चंडीगढ़ समाचार

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400 समर्थकों को नपुंसक बनाने के मामले में गुरमीत, दो डॉक्टरों के खिलाफ चार्जशीट

साध्वी यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह की मुश्किलें और बढ़ेंगी...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:17 AM IST
Gurmeet in making 400 supporters impotent

पंचकूला. साध्वी यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। वीरवार को सीबीआई ने पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में करीब 400 समर्थकों को नंपुसक बनाने के मामले में गुरमीत सिंह और दो डॉक्टरों- डॉ. पंकज गर्ग और एमपी सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। गुरमीत सिंह के खिलाफ दाखिल होने वाली ये चौथी चार्जशीट है। उस पर डेरे के दो डॉक्टरों-गर्ग और सिंह के जरिये समर्थकों को नपुंसक बनाने के आरोप तय किए गए हैं।

डॉ. गर्ग पंचकूला का रहने वाला, डॉ. सिंह पहले ही जेल में
दिल्ली का एमपी सिंह पंचकूला में दंगे भड़काने के आरोप में न्यायिक हिरासत में है। डॉ. गर्ग पंचकूला का रहने वाला है। सूत्रों के मुताबिक दोनों गुरमीत सिंह का हुक्म मानते हुए समर्थकों को नपुंसक बनाने की सर्जरी करते थे। गुरमीत समर्थकों को यह झांसा देकर नपुंसक बनाता था कि इससे ईश्वर तक पहुंच जाएंगे।

यह है मामला

डेरा समर्थक हंसराज चौहान ने याचिका दायर कर कहा था कि सिरसा डेरे में उसे और करीब 400 समर्थकों को सर्जरी करके जबरदस्ती नपुंसक बनाया गया। ये समर्थक हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य जगहों से थे। चौहान ने आरोप लगाया था कि डेरा प्रमुख के इशारे पर डॉक्टरों की टीम समर्थकों को नपुंसक बनाती थी।

चार्जशीट की जानकारी हाईकोर्ट को दी

सीबीआई के वकील ने इस मामले को लेकर वीरवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जानकारी दी कि डेरा मुखी के साथ दो अन्य डॉक्टरों के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की जा रही है। हाईकोर्ट ने इस पर मामले की सुनवाई 8 फरवरी के लिए स्थगित कर दी। हाईकोर्ट के जस्टिस के कण्णन ने 23 दिसंबर 2014 को सीबीआई को डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि जांच किसी भी तरह से प्रभावित न हो इसके लिए हाईकोर्ट जांच की मॉनिटरिंग करेगा। फतेहाबाद निवासी हंस राज चौहान ने याचिका दायर कर कहा कि डेरे में 400 से ज्यादा अनुयायियों को नपुंसक बना दिया गया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित मामले में भी डेरा प्रमुख के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। ऐसे में मामले की जांच को प्रभावित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अब कोर्ट की जिम्मेदारी है कि जांच सही दिशा और सही समय में हो। इस बात को सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट इस जांच को अपनी निगरानी में करवाए और समय समय पर इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।

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