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ये मेयर 5 भाई-बहन के साथ रहते थे एक कमरे में, पिता को खो दिया था इस उम्र में

तीनों सीट भाजपा को, गुरप्रीत बने सीनियर डिप्टी मेयर, विनोद अग्रवाल डिप्टी मेयर।

Danik Bhaskar | Jan 10, 2018, 02:51 AM IST
देवेश मोदगिल देवेश मोदगिल

चंडीगढ़. भाजपा चंडीगढ़ में काफी कोशिशों के बाद पार्टी के कैंडिडेट के खिलाफ खड़े हुए मेयर आशा जसवाल व पार्षद रविकांत ने नाम वापस लिया था। बागी कैंडिडेट पार्टी में तो वापस आ गए लेकिन फिर भी भाजपा के कैंडिडेट क्रॉस वोटिंग के शिकार हो ही गए। मेयर पद पर भाजपा के देवेश मोदगिल ने कांग्रेस के देवेंद्र बबला को हराया। मोदगिल को 22 वोट पड़े जबकि बबला को पांच वोट। नए मेयर के लिए 22 नंबर लक्की साबित हुआ है। देवेश शहर के 22वें मेयर बने हैं। उनकी वार्ड नंबर भी 22 है और मेयर के लिए वोट भी 22 ही पड़े हैं। इस 22 के अंक को देवेश अपने आप को लक्की मानते हैं।

कौन हैं देवेश मोदगिल

उम्र- 43 साल
एजुकेशन- पीयू से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री, एलएलबी
प्रोफेशन- पेशे से वकील, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन को कई केसों में असिस्ट किया। जैसे- सीएम यदुरप्पा का केस हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में।
फैमिली- 2 साल के थे तो पिता राम लक्ष्मण का देहांत हो गया। पिता पंजाब जेल विभाग में क्लर्क थे। पिता के निधन के बाद माता कमलेश शर्मा को नौकरी मिली। एक कमरे के मकान में पांच भाई-बहनों के साथ रहते थए। पत्नी कोमल एमसीएम कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। दो बच्चे हैं- बेटी अनन्या और बेटा आयाम।

बतौर मेयर पावर क्या हैं, क्या कर सकते हैं/क्या नहीं...

चंडीगढ़ में मेयर खुद कोई फैसला नहीं ले सकते। सभी निर्णय सदन से पारित होते हैं।
वर्किंग में क्या बदलाव- निगम के सभी बड़े निर्णय और काम जनता की सहमति और सहयोग से करने की कोशिश।
चुनौती- नगर निगम को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना।
बड़े काम जो करना चाहते हैं- शहर में 24 घंटे वॉटर सप्लाई। गीले और सूखे कचरे को अलग करने के लिए अभियान चलाएंगे।
कंट्रोवर्सी- विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया है कि सेलवेल मामले में कंपनी का पक्ष लेते हैं।

संगठन महामंत्री देते रहे हाईकमान को रिपोर्ट...

मेयर चुनाव की काउंटिंग होते ही दर्शक दीर्घा में बैठे प्रदेश संगठन मंत्री दिनेश कुमार ने फोन से सूचना हाईकमान को दे दी। उनके संपर्क में प्रभारी प्रभात झा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री राम लाल थे।

दो काउंसलर ने फोटो खीेंचे वोट के...

प्रिजाइडिंग अफसर ने पहले ही सभी काउंसलर के मोबाइल ले लिए। कहा कि पार्षद फोटो नहीं खींचेंगे। पर भाजपा के दो काउंसलर ने बैलट पेपर पर स्टैंप लगाकर उसकी फोटो खींची हैं। ताकि क्रॉस करने की उंगली न उठ सके।

वोट क्रॉस होते ही सांसद हुई गर्म...
देवेश को एक वोट गिनती में कम होने से सांसद किरण खेर गुस्से में आ गईं। आसपास बैठे काउंसलर से पूछने लगी कि ऐसा किसने किया है।

पहली बार इलेक्शन नॉमिनेटेड के बगैर वोट...
पहली बार मेयर चुनाव नॉमिनेटेड काउंसलर के वोट के बगैर हुआ। वोटिंग राइट का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। फिर भी सात काउंसलर हाउस में उपस्थित रहे।

ये था चुनावी माहौल

कांग्रेस के निगम में चार काउंसलर हैं लेकिन मिले बबला को 5 वोट। वहीं सीनियर डिप्टी मेयर पद पर भाजपा के गुरप्रीत सिंह विजयी रहे। उन्हें वोट 21 ही पड़े जबकि भाजपा के ही निगम में सांसद सहित 22 वोट हैं। वहीं कांग्रेस की शीला फूल सिंह को छह वोट मिले। यानि कांग्रेस को दो वोट ज्यादा मिले। इससे साफ है किह भाजपा की तरफ से किसी ने वोट क्रॉस किया है। भाजपा से डिप्टी मेयर कैंडिडेट विनोद अग्रवाल को 22 वोट मिले और कांग्रेस कैंडिडेट रविंद्र कौर गुजराल को 4 वोट। एक वोट इनवैलिड रहा। इस वोट के बैलट पेपर पर दोनों कैंडिडेट के नाम के आगे स्टैंप लगाई गई थी। यानी इसे जानबूझकर इनवैलिड किया गया। यही वोट मेयर कैंडिडेट देवेश मोदगिल को मिलने के बजाये कांग्रेसी मेयर कैंडिडेट देवेंद्र सिंह बबला को मिल गया। इसी वोट को भाजपा के डिप्टी मेयर कैंडिडेट को देने के बजाए रद्द कर दिया।

आगे की स्लाइड्स में देखें मेयर देवेश मोदगिल की फोटोज...

देवेश मोदगिल जीत के बाद। देवेश मोदगिल जीत के बाद।
जीत के बाद देवेश मोदगिल को गले लगाते हुए। जीत के बाद देवेश मोदगिल को गले लगाते हुए।
कुछ इस तरह रोड पर निकला था जुलूस। कुछ इस तरह रोड पर निकला था जुलूस।
22 के अंक को देवेश अपने आप को लक्की मानते हैं। 22 के अंक को देवेश अपने आप को लक्की मानते हैं।
पटाखे फोड़कर कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न। पटाखे फोड़कर कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न।
देवेश मोदगिल 43 साल के हैं। देवेश मोदगिल 43 साल के हैं।