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हाईवे को छोड़कर इस साल नहीं बन पाएगी कोई भी सड़क, ठेकेदारों को हो रही पेमेंट

सड़कों समेत सभी प्रोजेक्टों पर रोक के बाद इस पर रिव्यू के 14 नवंबर को मीटिंग बुलाई गई है।

bhaskar news | Last Modified - Nov 06, 2017, 04:21 AM IST

  • हाईवे को छोड़कर इस साल नहीं बन पाएगी कोई भी सड़क, ठेकेदारों को हो रही पेमेंट
    चंडीगढ़.सूबे में इस साल नेशनल हाइवे को छोड़कर कोई भी नई सड़क बनने की कोई उम्मीद नहीं है। इसका कारण सरकार के पास इसके लिए पैसा नहीं होना है। वहीं, अकाली-भाजपा सरकार द्वारा आखिरी साल में शुरू किए गए सड़कों समेत सभी प्रोजेक्टों पर रोक के बाद इस पर रिव्यू के 14 नवंबर को मीटिंग बुलाई गई है।
    हालांकि पहले यह मीटिंग 8 नवंबर को होनी थी लेकिन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के हिमाचल प्रदेश के प्रचार में व्यस्त होने के कारण मीटिंग एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है। रिव्यू मीटिंग के बाद ही फैसला होगा कि कौन से प्रोजेक्ट जारी रहेंगे और कौन से बंद किए जाएंगे। विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी हुसन लाल ने इसकी पुष्टि की है।
    ठेकेदारों को अभी पेमेंट नहीं, फाइनांस डिपार्टमेंट को 533 करोड़ के बिल भेजे
    एकेसिंगला ने कहा कि इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर इसे नेशनल हाईवे बनाने को मान लिया है। कई काम पूरे होने के बावजूद अभी ठेकेदारों को पेम ेंट नहीं हुई है। फाइनांस डिपार्टमेंट को 533 करोड़ के बिल भेज दिए गए हैं जैसे ही ये पैसे मिलेंगे, पेमेंट कर दी जाएगी।
    खन्ना से सिधवां बेट तक बनेगा एक और नेशनल हाईवे
    एनएचवन में खन्ना से निकलकर लुधियाना फिरोजपुर नेशनल हाइवे क्रॉस करते सिधवां बेट तक जाने वाले रोड को केंद्र सरकार ने नेशनल हाइवे बनाने की सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी है। चीफ इंजीनियर नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स एके सिंगला ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह रोड खन्ना से निकलकर मालेरकोटला, रायकोट, जगराओं होता हुआ हुई सिधवां बेट तक जाएगा।
    प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की भी नहीं की जा रही पेमेंट
    बतादें कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 270 करोड़ के बिल विभिन्न डिविजनों ने भेज दिए हैं लेकिन ये अभी तक क्लियर नहीं हुए हैं। इसी तरह सेंट्रल रोड्स फंड के70 करोड़ रुपए भी केंद्र से मिल चुके है लेकिन काम होने के बावजूद इसका भुगतान नहीं किया जा रहा। पीआईडीबी से कर्ज लेकर 80 करोड़ रुपए का काम करवाया गया था चूंकि सरकार ने इस लोन पर ही रोक लगा दी इसके चलते यह राशि अदा नहीं की जा सकी है। काम रुक जाने चलते लिंक राेड्स की हालत बिगड़ती जा रही है।
    हर रोज दो से तीन केस अदालत में पहुंच रहे हैं। इस समय तीन दर्जन केस अदालतों में लंबित हैं। कुछ केसों में अदालतों ने सरकार के खिलाफ फैसला देते हुए ठेकेदारों को पेमेंट करने का आदेश भी दे दिया है लेकिन इसके बावजूद जब पेमेंट नहीं हो रही है तो ठेकेदार कंटेम्प्ट आफ कोर्ट में जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार जितने भी ठेकेदारों ने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट करवाया है, फाइनांस डिपार्टमेंट ने उसका भुगतान कर दिया है।
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