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अब रेंजों की कमांड डीआईजी नहीं, आईजी संभालेंगे

पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य विधानसभा के आगामी बजट सत्र दौरान पंजाब पुलिस (संशोधन) ऑर्डिनेंस-2018 को एक्ट में तबदील...

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 03:10 AM IST
पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य विधानसभा के आगामी बजट सत्र दौरान पंजाब पुलिस (संशोधन) ऑर्डिनेंस-2018 को एक्ट में तबदील करने का फैसला किया है। यह फैसला मंगलवार को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रधानगी में हुई मंत्रिमंडल की मीटिंग में लिया गया। यह ऑर्डिनेंस राज्यपाल ने 2 जनवरी को जारी किया था ताकि राज्य के पुलिस ढांचे को तर्कसंगत बनाने के लिए सरकार की कोशिशों के तहत रेंजों में डीआईजी की जगह पर आईजी लगाए जा सकें। 2007 के एक्ट के सेक्शन (बी) की धारा नए एक्ट की व्यवस्थाएं अधीन बदल दी जाएगी, जिसके तहत जिला पुलिस, हथियारबंद पुलिस, खुफिया, जांच और तकनीकी और सहायक सेवाओं के अधिकारी अलग काडर के बन जाएंगे। प्रत्येक काडर की वरिष्ठता का राज्य स्तर पर रखरखाव किया जाएगा। एक काडर के मैंबर की दूसरे काडर में बदली की मंजूरी नहीं होगी परन्तु अधीनस्थ रैंकों के अधिकारी, जो विशेष ऑपरेशन ग्रुपों में होंगे, विशेष ऑपरेशन ग्रुप में अपना निर्धारित कार्यकाल सफलतापूर्वक मुकम्मल कर लिए जाने के बाद जिला पुलिस में तबदील किए जा सकते हैं।

कैबिनेट मीटिंग

तय समय पर ही लोगों को सेवाएं देनी होंगी, नहीं तो अफसरों को मिलेगी सजा

चंडीगढ़ | पूर्व अकाली-भाजपा सरकार का राइट टू सर्विस एक्ट कैंसिल करके कैप्टन सरकार ने ‘पंजाब ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी इन डिलिवरी आॅफ पब्लिक सर्विसिस बिल -2018’ को मंजूरी दी है। मंगलवार को यहां सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में नागरिक सेवाओं में कुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के मसौदे को हरी झंडी दे दी गई। नया कानून पंजाब सेवा के अधिकार (आरटीएस) कानून, 2011 को रद्द करेगा। सरकारी विभागों को सेवाएं तय समय पर देनी होंगी। ऑनलाइन रसीद जारी करना आवश्यक होगा। तय समय में जनता का काम न होने पर अफसर व मुलाजिम जिम्मेदार होंगे। उनके लिए प्रोत्साहन और दंड की व्यवस्था होगी। हालांकि इसका मसौदा तैयार किया जाएगा, कि समयावधि क्या रखी जाए, और सजा का क्या प्रावधान हो।

सरकारी सेवाएं बेहतर बनाने के लिए नया बिल

ऐसे पता कर सकेंगे आवेदन का स्टेटस... आवेदक मोबाइल या इंटरनेट से अपने आवेदन का स्टेटस पता कर सकेंगे। सरकार नए कानून के तहत सभी सार्वजनिक सेवाओं का तीन से पांच वर्षों के अंदर पूरी तरह कम्प्यूटरीकरण करेगी।

बंद होंगे 2000 सेवा केंद्र...

साथ ही 2000 सेवा केंद्रों को बंद करने का सरकार ने रास्ता साफ कर दिया है। सिर्फ 500 सेवा केंद्र रहेंगे और वे भी संबंधित डीसी की देखरेख मेंं काम करेंगे। प्राइवेट एजेंसी कोई भी सेवा केंद्र संचालित नहीं करेगी।