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बेस्ट शूटर रही मां की बेटी ने कॉमनवेल्थ में दिलाया गोल्ड, इनके कहने पर बनी थी शूटर

2013 में उन्होंने ओलंपियन शूटर अंजली भागवत को भी हराया।

Dainik Bhaskar

Apr 14, 2018, 06:26 AM IST
कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को सिल्वर मेडल दिलाने वाली अंजुम स्कूल में कई गेम्स की चैंपियन रहीं हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को सिल्वर मेडल दिलाने वाली अंजुम स्कूल में कई गेम्स की चैंपियन रहीं हैं।

चंडीगढ़. चंडीगढ़ की स्टार शूटर अंजुम मौदगिल ने गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है। उन्होंने ने वुमंस 50 मीटर राइफल 3-पोजिशन में सिल्वर मेडल हासिल किया। इसमें गोल्ड मेडल भी भारत के ही नाम रहा। तेजस्वनी सावंत ने फाइनल में अंजुम को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। दोनों ही शूटर्स ने इस मेडल में रिकॉर्ड बनाया। सावंत ने फाइनल में गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि अंजुम ने क्वालिफाइंग राउंड में 589 अंकों के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया।


वे क्वालिफाइंग राउंड से पहले काफी परेशान थीं। उनकी मां शुभ मौदगिल ने बताया कि अंजुम की गन का फिल्टर खराब हो गया था, जिससे उसका निशाना सही जगह पर नहीं लग रहा था। उसने उसी के साथ प्रैक्टिस की और कोच दीपाली ने उनकी मदद की। आखिरकार उसी गन के साथ वे कंपीटिशन के लिए उतरीं और रिकॉर्ड बनाते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया।

- अंजुम स्कूल में कई गेम्स की चैंपियन रहीं हैं लेकिन शूटिंग उन्होंने 2007 में ही शुरू की। उनके हाथ में पहली बार गन उनकी मां शुभ मौदगिल ने थमाई।

- खुद एनसीसी की शूटर रहीं शुभ ने बेटी किसी से उधार ली पिस्टल से निशाना लगाना सिखाया।

- उनमें में कुछ खास ही था क्योंकि उन्होंने 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद ही स्टेट में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पिस्टल ली और कंपीटिशन करना शुरू किया।

- इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा आैर हर नेशनल में हिस्सा लेते हुए मेडल पर निशाना लगाया। 2013 में उन्होंने ओलंपियन शूटर अंजली भागवत को भी हराया।

गन के साथ ड्राइंग किट भी रहती है

वे कंपीटिशन के दौरान और घर पर पेंटिंग करके खुद को रिफ्रेश रखती हैं। उनके बैग में उनकी राइफल के साथ-साथ ड्रांइग के लिए पेंसिल और ब्रश हमेशा रहते हैं। इंस्टाग्राम अकाउंट पर वे अपने पेंटिग्स की फोटो हमेशा लगाती रहती हैं, बुद्ध की पेंटिंग में उन्हें खासी महारत हासिल है। उनकी पेंटिंग्स कई लोग खरीदते भी हैं और वो बतौर तोहफे में भी देती हैं।

पढ़ाई में भी एक्सपर्ट

वे शूटिंग के साथ-साथ पढ़ाई में भी आगे हैं। उनको प्रमोट करने वाले डीएवी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमलेेंद्र मान ने कहा कि अंजुम की पढ़ाई के साथ शूटिंग लगातार जारी रही। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज से ही स्पोर्ट्स साइकॉलोजी में मास्टर डिग्री हासिल की। वे हमेशा दोनों में बैलेंस रखती हैं। स्कूल से ही वो गेम्स और स्टडीज में आगे रही हैं।

शूटर रही हैं मां भी

शूटिंग करने के पहले टिप्स अपनी मां शुभ से ही मिले थे। शुभ मौदगिल भी एनसीसी की शूटर रही हैं और उन्होंने 1983 में बेस्ट शूटर का टाइटल भी हासिल किया था। इसके अलाव वे पंजाब यूनिवर्सिटी से भी खेलीं। शुभ ने इसके अलावा जिम्नास्टिक में तीन नेशनल खेले और वॉलीबॉल भी खेला। मां की ही तरह अंजुम भी शूटिंग के अलावा थ्रो बॉल में नेशनल खेली हैं।

शूटिंग उन्होंने 2007 में ही शुरू की। शूटिंग उन्होंने 2007 में ही शुरू की।
उनके हाथ में पहली बार गन उनकी मां शुभ मौदगिल ने थमाई। उनके हाथ में पहली बार गन उनकी मां शुभ मौदगिल ने थमाई।
पढ़ाई में भी एक्सपर्ट हैं अंजुम पढ़ाई में भी एक्सपर्ट हैं अंजुम
शूटर रही हैं मां भी। शूटर रही हैं मां भी।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को सिल्वर मेडल दिलाने वाली अंजुम स्कूल में कई गेम्स की चैंपियन रहीं हैं।कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को सिल्वर मेडल दिलाने वाली अंजुम स्कूल में कई गेम्स की चैंपियन रहीं हैं।
शूटिंग उन्होंने 2007 में ही शुरू की।शूटिंग उन्होंने 2007 में ही शुरू की।
उनके हाथ में पहली बार गन उनकी मां शुभ मौदगिल ने थमाई।उनके हाथ में पहली बार गन उनकी मां शुभ मौदगिल ने थमाई।
पढ़ाई में भी एक्सपर्ट हैं अंजुमपढ़ाई में भी एक्सपर्ट हैं अंजुम
शूटर रही हैं मां भी।शूटर रही हैं मां भी।
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