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पॉलिसी नोटिफाई

पॉलिसी नोटिफाई नेगोसिएशन पर ही जमीन एक्वायर होगी चंडीगढ़ में सिटी रिपोर्टर |चंडीगढ़ चंडीगढ़ में...

Danik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
पॉलिसी नोटिफाई

नेगोसिएशन पर ही जमीन एक्वायर होगी चंडीगढ़ में

सिटी रिपोर्टर |चंडीगढ़

चंडीगढ़ में प्रशासन अब नेगोसिएशन करने के बाद ही जमीन एक्वायर करेगा। इसके लिए प्रशासन की तरफ से पॉलिसी फॉर लैंड एक्विजीशन को नोटिफाई कर दिया गया है। इस पॉलिसी के हिसाब से जमीन मालिकों से नेगोसिएशन कर रेट तय किए गए जाएंगे और अगर तय टाइम के बाद तक सेटलमेंट नहीं होती है तो एक फिक्स इंटरेस्ट रेट के साथ प्रशासन जमीन एक्वायर कर लेगा। फाइनेंस डिपार्टमेंट की इस्टेट ब्रांच की तरफ से फाइनेंस कम सेक्रेटरी टू इस्टेट अजॉय कुमार सिन्हा के निर्देशों पर इस पॉलिसी को फाइनल किया जिस पर प्रशासक वीपी सिंह बदनोर की अप्रूवल के बाद इसको नोटिफाई कर दिया गया है। ये पॉलिसी इसलिए तैयार की गई है ताकि अलग-अलग डेवलपमेंट वर्क्स के लिए जो जमीन प्रशासन खरीदे उसमें कोर्ट केस कम हों और जो करोड़ों रुपए का मुआवजा बाद में किसानों को देना पड़ता है वो न देना पड़े। प्रोसेस पूरा होने के बाद कोई भी अन्य बेनीफिट लैंड ओनर को नहीं दिए जाएंगे।

प्रशासन ने नोटिफाई की पॉलिसी फॉर लैंड एक्विजीशन, रेट तय करेगी डिस्ट्रिक्ट प्राइस फिक्सेशन कमेटी


डिस्ट्रिक्ट प्राइस फिक्सेशन कमेटी जमीन के रेट तय करेगी। इस कमेटी में डिप्टी कमिश्नर, मेंबर ऑफ पार्लियामेंट, चीफ आर्किटेक्ट, लैंड एक्विजेशन ऑफिसर और लोकल काउंसलर अर्बन एरिया के लिए और रुरल एरिया के लिए सरपंच को शामिल किया गया है।


जमीन एक्वायर करने का टारगेट 6 महीने का रखा है। पर इससे ज्यादा देर होती है तो प्रशासन 6 परसेंट इंटरेस्ट मुआवजे का पूरा देने तक देता रहेगा। इसके लिए प्रशासन के डिपार्टमेंट और लैंड ओनर्स के बीच एग्रीमेंट करना होगा।


1.जिस डिपार्टमेंट ने लैंड एक्वायर करनी होगी वो लैंड एक्विजीशन ऑफिसर को प्रपोजल सब्मिट करेगा। इसके साथ जमाबंदी की कॉपी भी देनी होगी। एलएओ इस प्रपोजल को एग्जामिन करने के बाद इसको लेकर अपनी राय डिपार्टमेंट को देगा। फाइनल डिसिजन प्रशासक का होगा।

2. जमीन चिन्हित की जाएगी। लैंड एक्विजीशन अफसर जमीन की वैल्यू लगाएंगे। जमीन के रेट फिक्स करते वक्त 22 नवंबर 2016 की नोटिफिकेशन के हिसाब से सारे फैक्ट देखें जाएं। जमीन में कोई बिल्डिंग हैं या फसल या फलदार पेड़ हैं तो इसकी वैल्यू संबंधित डिपार्टमेंट लगाएगा।

3. लैंड ओनर का कंसेंट लैंड एक्विजीशन ऑफिस लेगा जोकि रेट और टोटल वैल्यू को लेकर होगा। सहमति रेट नहीं बनती है तो ये मामला लैंड एक्विजेशन अफसर डिस्ट्रिक्ट प्राइस फिक्सेशन कमेटी के सामने रखेगा। आखिरी फैसला प्रशासक के स्तर पर ही होगा।

4. डिस्ट्रिक्ट प्राइस फिक्सेशन कमेटी जो प्राइस फिक्स किया होगा उस हिसाब से 10 परसेंट तक प्रीमियम की मंजूरी दे सकती है। हालाकि इसके बाद भी फाइनेंस डिपार्टमेंट की अप्रूवल पैसों के लिए जरूरी होगी।

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