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‘क्या अब रेप का इंतजार है, आरोपी को जॉब पर रखा तो लड़कियों को फिर तंग करेगा’

चंडीगढ़ | सीनेट मीटिंग में सेक्सुअल हैरासमेंट के मामले पर कई घंटे तक हंगामा होता रहा। मीटिंग के दौरान प्रिंसिपल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:10 AM IST

चंडीगढ़ | सीनेट मीटिंग में सेक्सुअल हैरासमेंट के मामले पर कई घंटे तक हंगामा होता रहा। मीटिंग के दौरान प्रिंसिपल हर्ष बत्रा, प्रिंसिपल सर्बजीत कौर, इंद्रजीत कौर, प्रिंसिपल निशा भार्गव और डॉ. सुरिंदर कौर ने चुप्पी साधे रखी। पुटा प्रेसिडेंट प्रो. राजेश गिल और पीयूकैश की मेंबर प्रो. अमीर सुल्ताना भी इस मुद्दे पर बोलने से बचती रहीं। हालांकि नीरू मलिक ने एक्टिवली इसमें पार्टिसिपेट किया। डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. मीनाक्षी मल्होत्रा तो भावुक ही हो गईं। बहस इतनी बढ़ी कि वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर को मीटिंग एडजॉर्न करनी पड़ी। अब ये मीटिंग इसी महीने के तीसरे हफ्ते में होगी। सोमवार को होने वाली फैकल्टीज की मीटिंग भी टाल दी गई है।

ये बातें हुई मीटिंग में...

इस मसले पर क्यों नहीं कराई स्पेशल सीनेट- प्रो. राजपूत

क्या आप रेप का इंतजार कर रहे हैं। वह रेगुलर ऑफेंडर्स है और उसको जॉब में रखा गया तो वह लड़कियों को दोबारा तंग करेगा। इस तरह से सिस्टम और कानून का मजाक न बनाएं। कानूनन 60 दिन के अंदर कार्रवाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन तीन साल तक ये फाइल इधर से उधर घूमती रही। फाइल गायब करने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

सजा दें, नौकरी से न निकालें- डॉ. अजय रंगा

सजा उसके गुनाह के अनुसार ही होनी चाहिए। इससे पहले फिजिकल सेक्सुअल हैरासमेंट करने वाले व्यक्ति को दो इंक्रीमेंट घटाकर छोड़ दिया गया था। कोमल को हटाने का एकमात्र कारण जातिगत सोच है। उसको सजा दें लेकिन नौकरी से न निकालें, उसके बच्चों का ध्यान रखें। वह बीमार है। पीयूकैश की रिपोर्ट में कमी है, क्योंकि इस शिकायत में बाद गवाह ही मुकर गए थे।

इंसाफ नहीं हुआ, तो गलत मैसेज जाएगा- आईएस चड्‌ढा

किसी एक के परिवार को ध्यान में रखकर इंसाफ नहीं देंगे तो सब जगह गलत संदेश जाएगा। शिकायतकर्ता भी किसी की बेटी है। ये उन लड़कियों के साथ नाइंसाफी है जिसके साथ उसने बदतमीजी की है।

वर्बल बदतमीजी वाले को रेप की सजा नहीं: प्रो. चमन

वर्बल बदतमीजी वाले को रेप की सजा नहीं दी जा सकती। उन्होंने न रेप किया और न ही कोशिश, एक ओर दलित और दूसरी ओर लड़की है। इसलिए सजा दें लेकिन उसकी काउंसलिंग कराएं। दो साल की फोर्स लीव पर भी भेज सकते हैं।

आरोपी को छोड़ा तो गलत होगा- डॉ. मलिक

इस केस में जो आरोपी है वह अपने बच्चों और मां-बाप की देखभाल नहीं कर रहा। ये भी जरूरी नहीं है कि छोटी-मोटी सजा देकर सीनेट अपनी गलतियां दोहराए। पीयू में इस तरह के मामले में किसी एक को भी छोड़ा गया तो यह गलत होगा।

गुनाह के हिसाब से ही होनी चाहिए सजा- रंधावा

डीपीएस रंधावा ने कहा कि कानून कहता है कि सजा क्राइम के हिसाब से ही हो सकती है। लूट के लिए कत्ल की सजा नहीं हो सकती, इसलिए गुनाह को देखते हुए सजा तय करें। मेजर पेनल्टी में जो सबसे कम वाली सजा है, वह दें।

सीनेटर्स के मामले पर बहस में शोर हुआ तो, कुर्सी छोड़कर निकले वीसी

एजुकेशन रिपोर्टर | चंडीगढ़

पीयू में पिछले साल फीस को लेकर हुए विवाद और पत्थबाजी में सीनेटर्स और लोकल नेताओं संबंधित वीसी के कमेंट पर सीनेट मीटिंग की शुरूआत में ही विवाद शुरू हो गया। एटानॉमी मसले को लेकर हुई प्रेस ब्रीफिंग में वीसी ने कहा था कि तुष्टिकरण की राजनीति की वजह से फीस नहीं बढ़ाई गई और स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट को हवा दी गई। अशोक गोयल ग्रुप ने इस कमेंट को लेकर हंगामा शुरू कर दिया और वीसी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा। वीसी बीच में ही मीटिंग छोड़ कर चले गए और करीब 10 मिनट कर मीटिंग निरस्त रही। बाद में पूर्व सांसद व सीनेटर सत्य पाल जैन ने कहा कि यदि वीसी की वजह से किसी की भावनाएं आहत हुईं तो बकायदा इसके खिलाफ रेसोल्युशन लाएं और कार्रवाई की मांग करें। अशोक गोयल, नरेश गौड़ आदि ने इस मसले पर वॉक आउट कर दिया। एक ओर हंगामा चलता रहा तो दूसरी ओर वीसी ने एजेंडा पास करना शुरू कर दिया। कुल सात एजेंडे पास हुए और आठवें एजेंडे यानि डॉ. कोमल सिंह को लेकर इतना विवाद शुरू हुआ कि मीटिंग ही एडजॉर्न कर दी गई। अगली मीटिंग इसी मुद्दे से फिर शुरू होगी जिसमें फीस बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण मसलों पर डिसकशन होना है।

एबीवीपी ने किया तरक्की का विरोध: सीनेट के एजेंडा में डेंटल इंस्टीट्यूट के उस टीचर की प्रमोशन का प्रस्ताव भी आया हुआ है जिस पर हाल ही में सेक्सुअल हैरासमेंट के गंभीर आरोप लगे हैं। अखिल विद्यार्थी परिषद ने इस बारे में मैमोरंडम सौंप कर फिलहाल उसकी तरक्की रोकने की मांग की है। ऐसा ना करने की सूरत में वह प्रोटेस्ट करेंगे।

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