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रंधावा उत्सव में पंजाब गौरव सम्मान

News - शुक्रवार से पंजाब कला भवन में सात दिवसीय डॉ. एमएस रंधावा आर्ट एंड लिट्रेचर फेस्टिवल 2018 की शुरुआत हुई। उद्घाटन...

Dainik Bhaskar

Feb 03, 2018, 02:00 AM IST
रंधावा उत्सव में पंजाब गौरव सम्मान
शुक्रवार से पंजाब कला भवन में सात दिवसीय डॉ. एमएस रंधावा आर्ट एंड लिट्रेचर फेस्टिवल 2018 की शुरुआत हुई। उद्घाटन समारोह पर पंजाब के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सरदार नवजोत सिंह सिद्धू मुख्य अतिथि थे। पहले दिन रंगमंच में जतिंदर कौर और साहित्य में डाॅ. वरयाम सिंह संधू को पंजाब गौरव सम्मान से नवाजा गया। कला में आर्ट हिस्टोरियन डॉ. बीएन गोस्वामी को भी पंजाब गौरव सम्मान दिया जाना था, पर शहर के बाहर होने की वजह से वे पहुंच नहीं सके। अब उन्हें यह सम्मान फेस्टिवल के आखिरी दिन दिया जाएगा। साथ ही साहित्यकार जोगिंदर सिंह कैरों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। अवॉर्ड में साइटेशन, एक लाख रुपए का चेक दिया गया। नवजोत सिंह सिद्धू बोले- मैंने ओबामा, जॉन एफ कैनेडी, सुरजीत पातर के भाषण भी सुने हैं। पर डा. एमएस रंधावा के बारे में डा. गुलजार सिंह संधू ने जो बोला, उसे सुनकर मजा आया। 84 साल के इस वृद्ध के मन में छोटा बच्चा जो है, उसके क्या कहने। यह देखकर एक शेर याद आया-

मिट्टी का खिलाैना है, फना होने से डरता है, हादसों के इस शहर में हादसा होने से डरता है।

पंजाब का हाल देख उदास हूं- डाॅ. वरयाम सिंह संधू

गुरशरण भाजी और पति ने मेरा साथ दिया- जतिंदर कौर

मैं शुरुआत से ही इंकलाबी लिखता रहा हूं। चाहे इमरजेंसी की बात हो या 90 के दशक में खाड़कुओं की। मैं कभी घबराया नहीं और न अभी भी घबराता हूं। आज के लेखकों की बात करूं तो उनका दायरा सीमित हो गया है। इसलिए उनका लेखन उठ नहीं पा रहा। मेरे नॉवल पर बनी फिल्म चौथी कूट में मेरा और डायरेक्टर का विजन बिलकुल अलग था। पर मैं उससे नाराज नहीं। बोले- आज प्रकाशन बेहद आसान हो गया है। इसलिए कुछ भी लिखा जा रहा है और जब ऐसा होगा तो पाठक किताबों से दूर ही होगा। रही बात मुझे मिल रहे सम्मान की तो इसका नाम पंजाब गौरव सम्मान है। आज के पंजाब की हालत देखकर मैं उदास हूं पर निराश नहीं। मैं आखिरी दम तक इसके लिए लड़ता रहूंगा। मुझे खुशी है कि आप सब ने मुझमें अपना विश्वास जताया।

मैंने साल 1965 में थिएटर शुरू किया तब लड़कों और लड़कियों में बहुत फर्क समझा जाता था। मेरे ससुराल वालों ने मुझे इसलिए नहीं कबूला क्योंकि उन्हें लगता था कि मैं कंजरों के खानदान से हूं। मेरी लव मैरिज थी, इसलिए पति ने मेरा साथ दिया। आज मैं जो हूं अपने पति की वजह से हूं। गुरशरण भाजी मेरे आगे और मेरे पति मेरे पीछे ढाल बनकर खड़े रहे और मैं अपना काम करती रही। क्योंकि मेेरे अंदर एक आग थी, मैं जिद्दी थी। आज भी मैं आैरत की बेहतरी, सुरक्षा और इज्जत के बारे में बहुत सोचती हूं। रही बात अवॉर्ड की, तो हर अवॉर्ड ये सोचने पर मजबूर करता है कि हमने कुछ काम किया है। इसलिए और बेहतर परफॉर्म करने की प्रेरणा मिलती है।

रंधावा का अटैची नाले वाला- डॉ. गुलजार सिंह संधु

चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के चेयरमैन डॉ. गुलजार सिंह संधु ने अपने और डॉ. एमएस रंधावा की एसोसिएशन, उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प किस्से सुनाए।वे बोले- जो शख्स किसी को वाइस चेयरमैन और वाइस चांसलर जैसे पदों पर नियुक्त करता था, उसका अटैची नाले वाला था। एक बार हम कहीं बाहर गए। क्योंकि पहने हुए कपड़े फूल जाते हैं, इसलिए रंधावा साहब का अटैची बंद न हो। मैंने भी कोशिश की, पर वह बंद नहीं हुआ। रंधावा साहब एक नाला लेकर आए और बोले इससे बांध दो। बाद में इस बात पर बहुत मजाक हुई।

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