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कम्प्यूटर ऑपरेटर ने पंखे से लटकी मिली महिला को बना दिया मेल, केस में लगी धारा को बदला

कोर्ट में पेश की जाने वाली मेडिकल लीगल रिपोर्ट में फीमेल मरीज को मेल बना दिया गया।

Danik Bhaskar | Jan 10, 2018, 07:09 AM IST

पंचकूला. जनरल अस्पताल में रखे गए नौसिखिए कम्प्यूटर ऑपरेटर्स की लापरवाही का एक के बाद एक मामला सामने आ रहा है। रिपोर्ट में मरीज का जेंडर बदल देते हैं। मेल पेशेंट को गायनी ओपीडी में भेज दिया जाता है। बाद में मरीज खुद सही डॉक्टर के पास जाते है। अब एक कम्प्यूटर ऑपरेटर ने पुलिस की लगाई गई धारा को ही बदल डाला। इतना ही नहीं, कोर्ट में पेश की जाने वाली मेडिकल लीगल रिपोर्ट में फीमेल मरीज को मेल बना दिया गया।

जब पुलिस ने जांच की तो पता चला कि एमएलआर में न तो धारा ठीक है और न ही जेंडर ठीक है। इसके बाद पुलिस ने अस्पताल के चक्कर काट कर मेडिकल रिपोर्ट को कोर्ट में पेश करने से पहले ही ठीक करवाया।

आईपीसी धारा 374

अगर कोई किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ श्रम करने के लिए मजबूर करता है तो एक साल तक की कैद या जुर्माना लगाया लग सकता है। कैद और जुर्माना दोनों भी हो सकते हैं।

ये है सीआरपीसी धारा 174

किसी की डेड बॉडी मिलती है और उसकी मौत का कारण डेड बॉडी देखने से पता न लग रहा हो तो सबसे पहले इस मामले में सीआरपीसी धारा-174 के तहत इंक्वेस्ट प्रोसिडिंग शुरू की जा सकती है। डेड बॉडी का पोस्टमाॅर्टम करवाकर उसका विसरा जांच के लिए भेजा जाता है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है।

यह है मामला

सेक्टर-20 पुलिस थाना एरिया से 1 नवंबर 2017 को मामला आया था। यह 25 साल की शादीशुदा महिला रेनू की आत्महत्या का मामला था। आईओ सुरजीत कुमार ने बताया कि एक महिला ने फंखे से चुन्नी बांधकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने जांच करते हुए सीआरपीसी की धारा-174 के तहत केस दर्ज किया था। जब जनरल अस्पताल से रिपोर्ट तैयार की गई तो उसमें महिला को मेल बताया गया और 174 सीआरपीसी की धारा को आईपीसी की धारा-374 में बदल दिया गया। पुलिस जांच में रिपोर्ट में गलतियां मिली और बाद में उन्हें ठीक करवाया गया।

कॉन्ट्रैक्टर को पहले भी समझाया था

कॉन्ट्रैक्टर की ओर से हाल ही में नए कम्प्यूटर ऑपरेटर्स रखे गए थे। हमने पहले भी कहा था कि ऐसी गलतियां सामने आ रही हैं तो जो भी ऑपरेटर है उन्हें पहले ट्रेंड किया जाए। अब इस केस में भी हम अपनी तरफ से जांच करवा रहे हैं। -संजीव त्रेहन, पीएमओ