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बताया हम आजाद तभी होंगे जब अपनी सोच के दायरे को बढ़ाएंगे

रब ने तो हमें इंसान बनाकर भेजा था, लेकिन हमने ही उस इंसान को जात-पात, धर्म में अपने आप बांट दिया। यही बात बताई गई...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:05 AM IST
बताया हम आजाद तभी होंगे जब अपनी सोच के दायरे को बढ़ाएंगे
रब ने तो हमें इंसान बनाकर भेजा था, लेकिन हमने ही उस इंसान को जात-पात, धर्म में अपने आप बांट दिया। यही बात बताई गई नुक्कड़ नाटक आजाद के जरिए। शहर में तीस दिनों का 13वां नेशनल विंटर थिएटर फेस्ट चल रहा है। इसके तहत सेक्टर-17 के प्लाजा में रोजाना नुक्कड़ नाटक होगा। बुधवार को फेस्ट का तीसरा दिन था। इसमें सीएस सिंधरा का लिखा नाटक आजाद खेला गया, जिसे जसपाल बरनाला ने डायरेक्ट किया। इसे टीएफटी ग्रुप के सात कलाकारों ने परफॉर्म किया। उन्होंने शहीद उधम सिंह के संघर्षशील जीवन की कहानी को दिखाया। यह प्रस्तुति 20 मिनट की रही। नुक्कड़ शैली से जात-पात पर कटाक्ष किया गया। साथ ही भ्रष्टाचार को भी दर्शाया गया। नाटक से भगतसिंह, चंद्रशेखर व उधमसिंह जैसे शहीदों का उदाहरण देकर यह बताया गया कि हम आजाद तो हैं, लेकिन सिर्फ कागजों में। वास्तविकता में जो आजादी है वो दिखती नहीं है। कब तक हम झंडे फहरा कर, आजाद भारत की बातें कर यूं ही मन को दिलासा देते रहेंगे। हम सही मायने में आजाद तभी होंगे जब हम अपनी सोच के दायरे को बढ़ाएंगे। इसे बदलेंगे और मौजूदा दौर में जीएंगे।

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बताया हम आजाद तभी होंगे जब अपनी सोच के दायरे को बढ़ाएंगे
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