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पहली बार सामने आया सरकारी नौकरियों का जातिगत डाटा ; उलझ सकता है जाट आरक्षण

हरियाणा में जाटों की आबादी 25%, जबकि सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व 28.28%; सबसे कम बीसी-2 कैटेगरी का 12.05%।

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 05:42 AM IST

चंडीगढ़. हरियाणा में जाट, बिश्नोई समेत 6 जातियों का आरक्षण एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंस सकता है। क्योंकि, सरकारी नौकरियों में अन्य वर्गों के मुकाबले इन जातियों का प्रतिनिधित्व पहले ही बहुत ज्यादा 31.35 प्रतिशत है। अगर केवल जाटों की बात की जाए तो भी नौकरियों में इनका प्रतिनिधित्व 28.28 प्रतिशत है, जबकि जाट नेता हवा सिंह सांगवान के मुताबिक हरियाणा में जाट आबादी 25 प्रतिशत है।

सबसे कम प्रतिनिधित्व बैकवर्ड क्लास-बी का 12.05 प्रतिशत है। हरियाणा सरकार की ओर से हाल ही में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को उपलब्ध कराए गए अधिकारियों-कर्मचारियों के जातिगत प्रतिनिधित्व की सूची से यह खुलासा हुआ है। अब इन आंकड़ों पर आयोग ने आम लोगों से 30 दिसंबर, 2017 तक आपत्तियां मांगी है। आयोग 31 मार्च, 2018 तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।


पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक आदेश पर आयोग ने राज्य सरकार से पिछले दिनों सभी सरकारी कर्मचारियों का जातिगत डाटा मांगा था। इसके तहत मुख्य सचिव डीएस ढेसी की ओर से आयोग के भेजे आंकड़ों में बताया गया कि राज्य में 2.58 लाख पद हैं। इनमें से सरकार 2.42 लाख कर्मचारियों का डाटा जुटा पाई है।

क्लास-1 से 4 तक जाटों की हिस्सेदारी बेहतर

बैकवर्ड क्लास -सी की ही अगर बात करें तो इसमें भी क्लास-1 से लेकर क्लास-4 तक जाट समुदाय की हिस्सेदारी अन्यों से बेहतर है। यानी इस ग्रुप के कुल 75840 पदों में से 68427 पदों पर इसी वर्ग के लोग काम कर रहे हैं। जो कुल सरकारी नौकरियों में 28.28 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें जट सिख, मुल्ला जाट और मुस्लिम जाट जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ जाएगा।

16 हजार कर्मियों का जातिगत रिकॉर्ड नहीं मिला

सरकार 16 हजार अधिकारी-कर्मचारियों का जातिगत डाटा नहीं जुटा पाई। इनके अलावा अगर आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत कॉन्ट्रैक्ट, और एडहॉक बेसिस पर लगे कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया जाए तो यह प्रतिनिधित्व और भी ज्यादा होने की संभावना है।