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पांच खतों के संवाद से हुई सोसाइटी की बात

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:05 AM IST

News - खत के जरिए संवाद चलता है। इसके साथ ही युवा पीढ़ी पर कटाक्ष किया जाता है। यह समझाने की कोशिश की गई कि अगर वह अपनी...

पांच खतों के संवाद से हुई सोसाइटी की बात
खत के जरिए संवाद चलता है। इसके साथ ही युवा पीढ़ी पर कटाक्ष किया जाता है। यह समझाने की कोशिश की गई कि अगर वह अपनी जड़ाें से टूट गए तो मोहब्बत करना तो दूर की बात है, वह जिंदगी जीने के लिए भी बचेंगे नहीं। यह संदेश दिया गया सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में। यह प्रस्तुति रूपक कला एंड वेलफेयर सोसाइटी के कलाकारों ने दी। दरअसल, डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स, चंडीगढ़ प्रशासन और टैगोर थिएटर सोसाइटी का तीन दिवसीय ट्राईसिटी थिएटर फेस्ट का बुधवार को आखिरी दिन था। इसमें नाटक ख़त लई शुक्रिया का मंचन हुआ। लेखन जसवीर राणा का था, जबकि डायरेक्शन संगीता गुप्ता की। इससे गांव और शहरों के बीच के फर्क को दिखाया गया। संदेश भेजने के तौर तरीके खत्म होने की बात की गई। ख़त के जरिए बताया गया कि कैसे टेक्नोलॉजी की क्रांति की वजह से यह ना के बराबर हो गई है। इसमें डायरेक्टर संगीता ने थिएटर टेक्नीक्स का इस्तेमाल करते हुए परफॉर्मेंस को जीवांत बनाया। बताया कि ख़त लिखना तो हमारा इतिहास रहा है। भगतसिंह की बात करें, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जफरनामे की, सूफी फकीरों की, मिर्जा साहिबा, हीर रांझा या वारिस शाह की। यह हमारी धरोहर रही है। मगर वक्त के साथ इसकी जगह टेक्नोलॉजी ने ले ली है। अगर अपने पास्ट से सीख नहीं ली तो कम्युनिटी लगभग खत्म हो जाएगी। रस्म और रीति रिवाज खत्म हो जाएंगे। इसलिए हमें अपनी रीत को वापिस लाना होगा।

Stage Play

ट्राईसिटी थिएटर फेस्ट के आखिरी दिन रूपक कला एंड वेलफेयर सोसाइटी का नाटक ख़त लई शुक्रिया का मंचन हुआ।

दिखाई रीत और क्रांति की कहानी

नाटक में पांच खतों का संवाद दिखाया गया। एक छोटे शहर जैसे दिखने वाले कस्बे की जिंदगी काे दिखाया गया, जो क्रांति और रीत दाे किरदारों के आसपास घूमती है। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते हैं। वह खत लिखकर अपनी बातें करते हैं। अगर आवाज सुननी है तो लैंडलाइन पर फोन करते हैं। मगर क्रांति को खत लिखना बोरियत भरा लगता है। वहीं क्रांति का दोस्त फिक्की उसकी गर्लफ्रेंड को मोबाइल गिफ्ट करने के लिए कहता है। इसके बाद वह मोबाइल की दुनिया में खोता चला जाता है। उसके लिए रीत की अहमियत कम होने लगती है। मैसेज, एफबी, फिल्मों व एमएमएस की उसकी जिंदगी में एंट्री होती है। इस बहाने क्रांति डिजिटल वर्ल्ड से इंट्राेड्यूस हो जाता है। रीत लगातार खत लिखती रहती है। मगर उसे रिस्पांस नहीं मिलता। पांचवें खत में मौत की बात लिखती है। जिसके बाद क्रांति की आंखें खुलती है।

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