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दुश्मन ने सीने पर गोली मारी जो जेब के पर्स में रखे पांच के सिक्के पर जा लगी

शुक्रवार को चंडीगढ़ लेक क्लब में पहले मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत हुई।

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2017, 07:11 AM IST
First Military Literature Festival starts at Chandigarh Lake Club

चंडीगढ़। शुक्रवार को चंडीगढ़ लेक क्लब में पहले मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत हुई। यहां पूर्व सैनिक, जनरल और वॉर हिस्टोरियन पहुंचे। तीन दिन चलने वाले फेस्टिवल का थीम है- भारत द्वारा लड़े गए युद्ध और उनमें आर्मी की वीरता। ऑर्गेनाइज किया है चंडीगढ़ प्रशासन, पंजाब सरकार और वेस्टर्न कमांड ने। कारगिल वार के हीरो परमवीर चक्र विजेता सूबेदार वाईएस यादव ने फेस्टिवल में अपनी यादें ताजा कीं। इस वक्त बरेली में पोस्टेड यादव ने 1999 में हुई कारगिल वार में टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया था। अपने साथी खोए थे और असाधारण खतरे के बाजवूद विजय पाने तक वे दुश्मन के सामने डटे रहे थे। बाद में वीरता के लिए उनको परमवीर चक्र से नवाजा गया था।

यादव ने बताया, ‘मैं घातक प्लाटून का कमांडेंट था। हमारी पूरी टुकड़ी में जबरदस्त जज्बा भरा था। हमारे सामने चुनौतियां तो थीं पर यह विश्वास भी था कि हम जीतकर ही लौटेंगे। हमने तोलोलिंग पहाड़ी पर लड़ाई लड़ी। इनमें दो ऑफिसर, दो कमीशंड ऑफिसर और 21 जवान शहीद हुए। 12 जून को मैं टाइगर हिल पर चढ़ा। हालांकि 16500 फुट की चढ़ाई चढ़ना आसान काम नहीं था। खराब मौसम के बावजूद हम आगे बढ़ते गए। पारा मानइस 20 डिग्री था। और उसी हालत में दो रात जंग लड़ते रहे। हर तरफ बम बरस रहे थे। तीसरी रात तक यही सब चल रहा था। दुश्मन की लगातार फायरिंग से हमारा रास्ता कटने लगा। हमें एक पल के लिए भी रुकने की फुर्सत नहीं थी। मैं भी पांच घंटे से फायरिंग कर रहा था। लड़ते-लड़ते मेरे छह साथी शहीद हो गए मेरे लिए यह पल बेहद कठिन था। तभी मेरी बाजू और पांव में तीन गोलियां लगीं। दुश्मन को लगा कि मैं भी मारा गया हूं। मैं चुपचाप लेटा रहा। वे बार-बार आकर देख रहे थे कि मैं मर गया या नहीं। मैंने सुना कि वे नीचे की पोस्ट पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं, अगर ऐसा हो जाता तो हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान होता। मैं चिंता में था और जब जरा-सा हिला तो उन्हें आभास हो गया कि मैं जिंदा हूं। उन्होंने फिर से एक गोली मेरे सीने में मारनी चाही। वो गोली मेरे सीने पर आकर पॉकेट में पड़े पर्स और उसमें पड़े पांच के सिक्के से टकराई। छाती के पार नहीं उतरी। इसके बाद मैंने हिम्मत जुटाई और उन्हीं की एके-47, उन्हीं का ग्रेनेड उठाया और हमला कर दिया। हम सात थे और वे चार। कुछ ही देर में हमने उन्हें खदेड़कर टाइगर हिल पर विजय पा ली थी। उस जंग के बारे में सोचता हूं तो लगता है कि आज ही की बात है। उस जंग को मैं कभी नहीं भूल सकता।’

सैनिकों का सम्मान होना चाहिए : कैप्टन
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सेना हमारे लिए बलिदान देती है और इसका बदला किसी तरह चुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने एक घटना शेयर करते हुए बताया कि एक बार एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने ब्रिगेडियर रैंक के रिटायर्ड फौजी को देर तक अपने दफ्तर के बाहर खड़े रखकर उसका निरादर किया। वे उस समय सीएम थे और इस बात की जानकारी मिलते ही उन्होंने उस पुलिस अधिकारी की बदली कर दी। एक सेना के अधिकारी द्वारा पूछे सवाल के जवाब में सीएम ने बताया कि वे 1971 युद्ध पर और श्रीलंका में भारतीय फौज की भूमिका पर भी किताब लिखेंगे।

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