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मुमताज ने 787 KM पैदल चलने के बाद दिया था बच्ची को जन्म, ऐसी थी लव स्टोरी

4 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. मुमताज, मुगल बादशाह शाहजहां की 13 वीं पत्नी थीं। शाहजहां का जन्म 5 जनवरी 1592 को लाहौर पाकिस्तान में हुआ था। कहते हैं उसने अपनी बेगम मुमताज की याद में ही ताज महल का निर्माण कराया। 17 जून 1631 को अपनी 14 वीं संतान गौहारा बेगम को जन्म देने के दौरान लेवर पेन से मुमताज की मौत हो गई थी। बतादें कि मुमताज को प्रेग्नेंसी के आखिरी समय में आगरा से बुरहानपुर (म.प्र) लगभग 787 KM जाना पड़ा था, जिससे लंबी यात्रा से मुमताज को थकान हुई और पेन (दर्द) के कारण उनकी मौत हो गई थी।
 
(17 जून को मुगल बादशाह शाहजहां की पत्नी मुमताज का निधन हुआ था इस मौके पर हम शाहजहां और मुमताज के बारे में बता रहे हैं )
 
- मुमताज शाहजहां की चौथी पत्नी थीं जिनसे शाहजहां को 13 बच्चे थे। उनकी मौत मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की जैनाबाद में हुई थी। 
- इतिहासकारों के अनुसार साउथ इंडिया में लोधियों ने जब 1631 में विद्रोह का झंडा उठाया था तब शाहजहां अपनी प्रेग्नेंट पत्नी मुमताज को लेकर आ गए थे।
- मुमताज की फुल टाइम प्रेग्नेंसी के बावजूद शाहजहां उसे आगरा से 787 किलोमीटर दूर धौलपुर, ग्‍वालियर, सिरोंज, हंडिया होते हुए बुरहानपुर लाए थे जिससे अधिक दर्द के कारण उनकी मौत हो गई थी।
- मुमताज की मौत के बाद शाहजहां ने कसम खाई थी कि वो ऐसी इमारत बनवाएंगे, जिसके बराबर की दुनिया में कोई दूसरी इमारत नहीं होगी, इसके बाद ताजमहल का निर्माण कराया गया।
- 'ताजमहल या ममी महल' बुक के लेखक अफसर अहमद ने इन सब बातों को अपनी किताब में लिखा है।
 
ऐसी थी दोनों की लव स्टोरी...
 
- मुमताज और शाहजहां की मिसालें आज प्रेम की इमारत के रूप में दी जाती है।
- कहा जाता है कि मुमताज और शाहजहां दोनों की मुलाकात एक बाजार में हुई थी और उसके बाद दोनों की सगाई हुई थी।
- सगाई होने के 5 साल बाद 10 मई 1612 को दोनों की शादी (निकाह) हुई थी।
- मुमताज ने मरने से पहले भी शाहजहां को अपने पास मिलने बुलाया था लेकिन शाहजहां वहां नहीं पहुंच पाए थे।
 
शाहजहां को देखकर मुमताज की आंखों में आ गए थे आंसू...
 
- प्रेग्नेंसी के समय बच्ची को जन्म देने के बाद मुमताज ने अपनी बेटी जहां आरा को पिता के पास बुलाने भेजा था।
- जब शाहजहां कमरे में पहुंचे, तो वहां उसने मुमताज को हकीमों से घिरा हुआ पाया तो उन्हें अंदाजा हो गया था कि मुमताज ज्यादा देर तक जिंदा नहीं बचेगी।
- शाहजहां के पहुंचने के बाद सभी लोग लोग उस कमरे से बाहर चले गए थे। शाहजहां की आवाज सुनने के बाद मुमताज ने आंखे खोलीं और मुमताज की आंखों में आंसू आ गए थे।
- उसे रोता हुआ देखकर शाहजहां मुमताज के सिर के पास जाकर बैठ गए थे और कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई थी।
 
      
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