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बेटे की मौत के बाद से गरीब बच्चों को पढ़ा रहा ये शख्स, ऐसी है इनकी कहानी

हरबिंदर सिंह भूपाल | Last Modified - Nov 14, 2017, 04:48 AM IST

करीब 17 साल पहले इकलौते इंजीनियर बेटे को सड़क हादसे में खोने के बाद एडवोकेट चंद्र भान खेड़ा टूटे नहीं।
बेटे की मौत के बाद से गरीब बच्चों को पढ़ा रहा ये शख्स, ऐसी है इनकी कहानी
मोगा.करीब 17 साल पहले इकलौते इंजीनियर बेटे को सड़क हादसे में खोने के बाद एडवोकेट चंद्र भान खेड़ा टूटे नहीं। उन्होंने स्लम एरिया के बच्चों को अपना सहारा बनाया और उन्हें पढ़ाने की ठानी। मिन्नी सेक्टेरिएट के साथ नहर किनारे झुग्गी झौंपड़ी में रहने वाले 3 से 5 साल के 20 बच्चों को गोद लेकर खुद पढ़ाना शुरू किया। रोज शाम को क्लास लगाते। शुरुआत में अकेल थे लेकिन बाद में लोग जुड़ते गए। ये सिलसिला यू हीं चलता रहा।

2005 में विदरिंग रोजिज़ चाइल्ड केयर सेंटर की स्थापना की। झौंपड़ी में ही दूसरी क्लास तक स्कूल खोलकर एक टीचर की भी व्यवस्था कर दी। बच्चों को सीबीएसई का सिलेबस पढ़ाया। इसके बाद सैफूदीन किचलू स्कूल में एडमिशन दिलानी शुरू कर दी। वहां भी दानी सज्जनों की मदद से आधी फीस माफ करवा रखी है। समय बीतने के साथ कारवां भी बढ़ता गया। अब झौंपड़ी में चल रहा स्कूल जीरा रोड पर एक इमारत में शिफ्ट हो चुका है। यहां आम स्कूलों जैसी सभी सुविधाएं हैं। यहां तक कि बच्चों को मुफ्त किताबें, कापियां और स्टेशनरी भी फ्री दी जाती हैं। मददगारों में प्रशासन भी जुड़ गया है। बच्चों को मिड-डे-मील सरकार की तरफ से दिया जाता है। खेड़ा के स्कूल में अब 100 स्टूडेंट्स हैं। जिन्हें चार टीचर पढ़ा रहे हैं। 2005 से अब तक स्कूल से निकले 650 बच्चे हाई एजुकेशन भी पूरी करने वाले हैं।
दिल्ली का पब्लिशर भी स्कूल से जुड़ा :खेड़ा
स्लम एरिया में झुग्गी में रहने वाले मजदूर राम किशन ने बताया, यहां से पढ़ने के बाद उनकी बेटी किचलू स्कूल में पढ़ रही है। पांचवीं क्लास में उसका तीसरा रैंक आया है। ये सब चंद्र भान खेड़ा की मेहनत से ही साकार हो सका है। डीईओ एलीमेंट्री व सैकंडरी गुरदर्शन िसंह बराड़ के मुताबिक एडवोकेट चंद्रभान खेड़ा का यह बहुत बड़ा प्रयत्न है। हम इन बच्चों के लिए हर रोज मिड-डे-मील व दूध उपलब्ध कराते हैं। एडवोकेट खेड़ा ने बताया, पिछले 5 सालों से रत्न पब्लिकेशन दिल्ली भी उनकी संस्था से जुड़ गया है। बच्चों को सिलेबस की पुस्तकें फ्री में यहीं से आती हैं।
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Web Title: bete ki maut ke baad se garib bachcho ko pढ़aa raha ye shakhs, aisi hai inki kahani
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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