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और आखिर में पागलखाने भेज दी जाती है झल्ली...

शादी के बाद जिस तरह से बहू से आशा की जाती है कि वह अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाएं। सब से मिल-जुल कर रहे और भी न जाने...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
और आखिर में पागलखाने भेज दी जाती है झल्ली...
शादी के बाद जिस तरह से बहू से आशा की जाती है कि वह अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाएं। सब से मिल-जुल कर रहे और भी न जाने क्या-क्या। उसी तरह ससुराल वालों का भी यह फर्ज बनाता है कि वह न केवल बहू की भावनाओं को समझे, बल्कि उन भावनाओं का आदर भी करें। अगर बहू की भावनाओं को दरकिनार किया जाए और उसके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाई जाए तो ऐसे में उसका मानसिक संतुलन खोना लाजमी है। ऐसी ही कहानी देखने को मिली सेक्टर-17 प्लाजा में। दरअसल, वीरवार को यहां पर नुक्कड़ नाटक झल्ली कित्थे जावे हुआ।

13वें टीएफटी विंटर नेशनल थिएटर फेस्टिवल 2018 के तहत सुचेतक रंगमंच मोहाली के कलाकारों ने इसे पेश किया। इसे अनीता शब्दीश ने डायरेक्ट किया। नाटक की कहानी भागांवाली नाम की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है। शादी होते ही उसका पति दुबई चला जाता है। जब वापिस आता है तो कुछ समय बाद ससुराल वाले बिना भागावाली की सहमति लिए और बिना उसकी भावनाओं को जाने ...घर की जिम्मेदारियां का हवाला देकर दोनों पति-प|ी को बिछड़ने पर मजबूर करते हैं यानि उसके पति को दोबारा दुबई भेज देते हैं। कहानी में मोड़ तब आता है जब पति के जाने के बाद सुसराल वाले जबरदस्ती जांच करवाते हैं कि पैदा होने वाला बच्चा लड़की है या लड़की। जैसे ही यह पता चलता है कि लड़की है तो वह गर्भपात करवा देते हैं। भागांवाली पहले ही पति से दूर रहकर परेशान थी और अब जबरन गर्भपात होने के बाद वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठती है। सुसराल वाले उसे डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय ढोंगी बाबाओं के पास ले जाते हैं और आखिर में उसे पागलखाने भेज देते हैं।

Street Play

सेक्टर-17 प्लाजा में वीरवार को नुक्कड़ नाटक झल्ली कित्थे जावे हुआ। सुचेतक रंगमंच मोहाली के कलाकारों ने इसे पेश किया।

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