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रू-ब-रू, नुक्कड़ नाटक और आर्टवर्क के रंग

नाटक तो सभी देख लेते हैं। पर उसमें काम करने वाली शख्सियतों से बातें करने का मौका कम ही मिल पाता है। रंगमंच की इसी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

रू-ब-रू, नुक्कड़ नाटक और आर्टवर्क के रंग
नाटक तो सभी देख लेते हैं। पर उसमें काम करने वाली शख्सियतों से बातें करने का मौका कम ही मिल पाता है। रंगमंच की इसी दुनिया से अवगत कराने की कोशिश की गई। मौका बना है 13वें थिएटर फॉर थिएटर (टीएफटी) नेशनल विंटर थिएटर फेस्ट 2018 के रूप में। इसके जरिए अलग अंदाज में परफॉर्मिंग आर्ट की दुनिया से जोड़ा जा रहा है।

इसके तहत शहर में अलग-अलग जगहों पर एक्टिविटी रखी गई हैं। शुक्रवार को फेस्ट का पांचवां दिन था। इसकी शुरुआत रूबरू के साथ हुई। इसमें परवेश सेठी ने बातचीत हुई। प्लाजा में अलंकार ग्रुप के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक खेला। शाम के वक्त एक दिवसीय स्टैंप कलेक्शन की एग्जिबीशन लगी। आखिर में नाटक खेला गया। फरवरी के आखिर तक यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। लेकिन रोजाना पार्टिसिपेंट्स बदलते रहेंगे। प्लाजा में अलंकार थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक कर्तव्य खेला। इससे उन्होंने राजनीति और माइग्रेशन पर कटाक्ष किया। नाटक से बताया कि अगर सभी चीजें व्यवस्थित हों और लोगाें को गांव में सुविधाएं मिल जाएं तो उन्हें शहर की तरफ नहीं आना पड़ेगा। बताया गया कि ऐसी क्या परिस्थितियां होती हैं जिसकी वजह से उन्हें शिफ्ट होना पड़ता है।

शुक्रवार को टीएफटी फेस्ट का पांचवां दिन था। इसमें चार अलग-अलग एक्टिविटीज हुई।

विदेशी युवती के रूप में दिखाया सिंबोलिक चिड़िया को

नवरंग थिएटर में कहर सिंह ठाकुर का लिखा और डायरेक्ट किया नाटक चिड़िया के बहाने का मंचन हुआ। यह पेशकश कुल्लू के एक्टिव मोनल कल्चरल एसाेसिएशन ग्रुप के 16 कलाकारों की रही। उन्होंने परफॉर्मेंस से देश की व्यवस्था और भ्रष्टतंत्र को व्यंगात्मक तरीके से दिखाया। नाटक से चीं चीं नामक विदेशी युवती को कहानी के माध्यम से एक सिंबोलिक चिड़िया दिखाया है, जो पहाड़ों की खूबसूरती से खुश होकर वहीं रहने का सोच लेती है। उसके पास मटर का एक दाना होता है, जो वह एक व्यक्ति को पकड़ाकर नहाने के लिए निकल जाती है। उस व्यक्ति से दाना कहीं खो जाता है। ढूंढ़ने पर जब उसे नहीं मिलता तो वह सिपाही, अफसर, मंत्री व राजा से मदद की गुहार लगाती है। पर उसे अनदेखा किया जाता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब चीं चीं राजा को मजबूर कर देती है जिसके बाद सभी दाना ढूंढने लगते हैं।

थिएटर सहना

सिखाता है

थिएटर एक्टर व मेकअप आर्टिस्ट परवेश सेठी रूबरू सेशन में बोले- थिएटरियन हूं जो एक्ट करना, लिखना, सेट डिजाइन से लेकर मेकअप करना जानता है। 75 साल की उम्र हो गई है। 50 साल थिएटर में निकाल दिए। मैंने अपने जिंदगी में एक सिस्टम बना रखा था कि थिएटर को कभी घर नहीं आने देना और घर को थिएटर तक नहीं पहुंचने देना। मुझे मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर कम एक्टर के तौर पर लोग ज्यादा जानते हैं। कई अवाॅर्ड भी जीते। थिएटर बताता है कि आप जिंदगी में क्या हैं। यह ऐसी चीज है जो आपको सहना सिखाता है।

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Web Title: रू-ब-रू, नुक्कड़ नाटक और आर्टवर्क के रंग
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