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ये थी मौलाना अबुल कलाम आजाद की फिलॉसफी

पार्टीशन के खिलाफ थे मौलाना अबुल कलाम आजाद। 1947 में उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना को एक बात कही थी कि तुम हिंदुस्तान...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:05 AM IST

पार्टीशन के खिलाफ थे मौलाना अबुल कलाम आजाद। 1947 में उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना को एक बात कही थी कि तुम हिंदुस्तान के दो नहीं, बल्कि तीन टुकड़े कर रहे हो। उनकी यह बात सच थी। हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बंटवारा तो हुआ ही। उसके बाद भारत से बांग्लादेश अलग हुअा। मौलाना एक ऐसी ही दूरदर्शी विचारधारा रखते थे। उन्होंने इस्लाम को नए तरीके से पेश किया। मॉडर्न स्वरूप में। एकता व अखंडता में यकीन रखते थे। उनकी फिलॉसफी बंटवारे की बजाय साथ मिलकर चलने की थी। हिंदू-मुस्लिम, एकता की जो बातें अब की जाती है वह उसके साथ 1910 में ही चलते थे। मौलाना अबुल की जीवन यात्रा को बाल भवन में नाटक से देखने को मिला। शहर में 13वां थिएटर फॉर थिएटर विंटर नेशनल थिएटर फेस्ट चल रहा है। वीरवार को फेस्ट का चौथा दिन था। इसमें शाहिद अनवर का लिखा नाटक मौलाना मंचित हुआ। इसे सुरेश कुमार ने डायरेक्ट किया। वही परफॉर्मर भी रहे।

नाटक से उनकी पैदाइश से लेकर हिंदुस्तान की आजादी के वक्त को दिखाया गया। यह नाटक सोलो एक्ट रहा। सुरेश ने अपनी परफॉर्मेंस से मौलाना की जिंदगी को लाइव जिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मौलाना की फिलॉसफी से अवगत कराने की कोशिश की। यह बताया कि वह क्रांतिकारी होने के साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे। साथ ही क्रांगेस के रिप्रेजेंटेटिव भी। उनका भाषण काफी प्रभावशाली होता था।

Stage Play

वीरवार को टीएफटी फेस्ट के चौथे दिन नाटक मौलाना मंचित हुआ। जिसे डायरेक्ट सुरेश कुमार ने किया।

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