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63.01% इजाफा स्नैचिंग में 3 साल में, 31.92% केस ही सॉल्व कर पाई पुलिस

मोहाली जिले में वर्ष 2017 में इस साल अब तक भास्कर टीम. चंडीगढ़. लगातार बढ़ती स्नैचिंग की वारदातों से पब्लिक, खास...

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 03:10 AM IST
मोहाली जिले में वर्ष 2017 में

इस साल अब तक

भास्कर टीम. चंडीगढ़. लगातार बढ़ती स्नैचिंग की वारदातों से पब्लिक, खास तौर पर महिलाएं और सीनियर सिटीजन खौफ के साये में जी रहे हैं। पुलिस के लिए हर स्नैचिंग सिर्फ एक केस है, लेकिन लोगों की चेन लुट रही है और चैन भी। जिन 113 लोगों के घर जाकर भास्कर टीम ने मुलाकात की, उनमें से 22 का सामान ही रिकवर हुआ है। कई महिलाओं का अपनी गोल्ड चेन से इमोशनल अटैचमेंट था तो जिनके पर्स छीने गए वो आज भी डॉक्यूमेंट्स बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। पुलिस के क्या इंतजाम हैं इस पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई है।


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मोहाली-पंचकूला में भी चैन नहीं...





वुमंस डे पर प्रीति की चेन ऐसे छीनी गई कि गले में गंभीर जख्म हो गया। (ऐसी ही महिलाओं की आपबीती उन्हीं की जुबानी पेज-2 पर)


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2018 (अब तक)

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पंचकूला में




गोल्ड चेन छीनने वाले स्नैचर अपने घर में सोने का गोदाम नहीं बना रहे हैं। जाहिर है स्नैचिंग के बाद वह छीनी गई चेन ज्वेलर को बेचते हैं। पुलिस स्नैचर्स को तो पकड़ती है, लेकिन चोरी की चेन खरीदने वाले ज्वेलर्स पर नकेल नहीं कसती। 2017 में पुलिस ने 76 स्नैचरों को दबोचा, जबकि सिर्फ 3 ज्वेलर ही पकड़े गए, वह भी क्राइम ब्रांच ने पकड़े। ज्वेलर अच्छी तरह जानते हैं कि वह स्नैच की हुई चेन खरीद रहे हैं, क्योंकि ऐसी चेन टूटी हुई होती है। ज्वेलर इसे सस्ते दाम पर खरीदते हैं।

ऐसे होती है ज्वेलर्स से डील...







अगर पुलिस ज्वेलर्स को अरेस्ट करे और चेनों को केस प्रॉपर्टी बनाकर जब्त करे, तभी स्नैचिंग की वारदातें कम होंगी। जब तक ज्वेलर ऐसी चेन खरीदेंगे, तब तक स्नैचिंग जारी रहेगी।

...क्योंकि नहीं टूटती स्नैचर-ज्वेलर के बीच साठगांठ की कड़ी


स्नैचर पकड़े़ जाते हैं और कोर्ट से बच निकलते हैं, क्योंकि स्नैचिंग के शिकार लोग उन्हें पहचानने से ही इनकार कर देते हैं। 100 में से 88 मामलों में विक्टिम ने कोर्ट में आरोपी की शिनाख्त नहीं की। सिर्फ 12 ने ही स्नैचर को पहचाना। वहीं, पिछले दो सालों में यूटी पुलिस का स्नैचिंग के आरोपी को सजा दिलाने का सक्सेस रेट सिर्फ 40 फीसदी है। यानी हर 10 में से 6 स्नैचर बाइज्जत बरी हो जाते हैं।

1. स्नैचिंग का शिकार हुए ज्यादातर लोग कोर्ट में स्नैचर को पहचानने से इनकार कर देते हैं। गवाही से पहले ही इन्हें स्नैच किया हुआ सामान मिल जाता है।


शहर में स्नैचिंग के बाद पुलिस स्नैचरों के पीछे लगती है, लेकिन इसकी जड़-नशे को खत्म करने की कोशिश कभी नहीं की गई। स्नैचिंग की सिर्फ एक वजह है नशा, जो शहर में खुलेआम बिक रहा है। इस साल अब तक 16 स्नैचर पकड़े गए, जिनमें 11 स्नैचर नशे के आदी हैं। नशे के लिए ही ये स्नैचिंग करते थे।

स्नैचिंग करने वालों की लिस्ट पुलिस के पास होती है, जिसमें दिलबाग, मनीष जैसे पुराने स्नैचर्स के नाम हैं। लेकिन अब पहली बार स्नैचिंग करने वाले सामने आ रहे हैं, जिनमें अच्छे घरों के लड़के भी हैं।




2. स्नैचर आमतौर पर चेहरा ढककर वारदात करते हैं। वहीं, पुलिस लोगों से बयान करवाती है कि वह सामने आने पर स्नैचर की पहचान कर सकते हैं।