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स्टे के बावजूद आईएएस से सरकारी कोठी खाली करवाने वाले IAS दीपक व दानिश कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के दोषी

सरकारी कोठी खाली कराने पर पूर्व डीसी एसबी दीपक कुमार और 2011 बैच के आईएएस दानिश अशरफ को कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का दोषी करार

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2018, 07:36 AM IST
IAS Deepak and Danish  convicted Contempt of Court


चंडीगढ़. कोर्ट के स्टे के बावजूद 1980 बैच के रिटायर्ड आईएएस समीर माथुर से सरकारी कोठी खाली कराने पर पूर्व डीसी एसबी दीपक कुमार और 2011 बैच के आईएएस दानिश अशरफ को कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का दोषी करार दिया गया है। जिला अदालत के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रजनीश कुमार शर्मा ने दोनों को पहली नजर में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का दोषी करार दिया। मामला 2015 में सेक्टर-7 की सरकारी कोठी नंबर 15 खाली करवाने का है। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद जानबूझकर न सिर्फ कोठी खाली करवाई गई, कोर्ट की कंटेम्प्ट भी की। दोनों आईएएस अफसरों को क्या सजा दी जाए, इसके लिए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रजनीश कुमार शर्मा ने केस हाईकोर्ट में भेज दिया है। कंटेम्प्ट केस में सजा देने का हक हाईकोर्ट के पास है। वहीं तीन साल बाद अब कोठी भी वापस देने के आदेश जारी हुए हैं।

फोन तक उठाने बंद कर दिए थे

केस जीतने वाले सीनियर एडवोकेट प्रदीप बेदी ने बताया कि हरियाणा के पूर्व होम सेक्रेटरी और आईएएस समीर माथुर सेक्टर-7 की कोठी नंबर 15 में जुलाई 2005 से रह रहे थे। रिटायर होने से दो महीने पहले, 29 अक्टूबर 2013 को उन्होंने हरियाणा के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की पोस्ट से रिजाइन दे दिया। 1 नवंबर 2013 को हरियाणा गवर्नर ने उन्हें स्टेट इन्फॉर्मेशन कमिश्नर अपॉइंट किया जो चीफ सेक्रेटरी रैंक के समकक्ष है। कायदे के मुताबिक वह सरकारी कोठी के हकदार थे।

16 अप्रैल 2015 को कोठी खाली करने के आदेश..
तत्कालीन इस्टेट ऑफिसर एसबी दीपक कुमार ने आईएएस समीर माथुर को कोठी खाली करने के आदेश दिए। माथुर ने तत्कालीन एसडीएम आईएएस दानिश अशरफ और दीपक कुमार से गुजारिश की कि उनकी कोठी न छीनी जाए। दोनों आईएएस अफसरों ने माथुर का फोन तक उठाना बंद कर दिया। माथुर ने कोर्ट में स्टे के लिए अपील दायर की। तत्कालीन एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज आरके जैन ने 6 मई 2015 को स्टे देते हुए यथा स्थिति बनाए रखने को कहा। इस दौरान इस्टेट ऑफिस के सरकारी वकील जेपी सिंह भी मौजूद थे।

8 मई 2015...
स्टे ऑर्डर देखकर वापस लौटी इस्टेट ऑफिस की टीम...

8 मई 2015 को इस्टेट ऑफिस की टीम कोठी खाली करवाने पहुंच गई। आईएएस माथुर ने कोर्ट के स्टे ऑर्डर दिखाए, तो टीम वापस लौट गई।

}आगे क्या होगा... हाईकोर्ट दोनों अफसरों को सफाई का एक मौका देगी। उसके बाद हाईकोर्ट सजा सुनाएगी। कानून के मुताबिक कंटेम्प्ट केस में 3 महीने से लेकर 1 साल तक की सजा का प्रावधान है और अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर हाईकोर्ट दोनों अफसरों को सजा सुनाती है, तो न सिर्फ उनकी सस्पेंशन होगी, बल्कि नौकरी पर भी बन सकती है।

9 मई- अब टीम ने दिखाया दानिश का लिखा कागज
डीसी एसबी दीपक से बात हो गई है, हर

हाल में कोठी खाली कराओ

दूसरे दिन इस्टेट ऑफिस की टीम दोबारा माथुर की कोठी खाली करवाने पहुंच गई। दोबारा स्टे ऑर्डर दिखाए गए। इस पर टीम ने एक कागज दिखाया, जिसमें तत्कालीन एसडीएम दानिश अशरफ ने लिखा था- उनकी डीसी एसबी दीपक से बात हो गई है, हर हाल में कोठी खाली कर्रवाई जाए।

सामान अंदर था, परिवार को बाहर कर सील की कोठी
टीम ने मौके पर तत्कालीन एसएचओ पूनम दिलावरी की अगुआई में पुलिस टीम बुलाई और कोठी सील कर दी। उस समय आईएएस माथुर पूरे परिवार के साथ कोठी में ही थे। उन्हें सामान तक निकालने का मौका नहीं दिया गया। परिवार को बाहर कर कोठी सील कर दी गई।

कोर्ट में नहीं चली सफाई, दानिश ने कहा था स्टे ऑर्डर नहीं दिखाए

कोर्ट में सफाई में आईएएस दानिश अशरफ ने लिखा कि हम मानते हैं कि गलती हुई है और वे बिना शर्त माफी मांगते हैं। जब कोठी सील करने गए तो उन्हें स्टे ऑर्डर नहीं दिखाए गए।
कोर्ट में आईएएस माथुर के वकील बेदी ने आदेश दिखाने की फोटो भी पेश कर दी। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया।

आगे क्या होगा... हाईकोर्ट दोनों अफसरों को सफाई का एक मौका देगी। उसके बाद हाईकोर्ट सजा सुनाएगी। कानून के मुताबिक कंटेम्प्ट केस में 3 महीने से लेकर 1 साल तक की सजा का प्रावधान है और अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर हाईकोर्ट दोनों अफसरों को सजा सुनाती है, तो न सिर्फ उनकी सस्पेंशन होगी, बल्कि नौकरी पर भी बन सकती है।

-कहां तैनात हैं दोनों अफसर..

-आईएएस एसबी दीपक कुमार दादर नगर हवेली में फाइनेंस सेक्रेटरी हैं।

-आईएएस दानिश अशरफ अरुणाचल प्रदेश के जिला सुबनसिरी में डीएम अपर हैं।

^मेरे साथ ज्यादती की गई। कोर्ट के आदेशों को भी इन आईएएस अफसरों ने नजरअंदाज कर दिया था, जिसके खिलाफ मैं कोर्ट गया। अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार रहेगा। ^
-समीर माथुर,
चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर हरियाणा

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