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तीन बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार, ये इच्छा पूरी नहीं कर पाई फैमिली

श्मशानघाट में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें थीं नम। बीमारी के चलते हुई थी मौत।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:16 AM IST

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    पिता का अंतिम संस्कार करती हुई तीनों बेटियां।

    चंडीगढ़.एक वक्त था बेटियां पिता का अंतिम संस्कार नहीं करती थीं। अब जमाने के साथ परंपरा बदलने लगी है। हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ बराबर चलने वाली बेटियां अब इस मिथक को भी तोड़ रही हैं। ऐसा ही एक वाक्या सेक्टर-25 स्थित श्मशानघाट में देखने मिला जहां पर प्रो. यश गुलाटी की तीनों बेटियों ने भी अपने पिता के जीवन यात्रा की अंतिम रस्में पूरी करके उन्हें इस जहां से विदा किया और उन्होंने पूरी रस्मों-रिवाज से पिता की अंत्येष्टि की रस्में निभाईं। इस मौके पर श्मशानघाट में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। दैनिक भास्कर में भी थे कार्यरत...

    - प्रो. गुलाटी की बड़ी बेटी अनीता, सुजाता और ज्योत्सना ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।

    - 83 वर्षीय प्रो. यश गुलाटी पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग से बतौर अध्यक्ष रिटायर हुए थे। उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर सलाहकार कार्य भी किया।

    - वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे। इसी वजह से उनकी मौत हो गई।

    - उनकी अंतिम यात्रा में शहर के कई बुद्धिजीवी और वरिष्ठ साहित्यकार मौजूद रहे।

    ये इच्छा नहीं हो पाई पूरी

    - प्रो. गुलाटी शुरू से ही पर्यावरण प्रेमी थे। उन्होंने जिंदगी में किसी को कभी किसी बात के लिए आहत नहीं किया।

    - उनका मानना था कि शरीर नश्वर है। इसे जलाने से पर्यावरण को नुकसान होगा, इसलिए उनकी इच्छा थी कि उनके शरीर के हर अंग को दान कर दिया जाए।

    - कुछ तकनीकी कारणाें से परिवार वाले ऐसा नहीं कर पाए लेकिन उनकी अंतिम इच्छा शरीर को इलेक्ट्रिक मशीन पर जलाने का परिवार वालों ने पूरा कर दिया।

    - उनकी बेटियां भी चाहती थीं कि ऐसा ही हो।

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    प्रो. गुलाटी
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Web Title: Three Daughters Did Fathers Funeral
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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