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हाईवे और सड़कों पर धरने बर्दाश्त नहीं होंगे : हाईकोर्ट, पंजाब सरकार से पूछा ये सवाल

कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा है कि क्या सभी 22 जिलों में धरनों के लिए जगह तय की जा सकती है।

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2017, 05:26 AM IST
Highways and roads will not tolerate fencing

चंडीगढ़. हाईकोर्ट ने कहा है कि नेशनल व स्टेट हाईवेज और अन्य सड़कों व रिहायशी इलाकों में धरने के नाम पर जाम लगाए जाने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन धरने-प्रदर्शनों से आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। भविष्य में इस तरह के प्रदर्शनों से किस तरह से निपटा जाए, इसके लिए हाईकोर्ट ने वकीलों से सुझाव मांगे हैं, ताकि इन सुझावों के बाद हाईकोर्ट आगे के लिए आदेश जारी कर सके। साथ ही कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा है कि क्या सभी 22 जिलों में धरनों के लिए जगह तय की जा सकती है।


बुधवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अपनी मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है तो इस अधिकार के चलते आम लोगों को मुश्किल में नहीं डाला जा सकता। आम लोगों को इससे परेशानी नहीं होनी चाहिए। देखने में आया है कि जब धरने लगा सड़कें रोक दी जाती हैं तो कई बार एंबुलेंस तक को भी जाने नहीं दिया जाता है और तोड़फोड़ भी कर दी जाती है, लिहाजा अब इसके लिए दिशा-निर्देश तय करना बेहद जरूरी है। 8 दिसंबर को पंजाब के कई हिस्सों में शिअद नेताअों के धरने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने 13 दिसंबर को सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था।

शिअद : नामांकन भी दाखिल नहीं करने दिया और केस भी कर दिया

अकाली दल ने फिरोजपुर मामले को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस याचिका के बाद हाईकोर्ट के आदेशों के चलते सरकार ने उनके सैकड़ों वर्करों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। उनके नुमाइंदों को नामांकन तक नहीं करने दिया गया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जो भी कहना है, अगली सुनवाई से पहले हाईकोर्ट में जवाब दायर कर कहें।

8 दिसंबर को शिअद ने जाम किए थे हाईवे
मल्लांवाला में निकाय चुनाव के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद 8 दिसंबर को शिअद ने 12 से ज्यादा जिलों में हाईवे जाम कर दिया था। इस दौरान कहीं एंबुलेंस फंसी रही थी तो कहीं बारात। चार से पांच घंटे तक लोग परेशान रहे थे। उसी दिन सुबह 11 बजे वकील वीरेंद्र पाल ने इसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने भी दोपहर 2 बजे सुनवाई शुरू कर दी थी। सवा 3 बजे कोर्ट ने सरकार, डीजीपी और सियासी दलों को नोटिस जारी कर इन धरनों को अवैध बताया था। इसके बाद धरने हटाए गए थे।

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