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उम्र छिपाने के लिए हाईकोर्ट सुपरिंटेंडेंट को पैसे ऑफर किए थे 44 की सुनीता ने

जज बलविंदर कुमार शर्मा ने एडवोकेट सुनीता को किस कदर फायदा पहुंचाया, इसका खुलासा 2400 पेजों की चार्जशीट से होता है।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 03:07 AM IST

चंडीगढ़. हरियाणा के 109 जजों की भर्ती के पेपर लीक मामले में आरोपी हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार जज बलविंदर कुमार शर्मा ने एडवोकेट सुनीता को किस कदर फायदा पहुंचाया, इसका खुलासा 2400 पेजों की चार्जशीट से होता है। भास्कर ने चार्जशीट की कॉपी हासिल की है। इससे पता चलता है कि इस पोस्ट के लिए सुनीता ने 44 साल की उम्र में एप्लाई किया था, जबकि एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के मुताबिक 42 साल तक ही एप्लाई कर सकते थे। सुनीता की उम्र ज्यादा होने की बात से शर्मा अच्छी तरह वाकिफ थे।

इस बारे में उन्हें हाईकोर्ट सुपरिंटेंडेंट ईश्वर सिंह ने खुद बताया था कि किस तरह सुनीता उनके घर पहुंची और पैसों का बैग देते हुए रिश्वत की पेशकश की थी। सब कुछ जानते हुए भी शर्मा ने ईश्वर सिंह से कहा था कि उन्हें सुनीता की बात सुननी चाहिए थे। ईश्वर सिंह को पुलिस ने इस केस में गवाह बनाया है। इस एग्जाम में सुनीता ने टॉप किया था। सुनीता और शर्मा के क्लोज रिलेशंस का खुलासा भास्कर ने 15 जनवरी को किया था।

चार्जशीट के मुताबिक पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सुपरिंटेेंडेंट ईश्वर सिंह ने बताया

- 2 अगस्त 2017 को एचसीएस ज्यूडिशियरी पेपर की आंसरशीट को इवैल्यूएट करने के बाद उन्होंने पाया कि टॉप एडवोकेट सुनीता ने किया है।
- सारे सर्टिफिकेट जांचे तो पाया कि सुनीता 44 साल की है, जबकि 42 साल तक ही इस पद के लिए आवेदन किया जा सकता था।
- ईश्वर सिंह ने जज बलविंदर शर्मा को इस गड़बड़ी के बारे में बताया।
- जज शर्मा ने जवाब दिया कि हरियाणा में 125 प्रोसिडिंग के तहत पिछड़े एरिया में रहने वाली महिलाओं
को उम्र में छूट दी गई है। ईश्वर सिंह इस पर संतुष्ट हो गए।
- 3 अगस्त की सुबह 10.19 मिनट पर सुनीता ने ईश्वर को फोन किया और कहा कि वह मिलना चाहती है। ईश्वर हैरान हुए और मिलने से मना कर दिया।
- 4 अगस्त की सुबह ईश्वर हाईकोर्ट पहुंचे तो गेट नंबर 1 के पास एक महिला एडवोकेट खड़ी थी। उसने ईश्वर का रास्ता रोका और बताया कि वह सुनीता है। सुनीता ने कहा कि वह जानती है वह ओवरएज है, लेकिन इस इश्यू को दोबारा न उठाया जाए। ईश्वर ने कहा कि इस बारे में वह बलविंदर शर्मा से मिलें। ईश्वर हैरान हुए कि सुनीता को कैसे पता चला कि उन्होंने ओवरएज का इश्यू उठाया था, क्योंकि बात सिर्फ उनके और जज बलविंदर शर्मा के बीच हुई थी।
- ईश्वर ने सारी बात जज बलविंदर शर्मा को बताई। शर्मा ने कहा कि आपको सुनीता की बात सुननी चाहिए थी।
- 4 अगस्त की शाम सुनीता ईश्वर सिंह के घर पहुंच गई और कहा कि ओवरएज का मुद्दा मत उठाएं। सुनीता ने एक काले रंग का लिफाफा ईश्वर सिंह को देना चाहा, जिसमें नोटों के बंडल थे। ईश्वर सिंह ने पैसे लेने से मना कर दिया। इस पर सुनीता ने कहा कि और पैसे भी दे देगी। ईश्वर ने सुनीता को कहा कि वह ओवरएज को मुद्दा नहीं बनाएंगे, लेकिन वह उनका पीछा करना बंद कर दे।
- अगले दिन ईश्वर ने दोबारा जज बलविंदर शर्मा को इस बारे में जानकारी दी। शर्मा ने कहा कि वह किसी कॉन्फिडेंशियल काम में बिजी हैं, 6 या 7 अगस्त को बुलाएंगे। इन दोनों दिन हाईकोर्ट में छुट्टियां थीं। शर्मा ने इस बारे में किसी से बात करने से ईश्वर को मना किया।
सुशीला के थानेदार पति से होगी पूछताछ...
इस केस में पकड़ी गई दूसरी टॉपर एडवोकेट सुशीला के पति हरियाणा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर हैं। पुलिस उनसे भी पूछताछ करेगी, क्योंकि आशंका है कि पेपर लीक के जो पैसे आए, वह इस थानेदार ने ही इकट्‌ठे किए। सुशीला अभी दो दिन के रिमांड पर है। उसे मंगलवार को पुलिस कोर्ट में पेश करेगी। सूत्रों की माने तो सुशीला जांच में
सहयोग नहीं कर रही है।
ये है मामला...
जज से 1100 बार फोन पर कॉन्टैक्ट करने वाली सुनीता ही बनी टॉपर... पिंजौर की वकील सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि एचसीएस ज्यूडिशियरी का पेपर डेढ़ करोड़ में बिक रहा है। उसे भी इसकी पेशकश की गई थी। उसने सुशीला नाम की एक लड़की से लेक्चर की वीडियो क्लिप मंगवाई थी, लेकिन उसने गलती से सुनीता से अपनी बातचीत की वीडियो क्लिप सेंड कर दी। इस क्लिप में पेपर में आने वाले सवालों पर हुई बातचीत रिकॉर्ड थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपने स्तर पर जांच शुरू की, जिसमें सामने आया कि हाईकोर्ट के ही रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रार डॉ. बलविंदर शर्मा के मोबाइल फोन से सुनीता के फोन पर सालभर में 1100 बार संपर्क हुआ था। बाद में सुनीता ही इस एग्जाम की टॉपर बन गई। वहीं, सुशीला रिजर्व कैटेगरी की टॉपर बनी। पेपर लीक के खुलासे के बाद कोर्ट ने परीक्षा ही रद्द कर दी। जज बलविंदर शर्मा, एडवोकेट सुनीता पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।