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महिलाओं-बेटियों पर सेक्सुअल असॉल्ट सबसे ज्यादा होते हैं यहां, 3 साल में 2218 केस

Dainik Bhaskar

Dec 30, 2017, 05:56 AM IST

साल 2014 से 2017 तक इन सेंटरों में फिजिकल और सेक्सुअल हरासमेंट के 2218 केस चुके हैं।

डाॅ. सोनिया त्रिखा खुल्लर डाॅ. सोनिया त्रिखा खुल्लर

पंचकूला. हरियाणा सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को लेकर प्रचार कर रही है। इसके बावजूद हरियाणा में अभी भी महिलाओं और बेटियों का काफी शोषण हो रहा है। महिलाओं और बेटियों पर फिजिकली असॉल्ट सबसे ज्यादा अंबाला में हो रहा है। 8 जिलों की बात की जाए तो पंचकूला में सेक्सुअल असॉल्ट के केस सबसे ज्यादा आए हैं और फिजिकली असॉल्ट के मामलों में अंबाला के बाद पंचकूला का ही नंबर आता है। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग की रिसर्च और हरियाणा के 8 जिलों में खोले गए सुकून सेंटर्स से मिली है।

महिलाओं पर बढ़ते क्राइम को कम करने के लिए पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, पानीपत, रेवाड़ी, जींद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सुकून सेंटर खोले गए हैं। सरकारी अस्पतालों में बने सुकून सेंटरों का मकसद पीड़ित लड़की या महिला की मदद करना है।

सुकून सेंटर का मकसद :
अगर कोई भी पीड़ित लड़की या महिला इलाज के लिए अस्पताल में आती है तो डॉक्टर उसे सुकून सेंटर में भेजता है। यहां पर पीड़ित की मदद के लिए काउंसिलिंग की जाती है। अलग-अलग काउंसलर लगाए गए हैं। मेडिकल लीगल एक्सपर्ट की ड्यूटी लगी है। अगर कोई महिला या लड़की दयनीय हालत में होती है तो उसे कपड़े भी दिए जाते हैं। एक दिन के लिए वार्ड रूम उपलब्ध करवाया जाता है। साथ ही शेल्टर रूम का भी इंतजाम है। सेंटर में एक डाॅक्टर, महिला पुलिस थाने की कर्मचारी, संबंधित पुलिस चौकी इंचार्ज की ड्यूटी लगाई गई है। सीजेएम भी समय-समय पर आकर निरीक्षण करती हैं। एडवोकेट का रोस्टर भी बन गया है कि कौन केस लड़ेगा।

शुक्रवार को हरियाणा राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार वेलफेयर की ओर से इस मामले में एक अवेयरनेस वर्कशॉप का आयोजन किया। इसमें राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार वेलफेयर की डायरेक्टर डाॅ. सोनिया त्रिखा खुल्लर, हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमित झा, एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर मोहम्मद अकील, आईजी ममता सिंह भी शामिल रहीं। डाॅ. सोनिया त्रिखा खुल्लर ने बताया कि इन सेंटर्स पर ढाई साल में 2218 महिलाओं के केस आए हैं। इनमें शारीरिक शोषण, मानसिक शोषण और जलाने, मारपीट के केस सामने आए हैं। राज्य में 66 प्रतिशत महिलाएं और लड़कियां अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के प्रति चुप रहती हैं। इस कारण मानसिक तौर पर तनाव में जाती है। साल 2014 से 2017 तक इन सेंटरों में फिजिकल और सेक्सुअल हरासमेंट के 2218 केस चुके हैं।

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