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दिल में हो प्यार तो, हर दिन वेलेंटाइन-डे

Danik Bhaskar | Feb 14, 2018, 08:14 AM IST
वीरेंद्र मेंहदीरत्ता और कांता मेंहदीरत्ता वीरेंद्र मेंहदीरत्ता और कांता मेंहदीरत्ता

चंडीगढ़. 14 फरवरी यानि वेलेंटाइन-डे। प्यार के नाम पर मनाया जाने वाला एक दिन। लेकिन प्यार का क्या एक ही रंग होता है ...इस सवाल के जवाब में यहां अपनी कहानी बता रहे हैं सात कपल्स । हर कहानी प्यार के एक रंग को बयां कर रही है।

हम एक-दूसरे के दिल में रहते हैं तभी तो 61 साल से साथ हैं

वीरेंद्र मेंहदीरत्ता और कांता मेंहदीरत्ता की शादी 4 जुलाई 1957 में हुई। वेलेंटाइन डे के मौके पर अपनी लंबी शादी शुदा जिंदगी के बारे में कांता बोलीं-शादी से पहले हम सेक्टर- 23 में रहते थे और ये 22 में। हम दोनों के घर वालों ने हम से हमारी रजामंदी पूछी और हमने हामी भर दी। ये रजामंदी पूरे जीवन के लिए थी। इसलिए आज तक हम साथ हैं। एक दूसरे की बीमारी, दुख-सुख सब में साथ।

कांता याद करती हैंंं-एक बार गिरने से मेरे हाथ में चोट आई। डॉक्टर ने एक्सरसाइज को कहा। तब वीरेंद्र मेरे हाथ में हाथ डालकर रोजाना मुझे एक्सरसाइज करवाते। दूसरी तरफ वीरेंद्र कहते हैं-1970 में बीमारी की वजह से साढ़े तीन महीने तक हॉस्पिटल में एडमिट रहा और कांता ने दिन-रात एक करके मेरी सेवा की। बच्चों को रिश्तेदार के पास छोड़ दिया। सिर्फ मुझ पर ही ध्यान दिया। अभिनेत थिएटर ग्रुप बनाया तो रातदिन लोग घर आने लगे। तब भी कोई शिकायत नहीं की। सब जगह मेरे साथ खड़ी रहीं हमेशा। रही बात एक-दूसरे के लिए कुछ करने की तो मुझे नहीं लगता है हमने ऐसा किया है क्योंकि ये मुझमें में है मैं इन में हूं।

इनका मानना है कि वेलेंटाइन -डे तो एक दिन आता है लेकिन ये तो हर दिन अपने साथी के लिए प्यार, जिम्मेदारी, समर्पण, कर्तव्य, सहयोग और सबसे महत्वपूर्ण उनके साथ हर कदम पर होने का एहसास कराते हैं। आइए पढ़ें ये कहानियां और देखें कि इस वेलेंटाइन डे पर आपको प्रेम का कौन-सा रंग छू कर गुजर रहा है...

एक दूसरे को छोड़कर कभी कहीं नहीं जाते
प्रोफेसर वीरेंद्र मेंहदीरत्ता और कांता ने 61 बरस का वैवाहिक जीवन गुजारा है अब तक। दोनों एक दूसरे की केयर करते हुए साथ रहते हैं। अगर कांता को आंखों की कमजोरी के कारण कोई दिक्कत आती है तो वीरेंद्र उनका सहारा बनते हैं। वीरेंद्र को कोई बीमारी घेरती है तो कांता साथ खड़ी मिलती हैं। दोनों एक दूसरे को छोडकर कभी कहीं नहीं जाते ।

म्यूजिक डायरेक्टर अतुल शर्मा और आर्किटेक्ट शिवानी शर्मा म्यूजिक डायरेक्टर अतुल शर्मा और आर्किटेक्ट शिवानी शर्मा

एक साथ गाने का वादा शादी के बाद पूरा हुआ 

 

म्यूजिक डायरेक्टर अतुल शर्मा और आर्किटेक्ट शिवानी शर्मा की शादी को 30 साल हो गए। दोनों की बैकग्राउंड अलग हैं लेकिन अब मिलकर ऐसे एक हुए कि संगीत से एक राह निकाल ली टुगेदरनेस की। इन्होंने एक म्यूजिकल बैंड तैयार किया है जिसमें अतुल संगीत सजाते हैं और शिवानी व बेटे शारंग के साथ गाते भी हैं।   

 

शिवानी 15 साल की थीं जब अतुल के पिता से अंग्रेजी की पोएट्री पढ़तीं थीं। वे चाहते थे कि वे और अतुल, उनकी नज्में गाएं। ये दोनों अलग-अलग फील्ड में पढ़ाई कर रहे थे इसलिए तब ये संभव नहीं हुआ।  इत्तेफाकन एक प्ले में दोनों ने काम किया और इसके बाद 19 की शिवानी और 25 के अतुल एक दूसरे के हो गए। शादी के बाद शिवानी ने इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई पूरी की और अतुल ने संगीत के क्षेत्र में काम किया। 

 

लव बैंड है रेड ब्रिक हाउस 
अतुल संगीत में व्यस्त थे। शिवानी अपने काम में। लेकिन पापा का सपना  दोनों को याद था। फिर जन्म लिया म्यूजिकल बैंड -द रेड ब्रिक हाउस ने। जिसे वे एक लव बैंड ही मानते हैं। शिवानी और अतुल कहते हैं-प्यार न होता तो ये बैंड भी न होता। ये हमारे प्यार का नतीजा है।

 

दिपिन ढींगरा और रशियन ऑर्थोडॉक्स क्रिस्चियन एना दिपिन ढींगरा और रशियन ऑर्थोडॉक्स क्रिस्चियन एना

हमारे रस्मो-रिवाज अलग थे लेकिन प्यार एक जैसा 

 

दिपिन ढींगरा और रशियन ऑर्थोडॉक्स क्रिस्चियन एना ने 2009 में एफबी के जरिए बात शुरू की। फिर सोचा कैसे मिला जाए। दिपिन ने बताया - एना के भारत आने से पहले उसकी मां ने यहां महिलाओं के बारे में नेट पर पढ़ा कि उनके साथ यहां बहुत अत्याचार होते हैं। वे डर गईं। इसके बावजूद एना भारत आईं। उन्हें छह महीने का वीजा मिला था।

 

चार महीने बीते तो शादी का खयाल आया। मां शादी के खिलाफ थीं फिर भी तुरंत शादी का फैसला ले लिया गया। पर मैं उस लड़की को नजरअंदाज नहीं कर सकता था जो सिर्फ मेरे लिए भारत आई।  मैंने ऑनलाइन स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के बारे में पढ़ा।  एक फाॅर्मेलिटी के तहत ऐसे अखबार में नोटिस दिया जो न मेरे और न ही मेरे किसी रिश्तेदार के घर आता है। एक महीने बाद हमने जून 2010 में शादी की और अब हमारा हमेशा का साथ है।  

 

कल्चरल डिफरेंस के बावजूद हम एक हैं 
दिपिन और एना के बीच कल्चरल डिफरेंस होते हुए भी शानदार बॉन्डिंग है। एक दूसरे को समझते हुए, एक दूसरे से सीखते हुए जीवन गुजर रहा है। दिपिन कहते हैं-एना बिलकुल भी डिमांडिंग नहीं है। एना मानती हैं-प्यार की ही ताकत है कि हम साथ हैं और हमारा तीन साल का एक बेटा भी है। 

 

इशा काकरिया और जसकरण सिंह इशा काकरिया और जसकरण सिंह

अपनी खुशी से ज्यादा प्यार का रखा ख्याल

 

इशा काकरिया और जसकरण सिंह की शादी 28 अक्टूबर 2012 में हुई। इशा सोशल वर्कर हैं।  बताती हैं- करण वॉलंटियर बनकर हमारे एनजीओ से जुड़े। इनका काम करने का जुनून मुझे खास लगा। हम अच्छे दोस्त बन गए। एक बार करण मेरे घर आए हुए थे दोस्त होने के नाते मैंने मैट्रीमोनियल की एड दिखाई। जो मेरे पापा ने न्यूजपेपर में दी थी।

 

करण को लगा कि कहीं मुझे खो न दें इसलिए फौरन शादी के लिए प्रपोज किया। मैं हिन्दू हूं और जसकरण सिख । हालांकि हमारे कल्चर अलग थे पर मुझे कोई परेशानी नहीं हुई क्योंकि करण ने मेरा साथ दिया। करण बोले- हम दोनों की आदतें भी काफी मिलती हैं। सोशल वर्क करते हैं, ट्रेवलिंग करने का दोनों को शौक है। पहला वेलेंटाइन डे हमारे लिए बेहद खास रहा क्योंकि इसी समय हम मालदीव हनीमून के लिए गए थे। 

 

हम बहुत कूल कपल हैं
बहुत सारा काम साथ करते हैं। ट्रेवल भी साथ-साथ होता हैै। कैमरा भी साथ ही होता है इसलिए अपने स्पेशल पलों को हमेशा कैमरे में कैद करते रहते हैं। एक दूसरे की खुशी को समझना, रिस्पेक्ट करना और खयाल रखना यही तो है जिंदगी को जीने का असली राज। 

 

प्रवीन कुमार रतन और रूपा अरोड़ा प्रवीन कुमार रतन और रूपा अरोड़ा

पति का लीवर फेल हुआ तो पत्नी ने दिया 

 

 प्रवीन कुमार रतन और रूपा अरोड़ा की शादी 14 अक्टूबर 2002 को हुई।  जिंदगी अच्छी चल रही थी कि तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने इन्हें हिलाकर रख दिया।  रूपा कहती हैं- पीलिया के कारण प्रवीन का लीवर खराब हो गया। डॉक्टर ने ट्रांसप्लांट के लिए कहा। पर डोनर नहीं मिला। फिर मैंने खुद ही डोनर बनने का फैसला लिया। क्योंकि ये मैं किसी और के लिए नहीं अपने ही लिए कर रही थी।

 

मेरे शरीर से  65 प्रतिशत लीवर पति के शरीर में ट्रांसप्लांट किया गया। हम दोनों अब ठीक हैं और इसके बाद हमारा एक बेटा भी हुआ। जो साढ़े तीन साल का है। प्रवीन बोले- ट्रांसप्लांट के बाद हमने एक दूसरे के साथ वास्तव में जीना शुरू किया है।  अब हम हर काम एक साथ करते हैं, जैसे दोनों साथ जिम जाते हैं। रूपा ने जो त्याग किया है वह अब हमारे जीवन का आधार है।  

 

हम एक दूसरे के अंदर बसते हैं 
लोग तो कहते हैं कि तेरे लिए दिल जिगर और जान दे दूं लेकिन रूपा ने सच में ऐसा किया। हालांकि वे इसे त्याग का नाम नहीं देतीं लेकिन उनके इस कदम से न केवल उनके पति की जान बची बल्कि उनके प्यार को नए अर्थ भी मिले। 

सोशल एक्टिविस्ट शर्मिता भिंडर और दुबई बेस्ड बिजनेसमैन इनके पति टोनी भिंडर। सोशल एक्टिविस्ट शर्मिता भिंडर और दुबई बेस्ड बिजनेसमैन इनके पति टोनी भिंडर।

एकदम अलग हैं आदतें फिर भी एक दूजे के लिए 

 

सिटी बेस्ड सोशल एक्टिविस्ट शर्मिता भिंडर और दुबई बेस्ड बिजनेसमैन इनके पति टोनी भिंडर। शादी को 26 साल हुए पर पहचान 32 साल की है। दोनों की आदतें एकदम अलग हैं। विचार भी।  पर दोनों एक दूसरे को इतना चाहते हैं कि एक दूसरे के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। शर्मिता बताती हैं- 9वीं क्लास में थी जब टोनी से मुलाकात हुई।

 

खेल खेल में तब  उन्होंने मुझे अपनी गर्ल फ्रेंड बनने के लिए प्रपोज किया। मैंने जवाब दिया कि शादी करोगे तभी गर्लफ्रेंड बनूंगी। उन्होंने कहा कि अभी कैसे कह दूं कि मैं शादी करूंगा। पर शायद मेरी दृढ़ता इन्हें पसंद आ गई थी कि बाद में हमारी शादी भी हो गई । इस बीच मेरी मां की कैंसर से मौत हो गई अौर उनके 11 महीने पिता भी चल बसे। इसके बाद टोनी मेरा ज्यादा ख्याल रखने लगे। मेरी भी पूरी डिपेंडेंसी उनपर हो गई। हम दोनों एक दूसरे पर निर्भर हैं। 

 

पति-पत्नी नहीं दोस्तों की तरह रहते हैं
शर्मिता 19 साल की  टोनी 23 थे जब इनकी शादी हुई। अब ये कहते हैं-हमारी रूहें एक दूसरे से जुड़ी हैं। हम अलग अलग आदतों वाले पक्के दोस्त हैं। अगर सिर्फ पति पत्नी की तरह रहते तो शायद कोई प्रॉब्लम आती भी। दोस्त  थे तो प्यार भी बचा रहा रिश्ता भी। 

पंजाबी लाफ्टर के बादशाह जसपाल भट्‌टी और सविता भट्‌टी पंजाबी लाफ्टर के बादशाह जसपाल भट्‌टी और सविता भट्‌टी

हमारी बेटी वेलेंटाइन डे के दिन पैदा हुई थी 

 

एकसाथ रहकर तो सब वेलेंटाइन मनाते हैं। हम उनकी याद को साथ बिठाकर इस दिन को मनाते हैं। सविता भट्‌टी बताती हैं-हमारे लिए वेलेंटाइन डे इसलिए डबल खुशियों वाला था क्योंकि इस दिन हमारी बेटी राबिया का जन्म हुआ था। मेरा यह तोहफा था भट्‌टी साहब के लिए जिसे उन्होंने हमेशा दिल से लगाए रखा। वे हमारे लिए जितना कर सकते थे, उससे ज्यादा करते थे।

 

मैं कैसी लग रही हूं, मुझे कैसा दिखना चाहिए...ये सारी चीजें उनकी नजर में रहती थीं। आज वे नहीं हैं तो भी मुझे हर साल इस दिन अपनी बेटी को जन्मदिन मुबारक कहते हुए वे सारे वेलेंटाइन डे याद आते हैं जो हमने साथ गुजारे। यूं भी मुझे तो हरदम यही लगता है कि वे मेरे आसपास ही रहते हैं। किसी का आपके करीब होना एक अहसास ही तो है जो मेरे दिल में हमेशा बना रहता है। 

 

ये साथ सिर्फ इस दुनिया तक का नहीं 
पंजाबी लाफ्टर के बादशाह जसपाल भट्‌टी और सविता भट्‌टी की जोड़ी को हर जगह साथ देखा जाता था। अब जबकि जसपाल भट्‌टी नहीं हैं, सविता अपने किसी भी काम को उनके नाम के बिना शुरू नहीं करतीं। वे कहती हैं-साथ सिर्फ इस दुनिया तक का ही तो नहीं था।