट कर उसकी जानकारी मरीज व उसके परिजनों को दी गई थी। रिश्तेदारों की मौजूदगी में मरीज का दो बार अल्ट्रासाउंड भी करवाया गया था और मामला बिगड़ते देख तुरंत उन्हें पीजीआई रेफर किया गया था। मरीज के पति को बिठाकर पूरे फैक्टस की जानकारी दी थी।