चंडीगढ़ समाचार

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साहस ऐसी शक्ति है जिसके सामने डर अपना सब कुछ खो देता है : मुनि

अगर मनोदशा नकारात्मक के शिखरों को छू रही है तो जीवन ग्रत की ओर घसीटता चला जाता है। अंत में वह गहरे गढ्ढों में गिर कर...

Danik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:10 AM IST
अगर मनोदशा नकारात्मक के शिखरों को छू रही है तो जीवन ग्रत की ओर घसीटता चला जाता है। अंत में वह गहरे गढ्ढों में गिर कर अपनी अंतिम सांसे गिन रहा होता है। मनुष्य को थोड़ा साहस जरूर दिखाना पड़ता है। जान लीजिए कि जो डर से डर गया, वह मर गया वरना डर के आगे जीत है।

डर और साहस का एक संबंध है, क्योंकि साहस का न होना ही डर के पैदा होने का कारण होता है। साहस एक ऐसी शक्ति है जिसके सामने डर अपना सब कुछ खो देता है। मनुष्य को सर्वप्रथम अपने भय की पहचान करनी चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि अपने भय को पहचाने बगैर हम कभी उससे छुटकारा नहीं पा सकते। जिस बात या काम से आपको भय लग रहा है, उस काम को बार-बार करें। यह प्रवचन मुनि विनय कुमार आलोक ने अणुव्रत भवन सेक्टर 24 में दिए। उन्होंने कहा कि नकारात्मक और छोटी मनोदशाओं से बचने के लिए अपने आत्मविश्वास को बढ़ा़ना चाहिए, जब हमारे आत्मविश्वास में कमी आती है, तो हमारे भय का जन्म होता है।

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