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अब शराब का कारोबार अपने हाथ में लेने की तैयारी में सरकार

राज्य की भाजपा सरकार अब प्रदेश का शराब कारोबार अपने हाथ में लेना चाहती है। इसकी वजह शराब से मिलने वाला राजस्व...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 03:00 AM IST
राज्य की भाजपा सरकार अब प्रदेश का शराब कारोबार अपने हाथ में लेना चाहती है। इसकी वजह शराब से मिलने वाला राजस्व बढ़ाने के साथ ही शराब के अवैध कारोबार को काफी हद तक रोकना भी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और वित्त एवं आबकारी कराधान मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के स्तर पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। लेकिन, कैबिनेट में फैसला होना बाकी है। अगर, सब कुछ ठीकठाक रहा तो हरियाणा में प्राइवेट ठेकों के बजाय सरकारी दुकानों से ही शराब बिकेगी। सूत्रों के मुताबिक एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट पिछले करीब एक साल से इस कवायद में जुटा है। इसके लिए विभागीय टीमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक समेत कई राज्यों का दौरा भी कर चुकी हैं। इन राज्यों के सिस्टम की स्टडी करके विभाग अपनी स्टडी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप चुका है।

विभाग का मानना है कि अगर हरियाणा में शराब के कारोबार को सरकार अपने हाथ में लेती है तो इससे राज्य के राजस्व में 15 से 20 फीसदी इजाफा होने की संभावना है। क्योंकि जिन राज्यों ने भी शराब के कारोबार को अपने नियंत्रण में लिया है, उससे उनके राजस्व में 25 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है और ये कोई छोटी बात नहीं है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) से एक्साइज, पेट्रोलियम पदार्थ, बिजली और ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं को अलग रखा है। हरियाणा में अभी शराब कई राज्यों की तुलना में बहुत सस्ती है। यही वजह है कि यहां की शराब दिल्ली और राजस्थान से लेकर गुजरात तक तस्करी होती है। लेकिन, सरकार अगर इस कारोबार को अपने हाथ में लेती है तो इससे शराब कुछ महंगी हो जाएगी। इसकी वजह यह है कि फिर ठेके छोड़ने के बजाय सरकार लाइसेंस देगी। इसलिए ठेकेदार का मार्जिन खत्म करके लाइसेंस फीस, वैट और एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोत्तरी करेगी।

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