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आदरणीय अल्लाह मियां और रामचंद्र जी की सेवा में...

एक खत जो लिखा गया अल्लाह मियां और श्री रामचंद्र जी के नाम। दूसरा खत एक राजनेता...तीसरा खत एक और राजनेता के नाम ...हर खत...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:00 AM IST
आदरणीय अल्लाह मियां और रामचंद्र जी की सेवा में...
एक खत जो लिखा गया अल्लाह मियां और श्री रामचंद्र जी के नाम। दूसरा खत एक राजनेता...तीसरा खत एक और राजनेता के नाम ...हर खत में भाषा अलग थी, अंदाज भी अलग। लेकिन संदेश एक ही था। यह देश किसी तरह एकजुट रह सके। सांप्रदायिकता खत्म हो सके। थिएटर ओलंपिक के तहत शनिवार शाम टैगोर थिएटर में मैं राही मासूम... नाटक के दौरान ये खत पढ़कर सुनाए गए। दरअसल, नाटक उर्दू हिंदी के मशहूर लेखक, कवि डॉ. राही मासूम रजा की जिंदगी पर आधारित था। हैदराबाद के ग्रुप रंगधारा और सूत्रधार के लिए इसे डायरेक्ट किया था भास्कर शेवालकर ने। खुद राही मासूम रजा की भूमिका में थे विनय वर्मा। एक घंटा पंद्रह मिनट मंच पर उन्होंने जो सुनाया वो सब रजा ने अपने जीवन में सहा और कहा है। वे गाजीपुर के गांव गंगौली के रहने वाले थे। गंगा की गोद में पले-बढ़े और आजीवन उससे प्रेम करते रहे। उनकी वसीयत थी-मृत्यु के बाद मुझे गंगा मां की गोद में सुला दिया जाए। विनय वर्मा ने रजा की भूमिका को निभाने के लिए न केवल उनकी भंगिमा ओढ़ी, बल्कि उनके अंदाज को भी जीया। पानदान, गिलौरी, पीकदान, सिगरेट, टाइपराइटर, कुर्सी, मेज और स्टेज पर नीले पर्दे के साथ लटकाई गई सफेट पट्‌टी (गंगा के रूप में) ने मिलकर मंच को रजा का घर बना दिया था।

ओलंपिक थिएटर के तहत शनिवार शाम टैगोर थिएटर में नाटक मैं राही मासूम...पेश किया गया ।

महाभारत बंद हो सकता है, रजा नहीं बदलेगा

डॉ. राही मासूम रजा ने प्रसिद्ध सीरियल महाभारत के संवाद और पटकथा लिखी थी। जिन दिनों ये सीरियल टीवी पर आ रहा था। कुछ लोगों ने शो के प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा पर दबाव बनाया कि एक मुसलमान लेखक से वे क्यों महाभारत पर काम करवा रहे हैं। उसे बदलकर किसी और को ले लें। लेकिन चोपड़ा साहब ने जवाब दिया-मैं सीरियल बंद कर सकता हूं, रजा को नहीं बदल सकता।

वतन...कोई मजहब नहीं जो बदला जा सके

रजा भारतीयता के पैरोकार थे। नाटक में इस बात को बखूबी पेश किया गया। वे कहते हैं-मैं एक हिंदुस्तानी हूं। उसके बाद मुसलमान। जितना आपका हक है उतना ही मेरा भी। मैं इस वतन के लिए जीता हूं। वतन कोई मजहब नहीं जिसे बदला जा सके। मैं यहीं का हूं, यहीं जियूंगा, यहीं मरूंगा।

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