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ओल्ड एज होम से निकाले गए 79 साल के हरभजन पहुंचे हाईकोर्ट, ये है कारण

गुरुद्वारे में दिन गुजारने को मजबूर हैं पंजाब बिजली विभाग में मैकेनिक रहे हरभजन सिंह

Danik Bhaskar | Dec 10, 2017, 05:16 AM IST

चंडीगढ़. ओल्ड एज होम से निकाले गए 79 साल के हरभजन सिंह इंसाफ की मांग को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उनकी तरफ से एडवोकेट हृदयपाल सिंह राही ने याचिका दायर की है। इस याचिका पर जस्टिस राजन गुप्ता ने चंडीगढ़ प्रशासन के डायरेक्टर सोशल वेलफेयर को तलब करते हुए पूछा है कि चंडीगढ़ में कितने ओल्ड एज होम हैं और इनमें सीनियर सिटीजन को एडमिट करने के लिए क्या नियम व शर्तें हैं। यह भी पूछा है कि ओल्ड एज होम की रेगुलर सुपरविजन होती है या नहीं।


हरभजन कहते हैं- बेटा कैनेडा में रहता है, मुझे बुलाना चाहता है, लेकिन पासपोर्ट नहीं बन सकता। बेसहारा हूं, सिर पर कोई छत नहीं तो पासपोर्ट बनाने के लिए पता क्या दूं? कुछ समय के लिए सेक्टर-15 के अोल्ड एज होम में रहा, लेकिन उन्होंने भी बाहर कर दिया। कहते हैं साथ रहने वालों के साथ मैं झगड़ता हूं। अरे मैं 79 साल का हूं, किसी से झगड़ा क्यों करूंगा। क्या मुझे इस ठंड में खुले आसमान के नीचे मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा?

छत नहीं, पासबुक भी हो गया चोरी

होशियारपुर के गांव भूरे जटां के हरभजन ने याचिका में कहा है कि संविधान ने उन्हें जीवन यापन का अधिकार दिया है। ओल्ड एज होम से निकालकर उनके इस अधिकार पर डाका डाला गया है। उनके रहने के लिए कोई छत नहीं है। वे कभी किसी गुरुद्वारे में रहते हैं तो कभी किसी और में। मौजूदा समय में मोहाली के गुरुद्वारे में हैं और यहां से भी अब जाने का समय आ गया है। कड़कती ठंड में आगे कहां रहेंगे, उन्हें खुद पता नहीं है।
नम आंखों के साथ हरभजन सिंह ने कहा- मैं पंजाब के बिजली विभाग में मैकेनिक था। मुझसे जूनियर कर्मचारियों को फोरमैन बना दिया गया लेकिन यहां भी किस्मत ने मेरा साथ नहीं दिया। मुझे कहते फोरमैन रहे लेकिन कागजों पर कभी नहीं बनाया। 20 साल पहले रिटायर हुआ और तब से दर बदर की ठोकरें खा रहा हूं। मेरे पास रहने के लिए कोई छत नहीं है। बैंक खाते में गुजारे के लिए पेंशन तो आ रही है लेकिन मेरी पासबुक और एफडीआर तक चोरी हो गई है। ऐसे में बैंक खाता भी ऑपरेट नहीं कर पा रहा हूं। मेरे जाली साइन कर बैंक से रकम निकाली जा रही है, लेकिन मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही। पुलिस में भी शिकायत दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।