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ऐसे तैयार होती है सबसे फास्ट ट्रेन, कोच की छत से लेकर साइड वॉल तक देखें फोटोज

1500 कर्मी 8 घंटे में तेजस का एक कोच कर रहे तैयार

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 01:45 AM IST
3.25 करोड़ रुपए आ रहा तेजस के एक कोच बनाने में खर्चा 3.25 करोड़ रुपए आ रहा तेजस के एक कोच बनाने में खर्चा

कपूरथला. इंडियन रेलवे की ड्रीम ट्रेन तेजस इस साल अप्रैल में चंडीगढ़ से नई दिल्ली के बीच चलनी हैं। मुंबई से गोवा के बीच पहले ही तेजस चल रही है लेकिन ये उससे ज्यादा कंफर्टेबल होगी। चंडीगढ़ से चलने वाली तेजस किस स्पीड से बन रही है और इसकी खासियतें जानने के लिए भास्कर पहुंचा रेलवे कोच फैक्टरी कपूरथला में। तेजस को स्मार्ट कोच के रूप तैयार किया जा रहा है।

स्मार्ट कोच में नया बदलाव यह किया गया है कि कोच की विंडो पर परंपरागत रोलर कर्टन ब्लाइंड्स नहीं लगाए जाएंगे। उसकी जगह वेनेशियन ब्लाइंड्स लगाए जाएंगे। यह मिरर के अंदर ही होंगे। जैसे आप इन्हें बंद करेंगे वैसे ही इसका कलर ट्रेन के कलर से मैच हो जाएगा और विंडो का पता ही नहीं चलेगा। यह ब्लाइंड्स इलेक्ट्रानिक कंट्रोल होंगे और इसमें एक स्विच होगा। इन ब्लाइंड्स को अाप अपनी सुविधा के मुताबिक इलेक्ट्रिक स्विच से ऊपर-नीचे कर सकेंगे।

तेजस ट्रेन के बारे में
- 19-19 कोच की दो ट्रेनें मार्च के अंत तक सौंप दी जाएंगी रेलवे बोर्ड को।
- 200 किमी की स्पीड से अप्रैल से चंडीगढ़-दिल्ली के बीच दौड़ेगी तेजस।
- 9 इंच की एलसीडी स्क्रीन होगी हर सीट के पीछे पैसेंजर के मनोरंजन को।
- 200 किमी प्रतिघंटा की स्पीड पर भी ब्रेक लगाने से एकदम रुकेगी ट्रेन।

हर कोच में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे
तेजस के हर कोच में सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं। एक कोच को दूसरे कोच से जोड़ने के लिए इंटरकार गेंग-वे लगाए गए हैं। इससे कोच एक-दूसरे से पूरी तरह से जुड़ जाएंगे। इससे बाहर की आवाज ट्रेन और डस्ट ट्रेन में नहीं आएगी। यह सुविधा मेट्रो में है।

हर सीट के पीछे 9 इंच एलसीडी स्क्रीन
तेजस के कोच में हर सीट के पीछे 9 इंच की एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इसमें यात्रियों के मनोरंजन का इंतजाम होगा। इसमें यूएसबी की सुविधा भी दी गई है ताकि यात्री अपनी पेन ड्राइव से अपनी पसंद की फिल्म आदि देख सकेंगे। स्मार्ट कोच में लाइव टीवी की सुविधा भी होगी। इस स्क्रीन पर आपकाे ये भी पता लगेगा कि ट्रेन किस स्टेशन पर है और अगला स्टॉपेज कितनी देर में और कितने किलोमीटर का है।

री-डिजाइन हो रही हैं सीट्स
अभी तक सीट्स में ई-लेदर लगाया जा रहा था। लेकिन उसकी जगह अब तुर्की सीट्स में फैब्रिक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताकि यात्री को सफर में कंफर्ट हो।

मार्च में हम दो तेजस रेलवे बोर्ड को सौंप देंगे
मार्च के अंत तक दो रैक यानी दो तेजस तैयार करके रेलवे बोर्ड को सौंप दी जाएंगी। थोड़ा मैटीरियल जो स्पेन और तुर्की से यहां आना है उसमें वक्त लग रहा है। कोच के स्ट्रक्चर तैयार कर लिए गए हैं। सीट्स का मैटीरियल व एलईडी में बदलाव के साथ इन कोचेज को स्मार्ट बनाया जा रहा है। उसमें थोड़ा वक्त लग गया। हम मार्च के अंत तक कोच तैयार कर देंगे यह तय है। - रतन लाल, जनरल मैनेजर, रेल कोच फैक्टरी कपूरथला

ट्रेन के कोच। ट्रेन के कोच।
स्पेशल शॉकर-तेजस में सिंपल शॉकर के अलावा स्पेशल शॉकर लगाए गए हैं। इन शॉकर के चलते तेज रफ्तार में भी झटके नहीं लगेंगे। स्पेशल शॉकर-तेजस में सिंपल शॉकर के अलावा स्पेशल शॉकर लगाए गए हैं। इन शॉकर के चलते तेज रफ्तार में भी झटके नहीं लगेंगे।
स्टिल डिस्क ब्रेक-इलेक्ट्रो न्यूमैटिक असिस्ट एयर ब्रेक लगाए हैं। हर व्हील पर स्टील डिस्क हैं। इसमें सिंटर्ड पैड्स लगाए गए हैं। स्टिल डिस्क ब्रेक-इलेक्ट्रो न्यूमैटिक असिस्ट एयर ब्रेक लगाए हैं। हर व्हील पर स्टील डिस्क हैं। इसमें सिंटर्ड पैड्स लगाए गए हैं।
ऑटोमेटिक डोर-ऑटोमेटिक प्लग डोर होंगे। पांच किलो प्रतिघंटा की स्पीड से इसके डोर खुद बंद हो जाएंगे। अगले स्टॉपेज पर खुल जाएंगे। ऑटोमेटिक डोर-ऑटोमेटिक प्लग डोर होंगे। पांच किलो प्रतिघंटा की स्पीड से इसके डोर खुद बंद हो जाएंगे। अगले स्टॉपेज पर खुल जाएंगे।
वेनेशियन ब्लाइंड-कोच की विंडो पर कटर्न नहीं होंगे। इसकी जगह मिरर के अंदर वेनेशियन ब्लाइंड्स होंगे। इन्हें बंद करते ही इसका कलर ट्रेन के कलर सा हो जाएगा। वेनेशियन ब्लाइंड-कोच की विंडो पर कटर्न नहीं होंगे। इसकी जगह मिरर के अंदर वेनेशियन ब्लाइंड्स होंगे। इन्हें बंद करते ही इसका कलर ट्रेन के कलर सा हो जाएगा।
हल्के और ज्यादा मजबूत स्टेनलेस स्टील के दरवाते बन रहे। हल्के और ज्यादा मजबूत स्टेनलेस स्टील के दरवाते बन रहे।

यह एक कोच से दूसरे को जोड़ने के स्टेनलेस स्टील के डोर हैं। इससे पहले स्टील के डोर लगाए जाते थे, जो काफी भारी होते थे, लेकिन स्टेनलेस स्टील होने के चलते इनकी लाइफ ज्यादा है। 

फिर कोच में लगने वाली चैसी बनाई गई... फिर कोच में लगने वाली चैसी बनाई गई...
छत बनाई जिसे बाद में फिट किया जाएगा छत बनाई जिसे बाद में फिट किया जाएगा
ट्रेन की साइड की दिवारें... ट्रेन की साइड की दिवारें...

कोच में लगने वाली चैसी बनाकर उलटी रखी है। व्हील्स आदि बाद में फिट होते हैं। साथ ही छत और साइड की दिवारें भी बनती रहती हैं। 

छत की लेजर वेेल्डिंग छत की लेजर वेेल्डिंग

चैसी और साइड वॉल्स के ऊपर लगने से पहले छत की लेजर वेल्डिंग हो रही है। 

 

इंसुलेशन लगी चारों तरफ इंसुलेशन लगी चारों तरफ

तेजस की वॉल्स और रूफ पर इंसुलेशन हो रही है ताकि डिब्बे को तेज धूप में हीट से बचाया जा सके।

छत, दीवारें और चैसी फिट होने के बाद फाइनल टच दिया जा रहा है डिब्बे को छत, दीवारें और चैसी फिट होने के बाद फाइनल टच दिया जा रहा है डिब्बे को
दूसरे कोच के मुकाबले तेजस के डिब्बे बनने में ज्यादा समय लग रहा है। क्योंकि इसमें स्मार्ट कोच लग रहे हैं। दूसरे कोच के मुकाबले तेजस के डिब्बे बनने में ज्यादा समय लग रहा है। क्योंकि इसमें स्मार्ट कोच लग रहे हैं।
सीसीटीवी कैमरे। सीसीटीवी कैमरे।
बेल्डिंग करते हुए। बेल्डिंग करते हुए।
कोच को तैयार करते हुए लोग। कोच को तैयार करते हुए लोग।
पेंट के बाद इस पर खास किस्म की विनाइल शीट्स चिपकाई जाएंगी। इन पर ही तेजस लिखा होगा। पेंट के बाद इस पर खास किस्म की विनाइल शीट्स चिपकाई जाएंगी। इन पर ही तेजस लिखा होगा।