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जो LTCG टैक्स चिदंबरम ने हटाया, जेटली ने उसे लगाया, सिर्फ 1 लाख तक की दी छूट

2004-05 में एलटीसीजीटी हटा कर एसटीटी लगाया था, अब दोनों एक साथ लगेंगे

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:35 AM IST
Which was removed by LTCG Tax Chidambaram

चंडीगढ़. बजट 2018 में सरकार ने निवेश पर एक साल बाद होने वाले लाभ पर भी 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) लगा दिया। इसमें एक लाख की छूट भी मिलेगी पर मौजूद रिटर्न के चलते शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स में 10-12 लाख रुपए का निवेश करने वाले इन्वेस्टर को भी साल में एक लाख से अधिक का लाभ होगा। जितना लाभ बढ़ेगा उतना अधिक टैक्स देना होगा।


2004-05 के बजट में तब के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाकर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) लगाया था, जोकि अभी तक लागू है। इसमें शेयर्स की खरीद अाैर बिक्री पर ही एसटीटी लग जाता है। इसे आसान भी बनाया गया था। उसके बाद साल के अंदर रिटर्न लेने पर 15 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स तो लगता है लेकिन एक साल बाद उस पर टैक्स से छूट है। अब इसी लाभ को फिर से कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में ले आया गया है।

इन्वेस्टर्स पर डबल प्रेशर
बीबी गोयल, सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर का कहना है कि नए बजट में एसटीटी को हटाए बिना लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाया है। इससे निवेशकों पर दोहरा भार पड़ा है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के चलते इन्वेस्टर्स को अब अपने निवेश पर मिल रहे लाभ को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा। वह अपने निवेश को परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी शुरू कर सकता है, जिससे उसका कैपिटल गेन टैक्स अलग अलग अकाउंट में बंट जाएगा।

करीबी नजर रखनी होगी अब निवेशकों को
विक्सन सिक्योरिटीज के डायरेक्टर वी कुमार का कहना है कि बीते दो सालों में काफी रिटर्न मिला है। सरकार ने इसमें फायदा पाने के लिए ये टैक्स लगाया है। हमें उम्मीद थी कि इसे 10 लाख रुपए से अधिक के लाभ पर लगाया जाएगा, जिससे रिटेल इन्वेस्टर्स को राहत मिलेगी। अब इन्वेस्टर्स को रिटर्न पर अधिक करीबी नजर रखनी होगी।

यहां भी चुपचाप किया खेल
50 लाख रुपए तक का एलटीसीजी, जो किसी भी एसेट्स से हुआ हो, को अब तक 54ईसी बॉन्ड में निवेश कर बचाया जा सकता था, अब उसे सिर्फ जमीन या बिल्डिंग या दोनों तक ही सीमित कर दिया गया है। शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स पर होने वाले एलटीसीजी से अब ये छूट नहीं मिलेगी। इस बॉन्ड की अवधि भी तीन साल से बढ़ा कर पांच साल कर दी गई है।

अब क्या करें निवेशक

- 31 जनवरी को शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स बाजार भाव के अनुसार जो वैल्यू रखते हैं, वहां तक निवेशक को कोई टैक्स नहीं है, वह उसे खरीद के एक वर्ष बाद कभी भी बेच सकता है।
- जो नया निवेश होगा, उस पर कैपिटल गेन टैक्स के नए नियम लागू होंगे।
- भविष्य में अगर शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम बेचने पर साल के अंदर 15 फीसदी और साल के बाद 10 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा।
- ऐसे में टैक्स बचाने के लिए निवेश को कर के दायरे में आने से पहले विड्रा कर दोबारा से निवेश कर सकते हैं
- इससे आपका कुल निवेश नया हो जाएगा और उसके अगले साल में आपका लाभ उस नए बेस वैल्यू निवेश पर गिना जाएगा
- निवेश के पहले साल में लाभ पर 15 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स पहले की तरह ही हे। ये लाभ निवेश के एक साल बाद ही लाभ लेने में मिलेगा।

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