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वो बोला, तुम्हारे पांव चूमना चाहता हूं और मेरी आंखें भर आई...

टैगोर थिएटर में आयोजित कथक उत्सव-2018 के तहत परफॉर्म करने पहुंची कथक कलाकर शमा भाटे ने बताया... सिटी रिपोर्टर |...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:05 AM IST

टैगोर थिएटर में आयोजित कथक उत्सव-2018 के तहत परफॉर्म करने पहुंची कथक कलाकर शमा भाटे ने बताया...

सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

रोहिनी भाटे भारत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों में से एक थीं। भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक को उन्होंने एक परफॉर्मर, टीचर, राइटर और रिसर्चर के तौर पर विकसित किया। 70 साल पहले पुणे में उन्हाेंने इस कला का बीज बोया जो आज बरकत का पेड़ बन गया है। यह कहती हैं कथक डांसर शमा भाटे। बताती हैं- अपनी गुरु से रोहिणी से प्रेरित होकर मेरा रूझान कथक की ओर हुआ।वे ऑल राउंडर थीं। कथक ही नहीं, म्यूजिक, ताल और भाव पर भी उनकी अच्छी पकड़ थी। बताती हैं- अंग्रेजों ने इस डांस फॉर्म को नीची नजर से देखा। इसलिए आजादी मिलने के बाद इसे इज्जत दिलाने के लिए हमारे गुरुओं ने कड़ी मशक्कत की। काफी समय भी लगा।

अपने बारे में शमा ने बताया- जब मैंने कथक सीखना शुरू किया तो इसके बारे में नहीं जानती थी। पर इस डांस को सीखने की एक लगन थी। आज के यंगस्टर्स की बात करूं तो वे सब कुछ पाना तो चाहते हैं। पर कम समय में। जबकि ऐसा नहीं होता। वो भी क्या करें, पेरेंट्स भी कहते हैं कि जब इंजीनियरिंग करके या एमबीए करके दूसरे बच्चे लाखों का पैकेज ले रहे हैं तो हमारे बच्चे संघर्ष क्यों करें।

एक्सपेरिमेंट करती हूं

शमा शुद्ध कथक के अलावा एक्सपेरिमेंटल कोरियोग्राफी भी करती हैं। बोलीं- मैं अपनी क्षमता के मुताबिक इस डांस फॉर्म को जितना प्रमोट कर सकती हूं, करती हूं। कस्तूरबा गांधी और कन्या भ्रूणहत्या पर भी कोरियोग्राफी कर चुकी हूं। इटली में 12 हजार की ऑडियंस के सामने परफॉर्म किया। वहां मेरी सोलो परफॉर्मेंस थी जिसके बाद एक आदमी ने आकर कहा कि मैं तुम्हारे पांव चूमना चाहता हूं। यह सुनकर मेरी आंखों में आंसू अा गए।

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