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पिता की मौत के बाद बेटे को नहीं दिया इंश्योरेंस क्लेम, लगा इतने लाख जुर्माना

The son did not give the insurance claim | Last Modified - Dec 29, 2017, 07:58 AM IST

इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम देने में की आनाकानी, शिकायत पर कंज्यूमर फोरम का फैसला
  • पिता की मौत के बाद बेटे को नहीं दिया इंश्योरेंस क्लेम, लगा इतने लाख जुर्माना
    डेमोफोटो

    पंचकूला. इंश्योरेंस पॉलिसी होने के बावजूद कंज्यूमर के 56 साल के पिता की इलाज के दौरान मौत होने पर उनके बेटे को क्लेम नहीं देने का मामला पहुंचा कंज्यूमर फोरम में। फोरम ने इंश्योरेंस कंपनी पर 1.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। यह मामला बलटाना के रहने वाले संजय कुमार का है। संजय ने अपने पिता नरेंद्र कुमार के नाम सेक्टर-11 पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस से लाइफ इंश्योरेंस कराई थी। 

     

    इंश्योरेंस क्वार्टरर्ली 24500 रुपए जमा करना था। इंश्योरेंस की कुल राशि 15 लाख 68 हजार रुपए थी जिसका प्रीिमयम क्वार्टरर्ली 10 साल तक जमा करना था। पॉलिसी देने के दौरान कंज्यूमर के पिता का इंश्योरेंस कंपनी की ओर से डॉक्टर्स के पैनल की मदद से मेडिकल एग्जामिनेशन किया गया। इंश्योरेंस प्रीमियम के तहत कंज्यूमर के पिता ने 15 अक्टूबर, 2014 को कुल 49 हजार रुपए जमा किए। 13 दिसंबर, 2014 को कंज्यूमर के पिता का बाथरूम में गिरने की वजह से दोनों हिप में फ्रैक्चर हो गया था। ऐसे में उन्हें इंस्कॉल हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया।

     

    करीब 10 दिन के इलाज के बाद 22 दिसंबर, 2014 को कंज्यूमर के िपता को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया और उसके बाद उन्हें मेडिकेशन पर रखा गया था। 11 मार्च, 2015 को कंज्यूमर के पिता का निधन हो गया। इसके कुछ दिन बाद कंज्यूमर ने इंश्योरेंस क्लेम के लिए इंश्योरेंस कंपनी में आवेदन दिया और उसके साथ सभी तरह के जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी जमा किए। कंपनी की ओर से इंश्योरेंस क्लेम यह कहकर देने से मना कर दिया गया कि कंज्यूमर के पिता ने मेडिकल अनफिट होते हुए उनसे पहले हार्ट अटैक और डायबिटीज होने की बात छिपाई। हालाकि कंज्यूमर ने ऐसा नहीं होने की बात कहकर इंश्योरेंस क्लेम की राशि वापस करने की कई बार गुहार लगाई, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी की ओर से उसकी एक नहीं सुनी गई। परेशान होकर कंज्यूर ने इस मामले की शिकायत कंज्यूमर फोरम में दे दी। कंज्यूमर फोरम के प्रधान धर्मपाल और मेंबर अनीता कपूर की बेंच ने मामले में फैसला सुनाया है। 

     

    कंज्यूमर फोरम के फैसले में यह साफतौर पर कहा गया है कि इंश्योरेंस कंपनी कंज्यूमर को इंश्योर्ड पर्सन के बदले में क्लेम की राशि देने से नहीं भाग सकती। इसलिए कंपनी को हॉस्पिटल के दौरान ट्रीटमेंट और उसके बाद मेडिकेशन में हुए खर्च की पूरी राशि कंज्यूमर को देनी होगी। इसके साथ ही इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत क्लेम की पूरी राशि भी कंज्यूमर को अदा करने को कंपनी से कह गया हैा। इसके अलावा कंज्यूमर को मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशान करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा मुकदमे की राशि के तहत 10 हजार रुपए इंश्योरेंस कंपनी पर जुर्माना लगाया। 

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Web Title: The Son Did Not Give The Insurance Claim
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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