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हाईकोर्ट ने राजा की प्राॅपर्टी पर जिला अदालत के फैसले को रोका

फरीदकोट रियासत के राजा हरिंद्र सिंह बराड़ की 20 हजार करोड़ की जायदाद पर चंडीगढ़ जिला अदालत के फैसले पर मंगलवार को...

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 03:10 AM IST
फरीदकोट रियासत के राजा हरिंद्र सिंह बराड़ की 20 हजार करोड़ की जायदाद पर चंडीगढ़ जिला अदालत के फैसले पर मंगलवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता ने इस मामले में 25 अप्रैल के लिए सुनवाई तय करते हुए जिला अदालत का रिकाॅर्ड समन किया है। राजा की बेटी दीपिंदर कौर और मेहरावल खेवाजी ट्रस्ट ने चंडीगढ़ जिला अदालत के एडीशनल सिविल जज (सीनियर डिवीजन) 25 जुलाई 2013 और एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज के पांच फरवरी 2018 के फैसले को चुनौती देते हुए खारिज करने की मांग ही है। याचिका में कहा गया कि राजा की 22 मई 1952 को रजिस्टर्ड विल भी थी जिसमें बड़ी बेटी राजकुमारी अमृत कौर को मालिकाना हक से बाहर कर दिया गया था। याची की तरफ से सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल और वकील कुणाल मुलवानी ने कोर्ट में कहा कि राजा की मौत के समय उनकी मां जिंदा थी। ऐसे में राजकुमारी अमृत कौर का हिस्सा एक चौथाई ही बनता है। राजकुमारी अमृत कौर ने भी कहा कि वे भी जिला अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की तैयारी कर रही थीं।

ये था कोर्ट का फैसला

जिला अदालत ने राजा की बड़ी बेटी अमृत कौर और मंझली बेटी दीपिंदर कौर को इस प्रॉपर्टी की 50-50 परसेंट की हिस्सेदार देने का फैसला सुनाया था। जबकि दोनों बेटियां इस प्रॉपर्टी का पूरा हिस्सा मांग रही थीं। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 25 जुलाई 2013 को दोनों बेटियों को बराबरी का हिस्सा देने का आॅर्डर पास किया था। इस आर्डर के खिलाफ दोनों बेटियों ने सेशन कोर्ट में अपील कर दी थी जिसे खारिज कर दिया गया था।

भास्कर न्यूज | चंडीगढ़

फरीदकोट रियासत के राजा हरिंद्र सिंह बराड़ की 20 हजार करोड़ की जायदाद पर चंडीगढ़ जिला अदालत के फैसले पर मंगलवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता ने इस मामले में 25 अप्रैल के लिए सुनवाई तय करते हुए जिला अदालत का रिकाॅर्ड समन किया है। राजा की बेटी दीपिंदर कौर और मेहरावल खेवाजी ट्रस्ट ने चंडीगढ़ जिला अदालत के एडीशनल सिविल जज (सीनियर डिवीजन) 25 जुलाई 2013 और एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज के पांच फरवरी 2018 के फैसले को चुनौती देते हुए खारिज करने की मांग ही है। याचिका में कहा गया कि राजा की 22 मई 1952 को रजिस्टर्ड विल भी थी जिसमें बड़ी बेटी राजकुमारी अमृत कौर को मालिकाना हक से बाहर कर दिया गया था। याची की तरफ से सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल और वकील कुणाल मुलवानी ने कोर्ट में कहा कि राजा की मौत के समय उनकी मां जिंदा थी। ऐसे में राजकुमारी अमृत कौर का हिस्सा एक चौथाई ही बनता है। राजकुमारी अमृत कौर ने भी कहा कि वे भी जिला अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की तैयारी कर रही थीं।