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राम रहीम के खास 40 लोगों पर बिल्डर से फ्रॉड का केस दर्ज, बाबा को फिर बचा गई पुलिस

डेरा मुखी के वकील नरवाना, जीरकपुर नप प्रधान सोही समेत 40 पर धोखाधड़ी का केस।

​संजीव महाजन/अमित शर्मा | Last Modified - Mar 04, 2018, 07:12 AM IST

राम रहीम के खास 40 लोगों पर बिल्डर से फ्रॉड का केस दर्ज, बाबा को फिर बचा गई पुलिस

पंचकूला. साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह के खासमखास लोगों पर बिल्डर से धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। चमकौर सिंह, एडवोकेट एसके गर्ग नरवाना सहित 40 लोगों के खिलाफ अाईपीसी की धारा 420, 383, 506, 120बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इस पूरे मामले में जीरकपुर नगर परिषद प्रधान कुलविंदर सोही की भी अहम भूमिका रही। इसलिए उसे भी आरोपी बनाया गया है। पर्ल ग्रुप के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।

बाबा को फिर बचा गई पुलिस

एक विवादित जमीन का मामला सुलझाने के लिए पहले तो डेरा मुखी गुरमीत और उसके खास लोगों ने बिल्डर अजय सिंघल पर दबाव बनाया। उसके बाद डेरे के वकील के जरिये जमीन का हल‌फनामा भी दिलवाया गया, जिसमें बिल्डर से दूसरे पक्ष को ज्यादा जमीन दिलवाने का करार करवाया गया। उसके बाद एक फ्लैट और 50 लाख रुपए भी लिए गए। शिकायतकर्ता अजय सिंघल के मुताबिक विवादित जमीन 80 करोड़ से ज्यादा की है। गुरमीत सिंह ने अजय से कहा था कि जो हमारे आदमियों ने तय किया है वही सही होगा।

बिल्डर अजय सिंघल ने बताया कि जिस जमीन को दिया गया है, उसकी पूरी कीमत 80 करोड़ रुपए के करीब है। इस केस में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को आरोपी न बनाना गलत होगा, केस में उसकी बड़ी भूमिका है।

जीरकपुर में 50 बीघे जमीन, 1987 से बिकती रही जीपीए पर

- विवाद जीरकपुर के कृष्णपुरा में 50 बीघे जमीन को लेकर शुरू हुआ। इस जमीन को रमनदीप सिंह, इंद्रजीत सिंह और उजागर ने लिया था। इसके बाद योगेश और इंद्रजीत के नाम पर इसकी जीपीए करवाई गई। फिर भुपिंदर के नाम जीपीए करवा दी गई। भुपिंदर ने जमीन को गुरबचन और जितेंद्र सिंह को बेच दिया। वहां से कर्मजीत सिंह के माध्यम से मदन पाल को 39 बीघे जमीन जीपीए पर बेची गई। मदन ने जमीन शिकायतकर्ता अजयवीर सिंघल को बेच दी।

- अजय को 50 बीघे प्रॉपर्टी में से 39 बीघे जमीन बेची गई थी। बाकी जमीन को पर्ल ग्रुप ने खरीद लिया था। 2006 में अजय ने पर्ल ग्रुप की जमीन को भी खरीद लिया।

- इस जमीन को लेकर 1987 से ही विवाद था। शुरू से ही इस जमीन को जीपीए पर बेचा जाता रहा, लेकिन जमीन के मालिक के रिश्तेदारों ने कोर्ट में केस डाल दिया था।

- 2009 में सेशंस कोर्ट से जब इस जमीन को लेकर कोर्ट से ऑर्डर आया, तो अजय को कई महीनों बाद पता चला।

- कोर्ट में अजय ने अपनी ओर से रिप्लाई दिया, लेकिन केस में पार्टी न होने के चलते 2013 में दो रिश्तेदारों के हक में फैसला आ गया।

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Web Title: raam rhim ke khaas 40 logon par bildar se frod ka kes drj, baba ko fir bchaa gayi police
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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