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असि. प्रोफेसर को नौकरी से हटाने के हक में 32 सीनेटर और 18 ने डिमोशन के लिए दिया वोट

News - पंजाब यूनिवर्सिटी की रविवार को हुई सीनेट मीटिंग में सेक्सुअल हैरासमेंट मामले में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 03:10 AM IST
असि. प्रोफेसर को नौकरी से हटाने के हक में 32 सीनेटर और 18 ने डिमोशन के लिए दिया वोट
पंजाब यूनिवर्सिटी की रविवार को हुई सीनेट मीटिंग में सेक्सुअल हैरासमेंट मामले में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर कोमल सिंह को सजा देने के लिए करीब पांच घंटे तक हंगामा होता रहा। तीन बार मीटिंग निरस्त हुई और वोटिंग भी कराई गई। नतीजा फिर भी बेनतीजा रहा, क्योंकि कोमल सिंह को पद से हटाने के लिए नियम अनुसार एक तिहाई वोट की जरूरत थी। वोटिंग में 51 सीनेटरों ने वोट किया। 18 ने उसका डिमोशन करने और 32 ने उसको नौकरी से हटाने के हक में वोट किया। एक वोट इनवैलिड रहा। बहस के दौरान स्थिति ये रही कि कुछ सीनेटरों ने कहा कि सजा अपराध के हिसाब से होनी चाहिए। उसने वर्बल एब्यूज किया है, उसको रेप की सजा नहीं दी जा सकती। इस पर प्रो. पैम राजपूत ने कहा कि ‘क्या आप रेप का इंतजार कर रहे हैं’। जब असिस्टेंट प्रोफेसर को पद से हटाने के लिए दलित कार्ड खेलने की कोशिश हुई और उसके परिवार को लेकर इमोशनल अपील हुईं तो पैम राजपूत फिर खड़ी हुईं। कहा कि ‘छाती ठोक कर कहें कि पुरुष सीनेटर कोमल सिंह को बचाना चाहते हैं। आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर ‘रेगुलर ऑफेंडर्स” है। वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने मेजर पेनल्टी के तहत पद से हटाने का प्रस्ताव दिया। उनका कहना था कि वह डॉ. कोमल को साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट व सुधार का मौका दे चुके हैं। उनका ट्रांसफर भी किया गया, कोई असर नहीं दिखा। इसलिए वह अब स्टूडेंट्स के साथ रिस्क नहीं ले सकते।

धृतराष्ट्र या गांधारी मत बनिए: डीयूआई प्रो. मीनाक्षी मल्होत्रा ने कहा कि कोमल सिंह को नौकरी से हटाना जरूरी है, वर्ना लड़कियां हिम्मत नहीं करेंगी। 70 फीसदी वुमन फैकल्टी वाले डेंटल इंस्टीट्यूट में हैरासमेंट के जो मामले आए हैं, उसके लिए वुमन फैकल्टी पर धिक्कार होना चाहिए। सीनेट मेंबर इस मसले पर महाभारत के धृतराष्ट्र या आंखों पर पट्‌टी बांधने वाली गांधारी न बनें। ऐसा हुआ तो पेरेंट्स अपने बच्चों को पीयू कैंपस पढ़ने नहीं भेजेंगे।


ये हैं तीन मेजर पेनल्टी

1. रिडक्शन इन रैंक/ग्रेड पे दोबारा छह हजार रुपए ग्रेड पे पर कर दिया जाएगा। एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए उसे दोबारा आठ साल और लगेंगे। बिना सजा के वह दो साल में एसोसिएट प्रोफेसर बन सकते थे।

2. पद से हटाना, लेकिन वह किसी भी नौकरी के योग्य रहेंगे और दोबारा पीयू में अप्लाई कर सकेंगे।

3. पद से हटाना और हमेशा के लिए नौकरी के अयोग्य करना।


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