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ठंड में न बच्चों को बैठाने का प्रबंध, न दूसरी सुिवधाएं, फिर भी शुरू हो जाएगा प्री प्राइमरी प्रोजेक्ट

प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी की क्लासें शुरू करने से शिक्षा विभाग में असमंजस के हालात बन गए हैं।

होशियारपुर / चंडीगढ़ | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:10 AM IST

ठंड में न बच्चों को बैठाने का प्रबंध, न दूसरी सुिवधाएं, फिर भी शुरू हो जाएगा प्री प्राइमरी प्रोजेक्ट
चंडीगढ़.शिक्षा विभाग की ओर से मंगलवार को प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी की क्लासें शुरू करने से शिक्षा विभाग में असमंजस के हालात बन गए हैं। एक तरफ एजुकेशन सेक्रेटरी कृष्ण कुमार ने स्कूलों को कहा है कि वे हर हाल में अपने स्कूलों में तीनों कक्षाएं शुरू करें, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों की हालत यह है कि वे चाह कर भी बच्चों की नई कक्षाएं शुरू नहीं कर सकते। इसका सबसे बड़ा कारण स्कूलों में छोटी उम्र के बच्चों को बिठाने तक के लिए उचित जगह तक नहीं है।
वहीं कड़ाके की ठंड ने उनकी मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैंं। वहीं, शिक्षा मंत्री अरुणा चौधरी मंगलवार को मोहाली के फेज- 7 स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल में सरकार के ड्राम प्रोजेक्ट के तहत प्राइमरी स्कूलों में प्री नर्सरी कक्षाएं शुरू करने की औपचारिक शुरुआत करेंगी। इसके तहत इसी दिन सूबे के सभी 12500 प्राथमिक स्कूलों में प्री- प्राइमरी क्लासों की शुरुआत होगी जिस को ‘ खेल महल ’ का नाम दिया गया।
सवाल: एक स्कूल में 8 कक्षाओं को 2 टीचर आखिर किस प्रकार पढ़ाएंगे?
अगर इंफ्रास्ट्रक्चर की बात की जाए तो सूबे में ज्यादातर प्राइमरी स्कूलों में दो ही कमरे हैं। इनमें पांच कक्षाएं चलती हैं। मात्र 5 प्रतिशत स्कूल ऐसे होंगे जहां पर दो से ज्यादा कमरे होंगे। यही नहीं प्राइमरी स्कूलों में ऐसा कोई भी इंतजाम नहीं है जिसके मुताबिक इन छोटे बच्चों को संभाला जा सके। यहां तक कि वहां छोटे बच्चों के शौच आदि करने पर उनकी संभाल का भी कोई प्रबंध नहीं है। ऐसे में प्राइमरी अध्यापकों के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। यही नहीं प्राइमरी स्कूलों में मिड डे मील के मामले में भी अध्यापक दुविधा में फंस गए हैं कि आखिरकार जब बड़े बच्चों को मिड डे मील खिलाया जाएगा तो उस समय छोटे बच्चों के लिए क्या इंतजाम होगा। जबकि बड़े बच्चों और छोटे बच्चों की डाइट में जमीन आसमान का अंतर है।
शिक्षा विभाग के दावों के उल्ट है सामाजिक सुरक्षा स्त्री व बाल विकास विभाग के दावे
कृष्ण कुमार की ओर से यह दावा किया गया कि बाकायदा तौर पर क्लासें लगाई जाएंगी और बाकायदा तौर पर उसकी टाइमिंग 9.30 से लेकर 12.30 बजे तक की बताई गई है। लेकिन जब सामाजिक सुरक्षा स्त्री व बाल विकास विभाग की डायरेक्टर आईएएस कविता सिंह से बात गई तो उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेंटर वहां ही तबदील किए जाएंगे जहां पर प्राइमरी स्कूलों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर होगा और सिर्फ एक घंटा ही प्राइमरी स्कूल का अध्यापक इन लोगों को पढ़ाएगा। सूबे 13 हजार प्राइमरी स्कूलों में करीब 9 लाख बच्चे इस समय शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और लगातार बच्चों की संख्या इन स्कूलों में कम हो रही है। इसी के चलते 800 स्कूल बंद करने का भी फैसले लिया गया था। वहीं सूबे में 26 हजार आंगनवाड़ी सेंटर हैं और उनमें 5 लाख बच्चे आ रहे हैं और कृष्ण कुमार की नजर उन 5 लाख बच्चों पर है जिसे वह समझते हैं कि अगर यह बच्चे प्राइमरी शिक्षा के साथ जुड़ जाते हैं तो प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ सकती है।
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