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नॉमिनेटेड काउंसलर्स को प्रशासन हर हाल में दिलाना चाहता है वोटिंग राइट्स

Barendra Singh Rawat | Last Modified - Nov 15, 2017, 03:44 AM IST

मुकुल रोहतगी को हायर किया जो हर पेशी के लेंगे 3 लाख
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    डेमो फोटो
    चंडीगढ़. प्रशासन नॉमिनेटेड काउंसलर्स को हर हाल में वोटिंग राइट्स दिलाना चाहता है। इसके लिए प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के लिए जाने-माने वकील मुकुल रोहतगी को हायर किया है। प्रशासन उन्हें हर पेशी के 3 लाख रुपए देगा। प्रशासन किस हद तक यह केस जीतना चाहता है इसका पता इसी से चलता है कि सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन के केसों की पैरवी के लिए एक दर्जन एडवोकेट्स का पैनल है, जिन्हें हर हियरिंग के 7500 रुपए मिलते हैं, ड्राफ्टिंग के 2200 रुपए अलग से दिए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट में 27 नवंबर को केस की सुनवाई है। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में पैनल में शामिल अपने एडवोकेट चंद्र प्रकाश को केस की पैरवी के लिए कहा है, लेकिन बहस पूर्व अटॉर्नी जनरल और सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी करेंगे।
    वोटिंग राइट के खिलाफ याचिका दायर करने वाले सतिंदर सिंह ने कहा था...
    भाजपा के पूर्व काउंसलर सतिंदर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था- नॉमिनेटेड काउंसलर्स को वोटिंग राइट देना वोटरों की इच्छाओं को दबाना है। नॉमिनेटेड काउंसलर्स जीतकर नहीं आते, ऐसे में ये लोगों की पसंद नहीं हंै। सरकार इन्हें चुनती है। उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह खुद को चुने जाने वाली व्यवस्था के खिलाफ वोट करें। ऐसे में नॉमिनेटेड काउंसलर्स को वोटिंग राइट्स नहीं देने चाहिए।
    हाईकोर्ट ने खत्म किए थे वोटिंग राइट्...कहा था... चुनाव क्यों नहीं लड़ लेते नॉमिनेटेड
    भाजपा के पूर्व काउंसलर सतिंदर सिंह ने नॉमिनेटेड काउंसलर्स को वोटिंग राइट के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी। इस अपील पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस एसएस सरां व जस्टिस अवनीश झींगन की खंडपीठ ने 23 अगस्त को नॉमिनेटेड काउंसलर्स के वोटिंग राइट खत्म कर दिए थे। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि नॉमिनेटिड काउंसलर्स वोटिंग राइट्स के लिए इतने ही सीरियस हैं तो वह चुनाव क्यों नहीं लड़ लेते।
    भाजपाई मिले थे प्रशासक से...बदनोर ने दी फैसले को चैलेंज करने की मंजूरी
    हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की अप्रवूल एडमिनिस्ट्रेटर ने दी थी। हाईकोर्ट से वोटिंग राइट खत्म होने का फैसला आने के बाद भाजपा से जुड़े नेता एडमिनिस्ट्रेटर वीपी सिंह बदनोर से मिले थे। अब नॉमिनेटेड काउंसलर्स भी इस केस में सुप्रीम कोर्ट में पार्टी बन गए हैं। एमसी में 9 नॉमिनिटेड काउंसलर्स हंै। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में नॉमिनेटेड काउंसलर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हंै।
    प्रशासन की दलील...
    प्रशासन पहले भी सीनियर एडवोकेट्स को हायर करता रहा है। इस केस के लिए मुकुल रोहतगी को हायर किया गया है। हालांकि अभी यह तय किया जाना है कि उन्हें हर पेशी के लिए कितनी पेमेंट की जानी है। प्रशासन कोर्ट में यह दलील देने जा रहा है कि संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत चाहे नॉमिनेटेड काउंसलर्स को वोटिंग राइट नहीं है लेकिन अनुच्छेद 243 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह इस प्रावधान से केंद्र शासित प्रदेशों को छूट दे सकता है। इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए चंडीगढ़ में एमसी के गठन के समय इस मामले में छूट दी गई है। इसी आधार पर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की अपील की है।
    -अनुराग अग्रवाल, होम सेक्रेटरी
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Web Title: Administration Wants Voting Rights In Every Situation
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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