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पराली के निपटारे के लिए केंद्र से मिले 48 करोड़ का हिसाब दें कैप्टन : आप

किसानों के साथ धोखा करने और पंजाब के वातावरण समेत लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है।

bhaskar news | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:00 AM IST

पराली के निपटारे के लिए केंद्र से मिले 48 करोड़ का हिसाब दें कैप्टन : आप
चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी ने मौजूदा कैप्टन सरकार के साथ-साथ पिछली बादल सरकार पर किसानों के साथ धोखा करने और पंजाब के वातावरण समेत लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है।

पार्टी के सह-प्रधान और विधायक अमन अरोड़ा, विधानसभा में उपनेता बीबी सरबजीत कौर, किसान संघर्ष समिति के कन्वीनर और विधायक कुलतार सिंह संधवा, नाजर सिंह मानशाहिया, रुपिन्दर कौर रूबी और मीत हेयर ने कहा, पराली जलाने के मामले में किसानों को पूरे देश में बदनाम करने के लिए पूर्व सीएम परकाश सिंह बादल और सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ही असली जिम्मेदार हैं। दोनों ने ही पराली के सही निपटारों के लिए पिछले दो साल में केंद्र सरकार की तरफ से जारी हुए करीब 100 करोड़ में से एक पैसा भी इसके लिए खर्च नहीं किया।

केंद्रीय मंत्री के बयान को बनाया आधार :
अमन अरोड़ा ने कहा, बादल और कैप्टन सरकार पर यह आरोप उन्होंने नहीं बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने लगाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने बताया है कि पराली को जलाने की बजाए उसका उचित निपटारा करने के लिए योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र की तरफ से 2016-17 में 49.80 करोड़ और 2017-18 के लिए 48.50 करोड़ पंजाब सरकार को अलॉट किए गए, परंतु पिछली अकाली -भाजपा सरकार और मौजूदा कांग्रेस सरकार ने पराली के निपटारे के लिए यह पैसा इस्तेमाल किया ही नहीं।

कहां गया पैसा :
अमन अरोड़ा ने सीएम कैप्टन से मांग की कि वह अपने कार्यकाल के दौरान आए पैसों के बारे में पंजाब के लोगों को स्पष्टीकरण दें और पिछली बादल सरकार की भूमिका की समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच करवाएं। आप नेताओं ने कहा, केंद्र की तरफ से हरियाणा और यूपी सरकारों को भी पहले साल 45 करोड़ और दूसरे साल 50 करोड़ पराली निपटारे के लिए दिए थे। इन दोनों सूबों ने 90% से अधिक राशि इस मकसद के लिए खर्च कर दी परंतु पंजाब सरकार ने यह पैसा पता नहीं कहां खर्च किया, जिस के बारे में कैप्टन सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।
एनजीटी के आदेश की भी अनदेखी करने का आरोप
आप नेताओं ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रिपोर्ट के पैरा नंबर 14 अनुसार पंजाब सरकार को निर्देश दिए गए थे कि पराली निपटारे के लिए मशीनरी और तकनीकी यंत्र या फिर किसान को इस पर आते जायज खर्च के पैसे मुहैया करवाए जाएं। 2 एकड़ से कम मालकी वाले किसान को मुफ्त हैपीसीडर मुहैया किये जाएं। सूबा सरकार पर दोहरी जिम्मेदारी डालते हुए ऐनजीटी ने पराली इको करने से लेकर ढुलाई करने का काम भी सरकार को दिया था, परंतु पंजाब सरकार ने कोई फर्ज नहीं निभाया।
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