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संस्कृत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया म्युजिकल बैंड

News - संस्कृत हमारी ऐसी भाषा है जिसका चलन तो कम है पर यह अब भी पूरी ताकत के साथ खड़ी है। इसे आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कुछ...

Dainik Bhaskar

Mar 15, 2018, 02:05 AM IST
संस्कृत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया म्युजिकल बैंड
संस्कृत हमारी ऐसी भाषा है जिसका चलन तो कम है पर यह अब भी पूरी ताकत के साथ खड़ी है। इसे आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कुछ यंगस्टर्स अनोखा प्रयोग कर रहे हैं एक म्युजिकल बैंड के जरिए। ध्रुवा- द संस्कृत बैंड पिछले तीन साल से संस्कृत के श्लोकों को संगीत के साथ मंच पर पेश कर रहा है। बैंड के फाउंडर डॉ. संजय द्विवेदी ने बताया- संगीत अपने आप में भाषा है। जैसे लोग फ्रेंच या अंग्रेजी के बैंड्स को भी तो सुनते हैं। भाषा समझ आए न आए, उसी तरह संस्कृत को भी सुन सकते हैं। संस्कृत भाषा में इस बैंड को तैयार करने का मकसद यंगस्टर्स को इस भाषा के साथ जोड़ने के साथ-साथ उन्हें, मंगलाचरण, भजगोविंदम, शिवतांडव के पीछे के इतिहास को बताना है, जो उन्हें सकारात्मक दिशा में ले जाए। यह बैंड भोपाल बेस्ड है। द्विवेदी बताते हैं-मैंने संगीत में पीएचडी की। फिलॉसफी और हिंदी लिट्रेचर भी पढ़ा। दस साल तक संस्कृत के नाटकों में संगीत दिया। 2009 में गुरु प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी ने मुझे दिल्ली में फिक्की में परफॉर्म करने को कहा। पहली बार आदिशंकराचार्य का भजगोविंदम गाया। फिर तीन साल तक सोलो परफॉर्म किया। 24 जनवरी 2015 को बसंत पंचमी के दिन इस बैंड का विचार मन में आया। इसके बाद सहयोगी वैभव संतोरे, ज्ञानेश्वरी मेरे साथ जुड़े। अब तक देशभर में 200 से अधिक परफॉर्मेंसेस दे चुके हैं। फिलहाल एलबम की तैयारी कर रहे हैं।

बैंड के सदस्य| बांए से दांए अामिर खान सरोद पर, मनोज ड्रम्स , राकेश सतानकर फ्लूट , वायलिन यशवंत राव, पखावज तुषार घरात, गिटार विजय, की-बोर्ड सजन बैन, तबला स्वपनिल बागुल, वोकल डॉ. संजय द्विवेदी, वोकल ज्ञानेश्वरी द्विवेदी डा. संजय द्विवेदी।

इस तरह के रहे चैलेंज



हिंदी में इसलिए

समझाते हैं

डॉ. संजय ने बताया - हम अपनी हर परफॉर्मेंस का मतलब हिंदी में समझाते हैं।जैसे मेरे पिता जी गीता का एक अध्याय सुनाकर समझाते थे। इससे मुझे गीता याद हो गई। उदाहरण के तौर पर गीता में भगवान श्री कृष्ण कर्म कर फल की इच्छा न करने का संदेश देते हैं। यही संदेश हम देते हैं।

समझ नहीं आया पर एंजॉय किया

 संस्कृत नहीं आती, लेकिन परफॉर्मेंस को एंजॉय किया और बहुत सुकून मिला। दाेबारा मौका मिला तो ऐसी परफॉर्मेंस देखने जरूर जाऊंगी। नीरू

 मुझे कुछ समझ नहीं आया, लेकिन सुकून बहुत मिला। मैंने अपने बच्चे को पति के साथ बाहर भेज दिया और खुद यहां बैठकर सुनती रही।  गुरमीत

 इंस्ट्रूमेंट्स के फ्यूजन को मैंने बहुत एंजॉय किया और उसे आंखें बंद करके सुना। ऋषभ शर्मा

 मैं संजय के साथ म्युजिक करता था। तभी इस म्युजिक की ओर अट्रेक्ट हुआ और एक कनेक्टिविटी हुई। फिर संस्कृत सीखी और उनके साथ गाने लगा।  - वैभव संतोरे

 मैं भी संजय के साथ प्ले करती थी। जब बैंड के बारे में संजय ने बताया तो मुझे इंट्रस्टिंग लगा। बाद में बैंड में इतना बिजी हाे गए कि दोनों ने ही शादी कर ली।  - ज्ञानेश्वरी

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