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आदि महोत्सव में बिखरा हरियाणा, लेह-लद्दाख और स्पीति का रंग

लाहौल-स्पीति, कुल्लू, लेह- लद्दाख, पंजाब, हरियाणा और देश के अन्य हिस्सों से भी । पारंपरिक पोशाक, गहने व सज-धज के साथ आए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

लाहौल-स्पीति, कुल्लू, लेह- लद्दाख, पंजाब, हरियाणा और देश के अन्य हिस्सों से भी । पारंपरिक पोशाक, गहने व सज-धज के साथ आए कलाकारों ने जब नृत्य- गायन पेश किया तो संस्कृति, परंपरा और एक साथ नजर आई। कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला कलाग्राम में आयोजित आदि महोत्सव में। इसका उद्घाटन शुक्रवार को हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने किया।

12 फरवरी तक चलने वाला यह महोत्सव गवर्नमेंट ऑफ इंडिया मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स के ट्राइबल कॉपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फैडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राईफेड) द्वारा आयोजित किया गया है। शुक्रवार शाम सबसे पहले लाहौल- स्पीति के कलाकारों ने मंगला चरण पारंपरिक नृत्य पेश किया। इसके बाद लेह-लद्दाख से आए कलाकारों ने नृत्य के जरिए अपनी परंपरा, संस्कृति के बारे में बताया। हरियाणा के कलाकारों ने शिवस्तुति की। इसके बाद हरियाणवी डांस किया। पंजाब के कलाकारों ने गिद्दा, भांगड़ा पेश किया। कुल्लू के कलाकारों ने भी पारंपरिक वाद्य यंत्रो के साथ प्रस्तुति दी। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा- भारत के तीन रूप हैं। एक जन-जाति, दूसरा ग्रामीण और तीसरा शहरी यानि विविधताएं बहुत हैं। फिर भी भाईचारे की भावना यहां देखने को मिलती है और यही इसकी विशेषता है। देखा जाए तीनों रूप की प्रगति बेहद जरूरी है। यहां 25 राज्यों के 70 स्टॉल लगाए गए हैं। जिनको कारीगरों और बुनकरों ने ट्राइबल आर्ट, क्राफ्ट एंड फूड से सजाया गया। इनमें जूलरी, स्कल्प्चर, डोर पार्टीशन, होम डेकोरेटिव आइटम, आदि देखे जा सकते हैं।

शिव-पार्वती की महिमा से किया गुणगान|महावीरगुड्डू एंड पार्टी के कलाकार हरियाणा के गंगोली के है। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में सबसे पहले गायन और नृत्य से शिव-पार्वती की महिमा का गुणगान किया। इसके बाद बाकी प्रस्तुतियां दी। इसमें उन्होंने एकतारा भी बजाया। महावीर ने बताया- यह एकतारा इनके दादा जी के जमाने का है। तब से लेकर अब तक उन्होंने इसे संभाल कर रखा है। साथ इसको परांदी, मोर पंख और अन्य चीजों से सजाया है।

एक ही गाने में समेटा लेह- लद्दाख|नॉर्दर्न आर्ट्स एंड कल्चर सोसायटी के यह कलाकार लेह लद्दाख से आए हैं। इसके प्रेसीडेंट श्रींग सोनम सोपारी बताते हैं कि अपनी प्रस्तुति में हमने नृत्य के ही नहीं बल्कि वहां के रहन-सहन के बारे में भी बताया। कुछ कलाकार नृत्य कर थे , कुछ बैठे हुए थे। एक कलाकार स्कल्प्चर बना रहा था और दो स्वेटर बुन रहे थे।

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